
30 सितंबर से लापता हुई नाबालिग के परिजन की इन आठ दिनों में जमकर अग्निपरीक्षा हुई है। पहले दिन से वे संघर्ष करते रहे। पहले अपहरण की शिकायत और नामजद एफआइआर करवा देने के बावजूद दो से तीन दिन तक पुलिस थाने के चक्कर लगाते रहे। बाद में शव मिल गया तो ब्यावरा से उन्हें 6 अक्टूबर को शव वाहन मंगवाने में पसीने छूट गए, परेशान होते रहे। शव परीक्षण और पीएम के लिए उसे भोपाल भेजा गया तो वहां भी संघर्ष कम नहीं हुआ। अगले दिन यानी बुधवार को 11.30 बजे तक लंबा इंतजार करना पड़ा। काफी देर तक वे इंतजार करते रहे, तब जाकर पोस्टमार्टम हो पाया। ऐसे में शव मिलने के दूसरे दिन भी नाबालिग का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। परिजन ने बताया कि अब गुरुवार सुबह उसकी अंत्येष्टि होगी।
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