एशियाड का लगातार तीसरा स्वर्ण जीतने के लिए शॉटपुटर तजिंदर पाल सिंह तूर ने अपने गुरु एमएस ढिल्लों को ऑस्ट्रेलिया से मिन्नतें करके बुलाया था। यह वही ढिल्लों हैं जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियाड में चिल्लाकर कैंसर के चलते अंतिम सांसें गिन रहे पिता करम सिंह का हवाला दिया था। कोच के उन शब्दों ने तूर में ऐसा जज्बा भरा कि वह स्वर्ण जीतकर लौटे। तूर जानते थे कि इस बार भी कोच उन्हें स्वर्ण दिला सकते हैं, लेकिन तूर के हिस्से में रजत आया। तूर ने स्वीकार किया कि शरीर उस तरह नहीं चल रहा था जैसा 2018 और 2023 फाइनल में चला था। उनका वजन 140 किलो या उससे नीचे नहीं आ पाया जिसका उन्होंने लक्ष्य रखा था। तूर ने पिछले दो स्वर्ण भी 140 किलो के वजन पर जीते थे, लेकिन इस बार उनका वजन 144 से 145 किलो था।
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