मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी कर भोपाल ने पकड़ी रफ्तार, इंदौर अब भी कर रहा इंतजार

मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी कर भोपाल ने पकड़ी रफ्तार, इंदौर अब भी कर रहा इंतजार

भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार हो गया है लेकिन अभी तक इंदौर का मास्टर प्लान कागजों तक ही सीमित है। भोपाल के साथ इंदौर के मास्टर प्लान की प्रक्…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 03:00:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 11:06:23 PM (IST)

मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी कर भोपाल ने पकड़ी रफ्तार, इंदौर अब भी कर रहा इंतजार
इंदौर के मास्टर प्लान का मैप और इंदौर का विहंगम दृश्य।

HighLights

  1. इंदौर के आगामी मास्टर प्लान में 882 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल एरिया के विकास की योजना
  2. अभी तक इंदौर का मास्टर प्लान कागजों तक ही सीमित है
  3. भोपाल आगे निकल गया गया है और इंदौर पीछे रह गया है

उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर : भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार हो गया है लेकिन अभी तक इंदौर का मास्टर प्लान कागजों तक ही सीमित है। भोपाल के साथ इंदौर के मास्टर प्लान की प्रक्रिया भी एक साथ शुरू हुई थी लेकिन इसमें भोपाल आगे निकल गया गया है और इंदौर पीछे रह गया है।

चार साल पहले इंदौर में मास्टर प्लान को लेकर दर्जनों बैठके हुई। बीतें वर्षो में देशभर के टाउन एंड प्लानर ने भी इंदौर में आकर तेजी से बढ़ते देश के प्रमुख इंदौर शहर के भावी मास्टर प्लान पर सुझाव दिए और मंथन किए। इसके बाद भी इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट अब तक जारी नहीं हो सका है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में इंदौर के वर्ष 2021 तक के विकास का मास्टर प्लान जारी हुआ था। तय समयावधि बीते पांच साल बीत चुके है। पांच साल की देरी के बाद बाद भी अब तक इंदौर का मास्टर प्लान अभी तक जारी नहीं हो सका। शहरवासी, निवेशक भी भोपाल की तरह इंदौर के 2047 तक के मास्टर प्लान का इंतजार कर रहे है। जबकि इंदौर के मास्टर प्लान पर राज्य सरकार ये हरी झंडी मिलने पर डायरेक्टर नगर एवं ग्राम निवेश को इसके प्रकाशन की ही कार्रवाई करना है।

  • 2008 में जारी हुआ था अखिरी मास्टर प्लान 2021 तक के लिए इंदौर मास्टर प्लान
  • 505 वर्ग किलोमीटर : वर्तमान में इस क्षेत्रफल पर विकास की है योजना
  • 882 वर्ग किलोमीटर: 2047 के प्लान में इस क्षेत्रफल के विकास की बनेगी योजना

इंदौर के मास्टर प्लान की ऐसी है धीमी चाल

  • 2020 : इंदौर के प्लानिंग एरिया में 79 गांवों को शामिल किया गया।
  • 2021 : धारा 16 लागू की गई। वर्तमान भूमि उपयोग मानचित्र तैयार किया गया और गजट नोटिफिकेशन हुआ।
  • 2021-22 : इंदौर में सारे विभाग, संस्थानों , व्यापारी वर्ग सहित अन्य समूहों की सात- आठ बैठके हुई।
  • 2023: नगर निगम ने सिरपुर से भवंरकुआ तक के क्षेत्र का जोनल प्लान तैयार हुआ।
  • 2024 : इंदौर का विजन डॉक्यूमेंट बना, देश के बड़े-बड़े टाउन प्लानर इंदौर आए और शहर के मास्टर प्लान को लेकर उन्होंने सलाह दी।

मास्टर तो रह गया अन्य प्लान लेने लगे आकार

  • कंप्रीहेंसिव मोबिलिटी प्लान : मेट्रो प्रबंधन ने इंदौर के ट्रैफिक व परिवहन के लिए 2024 में यह प्लान तैयार किया।
  • जोनल प्लान : नगर निगम ने सिरपुरव भंवरकुआ क्षेत्र के 68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का बनायां
  • उज्जैन- इंदौर मेट्रोपालिटन रीजन : 16 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र घोषित हुआ। सिचुएशन एनालिसिस रिपोर्ट हो रही तैयार।

मास्टर प्लान न होने के नुकसान

  • शहर का अनियोजित विकास व फैलाव होता है।
  • धारा 16 की अनुमति अलग-अलग क्षेत्रों में दी है। उन्हें मास्टर प्लान में सम्मिलित करना मुश्किल होगा।
  • उज्जैन सिंहस्थ के लिए जो योजना बन रही है। जैसे ग्रीन फील्ड कारिडोर, प्लान न आने से यह अव्यवस्थित रूप से तैयार होगा।
  • इंदौर शहर में नगरीकरण तीव्रता हो रहा है। यदि प्लान नहीं आया तो नगर के चारों और अवैध निर्माण व विकास होगा। इसे बाद में हटाना होगा।

मास्टर प्लान यदि अभी लागू हो तो ये होंगे फायदे

  • ट्रैफिक व ट्रांसपोर्टेशन की समस्या से निजात मिलेगी।
  • शहर के सभी क्षेत्रों में समान रुप से स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यवसाय की सुविधा होगी।
  • मास्टर प्लान आने से नए सड़क मार्ग, नए फ्लाईओवर सबकी योजना बनेगी।
  • मेट्रो के कंप्रीहेसिव मोबिलिटी प्लान को लागू किया जा सकेगा।
  • मेट्रो पालिटन रीजन में शामिल अन्य शहरों से सड़क कनेक्टिविटी व अधोसंरचना , उघोग का सही तरीके से विकास होगा।

इंदौर का मास्टर प्लान जारी करने में नही है कोई बाधा

इंदौर व भोपाल मास्टर प्लान की प्रक्रिया शुरू हुई थी और उच्च अधिकारी व शासन के समक्ष प्रेजेंटेशन भी एक साथ हुए। दोनों के शहरों के मास्टर प्लान का लंबे समय इंतजार हो रहा था। भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जब जारी हो चुका है तो इंदौर का भी जल्द जारी किया जाना चाहिए। इंदौर के मास्टर प्लान को जारी करने में कोई प्रशासनिक या विधिक बाधा नहीं है। इंदौर शहर के महत्व को देखते हुए सरकार को इसे जल्द लागू करना चाहिए। -एस के मुदगल, पूर्व संयुक्त संचालक, नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय

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