एमसीटीई महू द्वारा तैयार ‘प्रिज्म’ 5 जी व 6 जी के नेटवर्क से ड्रोन की करेगा ट्रैकिंग, नवाचार को मिला देश में पहला स्थान

एमसीटीई महू द्वारा तैयार ‘प्रिज्म’ 5 जी व 6 जी के नेटवर्क से ड्रोन की करेगा ट्रैकिंग, नवाचार को मिला देश में पहला स्थान

आसमान में उड़ने वाले ड्रोन को ट्रैक करने के लिए अब रेडार की जरुरत नहीं होगी। सेल्युलर कंपनियों के 5 जी व 6 जी नेटवर्क का उपयोग करके ड्रोन को ट्रैक किय…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 10:47:47 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 11:00:07 AM (IST)

एमसीटीई महू द्वारा तैयार ‘प्रिज्म’ 5 जी व 6 जी के नेटवर्क से ड्रोन की करेगा ट्रैकिंग, नवाचार को मिला देश में पहला स्थान
प्रिज्म तकनीक तैयार करने वाली महू एमसीटीई की टीम को दिल्ली में मिला प्रमाण पत्र व पुरस्कार। -सौजन्य

HighLights

  1. छह माह तैयार हुए नवाचार को नेशनल 5 जी हैकाथान में देश में मिला पहला स्थान
  2. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महू एमसीटीई की टीम को पुरस्कृत किया
  3. ड्रोन ट्रैकिंग के लिए अभी स्पेशलाइज रेडार पर निर्भरता

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : आसमान में उड़ने वाले ड्रोन को ट्रैक करने के लिए अब रेडार की जरुरत नहीं होगी। सेल्युलर कंपनियों के 5 जी व 6 जी नेटवर्क का उपयोग करके ड्रोन को ट्रैक किया जा सकेगा।

महू स्थित मिलिट्री कालेज आफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) द्वारा नवाचार के तहत तैयार प्रिज्म 5 जी तकनीक से यह संभव होगा। इस तकनीक के इस्तेमाल से भविष्य में कमर्शियल उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन का आसमान में रुट तय किया जा सकेगा और वे आपस में नहीं टकराएंगे।

रिसर्च टीम ने छह माह में इसे तैयार किया है

एमसीटीई महू के तकनीकी दक्ष सैनिकों व रिसर्च टीम ने बीते छह माह में इसे तैयार किया है। इस तकनीक को केंद्रीय दूरसंचार विभाग के इंडिया मोबाइल कांग्रेस के तहत आयोजित नेशनल 5 जी इनोवेशन हैकाथान में देश में पहला स्थान मिला है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महू एमसीटीई की टीम को पुरस्कृत किया

इस राष्ट्रीय हैकाथान में एमसीटीई महू का मुकाबल देश के आईआईटी, आईआईएससी, एनआईआईटी जैसे शीर्ष एक हजार तकनीकी संस्थानों और स्टार्टअप के साथ था। दिल्ली में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महू एमसीटीई की टीम को पुरस्कृत किया। टीम को 2.5 लाख रुपये की राशि व प्रमाण पत्र मिला। इ

ड्रोन ट्रैकिंग के लिए अभी स्पेशलाइज रेडार पर निर्भरता

वर्तमान में किसी भी ड्रोन की ट्रैकिंग के लिए स्पेशलाइज्ड रेडार की जरुरत होती है। कई बार यह रेडार छोटे-छोटे ड्रोन की लोकेशन को आसानी से ट्रैक नहीं कर पाता है। रेडार का उपयोग करने पर खर्च भी ज्यादा आता है।

प्रिज्म -5 जी तकनीक इस तरह हुई तैयार

एमसीटीई महू के 5जी व 6जी सेंटर आफ एक्सीलेंस के सैन्य छात्रों और प्रशिक्षकों की टीम ने ”प्रिज्म-5 जी ‘ तकनीक को इजाद किया है। इसके लिए एक खास तरह का एंटीना डिजाइन किया गया और 5 जी साफ्टवेयर स्टेक में माडिफिकेशन किया गया।

इस बदलाव से सेल्युलयर कंपनियों के 5 जी व 6 जी नेटवर्क से ड्रोने की पहचान सुनिश्चित हो सकेगी।इस तकनीक को ब्रिगेडियर देवेन माखीजा के नेतृत्व में डा. निखिल शर्मा, लेफ्टिनेंट कर्नल नैनिश लोहाकरे, ले. कर्नल र्निझर यादव, नायब सुबेदार बालासुंदरम एम, नायक अनिल कुमार ने तैयार किया है।

सैन्य व पुलिस सुरक्षा के अलावा बिजनेस में होगा उपयोग

यह तकनीक भारत में सैन्य सुरक्षा में इस्तेमाल होगी। इसके अलावा पुलिस भी ड्रोन ट्रैकिंग के लिए इसका उपयोग कर सकेगी। भविष्य में ड्रोन के माध्यम से होम टू होम आकाशीय मार्ग से पार्सल डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें मेडिसिन व अन्य घरेलू उपयोग के प्रोडक्ट ड्रोन के माध्यम से पहुंचाए जाएंगे। इससे आकाश में ड्रोन की संख्या बढ़ने पर ट्रैफिक भी बढ़ेगा। ये ड्रोन आपस में न टकरा जाए इसके लिए आकाश में ड्रोन का पाथ वे तैयार होगा।

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