Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। नौ दिनों तक भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं और विधि-विधान से पूजा, व्रत और भोग लगाते हैं। मान्यता है कि इन दिनों मां दुर्गा की उपासना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। नवरात्रि की पूजा में फूल, फल, मिठाई, भोग और अन्य पूजन सामग्री का विशेष महत्व होता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं में कुछ ऐसी वस्तुएं भी बताई गई हैं, जिन्हें देवी पूजा में अर्पित करने से बचना चाहिए। ऐसे में अगर आप भी इस नवरात्रि घर में माता की पूजा करने वाले हैं तो यह जान लेना जरूरी है कि किन चीजों को पूजा की थाली से दूर रखना चाहिए।

2 of 8
शारदीय नवरात्रि 2026
– फोटो : AI
शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर, रविवार से होगी। इसी दिन घटस्थापना के साथ नवरात्रि पर्व का शुभारंभ माना जाएगा। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इस बार दुर्गा अष्टमी और महानवमी 19 अक्तूबर, सोमवार को पड़ेंगी। इसके अगले दिन यानी 20 अक्तूबर को विजयदशमी (दशहरा) मनाया जाएगा।

3 of 8
मां दुर्गा को तुलसी अर्पित करना क्यों उचित नहीं?
– फोटो : Adobe Stock
मां दुर्गा को तुलसी अर्पित करना क्यों उचित नहीं?
तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र पौधा माना जाता है और भगवान विष्णु की पूजा में इसका विशेष महत्व है। हालांकि देवी दुर्गा की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा सामान्य रूप से नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के कुछ स्वरूपों की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना गया है। इसलिए नवरात्रि में माता को भोग या पूजा सामग्री अर्पित करते समय तुलसी दल का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है।

4 of 8
धतूरा और आक के फूल से करें परहेज
– फोटो : adobe stock
धतूरा और आक के फूल से करें परहेज
धतूरा और आक यानी मदार के फूल भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख फूलों में शामिल हैं। लेकिन देवी दुर्गा की पूजा में इन फूलों का प्रयोग सामान्य रूप से नहीं किया जाता। नवरात्रि में माता को उनकी पसंद के माने जाने वाले फूल, खासकर लाल गुड़हल और अन्य ताजे पुष्प अर्पित करने की परंपरा अधिक प्रचलित है। इसलिए पूजा की थाली तैयार करते समय धतूरा और आक के फूलों से बचना बेहतर माना जाता है।

5 of 8
कनेर और केतकी के फूल न चढ़ाएं
– फोटो : adobe stock
कनेर और केतकी के फूल न चढ़ाएं
देवी पूजा में फूलों का विशेष महत्व होता है, लेकिन हर फूल हर देवी-देवता को अर्पित नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कनेर और केतकी के फूल मां दुर्गा की पूजा में अर्पित करने से बचना चाहिए। माता की पूजा के लिए हमेशा ताजे, स्वच्छ और सुगंधित फूलों का इस्तेमाल करना चाहिए। लाल गुड़हल को देवी दुर्गा की पूजा में विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
Source link
#शरदय #नवरतर #2026म #दरग #क #भलकर #भ #न #चढए #य #चज #पज #म #रख #इन #बत #क #धयन #Hardiya #Navratri #Offer #Maa #Durga #Important #Rules



