
जांच के मुताबिक लोन से जुड़े ओवरड्राफ्ट एग्रीमेंट और गारंटी एग्रीमेंट में जीशान अली, उनकी पत्नी नाजनीन अली और मां निकहत शमीम गारंटर बनी थीं। इसी जमीन को बैंक के पास गिरवी रखने के लिए दर्शाया गया। अनुबंध में संपत्ति पर किसी मुकदमे, भार या अन्य दावे के नहीं होने की घोषणा भी की गई। नवंबर 2015 में जमीन का बंधक विलेख पंजीकृत कराया गया। जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। फरवरी 2015 में जीशान अली और नाजनीन अली ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम दर्ज दूसरी जमीन बेचने के लिए जिला न्यायालय से अनुमति ली थी। इससे यह संकेत मिला कि वे नाबालिग की संपत्ति के संबंध में कानूनी अनुमति की आवश्यकता से परिचित थे। इसके बावजूद छह महीने बाद बेटियों के नाम पहले ही की जा चुकी जमीन बैंक में गिरवी रख दी गई।
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