खरगोन में तड़के 4 बजे निकली मां महाकाली की सवारी, नरसिंह-हिरण्यकश्यप के स्वांग से हुआ खप्पर उत्सव का समापन

खरगोन में तड़के 4 बजे निकली मां महाकाली की सवारी, नरसिंह-हिरण्यकश्यप के स्वांग से हुआ खप्पर उत्सव का समापन

मां महाकाली के जयकारों और ढोल-मंजीरों की गूंज के बीच मंगलवार तड़के 4 बजे भावसार मोहल्ले में मां महाकाली की सवारी निकली। भावसार क्षत्रिय समाज की 408 सा…और पढ़ें

Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 11:01:48 AM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 11:01:48 AM (IST)

खरगोन में तड़के 4 बजे निकली मां महाकाली की सवारी, नरसिंह-हिरण्यकश्यप के स्वांग से हुआ खप्पर उत्सव का समापन
महाकाली की सवारी के दौरान कलाकार और बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शक। -नईदुनिया

HighLights

  1. महानवमी पर भावसार मोहल्ले में गूंजे जयकारे
  2. ढोल-मंजीरों की थाप के बीच उमड़े श्रद्धालु
  3. बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे

नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन : मां महाकाली के जयकारों और ढोल-मंजीरों की गूंज के बीच मंगलवार तड़के 4 बजे भावसार मोहल्ले में मां महाकाली की सवारी निकली। भावसार क्षत्रिय समाज की 408 साल पुरानी परंपरा के तहत आयोजित खप्पर उत्सव में महानवमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे।

पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और देवी आराधना के बीच निकली सवारी के बाद भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के प्रसंग पर आधारित स्वांग की प्रस्तुति के साथ दो दिवसीय उत्सव का समापन हुआ। नरसिंह अवतार द्वारा हिरण्यकश्यप के वध का प्रसंग बुराई पर अच्छाई की विजय और धर्म की स्थापना का संदेश दे गया।

तड़के निकली मां महाकाली की सवारी, दर्शन के लिए जुटे श्रद्धालु

महानवमी पर भावसार मांगलिक भवन प्रांगण और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक माहौल रहा। तड़के 4 बजे मां महाकाली की सवारी निकली तो माता के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा। वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार आयोजित इस धार्मिक आयोजन में समाजजन और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। मां महाकाली के स्वरूप में अमित जगदीश भावसार ने प्रस्तुति दी। पारंपरिक गरबियों, ढोल-मंजीरों की थाप और देवी आराधना के बीच श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।

भावसार क्षत्रिय समाज में खप्पर उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। नवरात्रि के दौरान पारंपरिक वेशभूषा, देवी स्वरूपों की प्रस्तुतियां और विशिष्ट धार्मिक परंपराएं इस आयोजन को अलग पहचान देती हैं। समाज की नई पीढ़ी भी इसमें भागीदारी कर विरासत को आगे बढ़ा रही है।

नरसिंह-हिरण्यकश्यप के स्वांग के साथ उत्सव का समापन

खप्पर उत्सव के समापन अवसर पर भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के प्रसंग का स्वांग प्रस्तुत किया गया। इसमें अभिषेक भावसार लाल ने भगवान नरसिंह और उदित संतोष भावसार ने हिरण्यकश्यप की भूमिका निभाई। भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार और हिरण्यकश्यप के वध के प्रसंग को पारंपरिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है तथा अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।

408 साल से चली आ रही खप्पर उत्सव की परंपरा में मां महाकाली की सवारी और नरसिंह-हिरण्यकश्यप का स्वांग धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति को भी जीवंत बनाए रखते हैं। समाजजन हर साल नवरात्रि में इस परंपरा का निर्वहन करते हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।

समाजजन रहे मौजूद

आयोजन में भावसार क्षत्रिय समाज खरगोन के अध्यक्ष सुनील भावसार, जगदीश भावसार, राम भावसार, ऐश्वर्य कान्हा भावसार, भावसार क्षत्रिय संचालक मंडल के डॉ. गौरव भावसार, शैलू भावसार, रवि भावसार, डॉ. प्रीत भावसार सहित समाजजन मौजूद रहे।

Source link
#खरगन #म #तडक #बज #नकल #म #महकल #क #सवर #नरसहहरणयकशयप #क #सवग #स #हआ #खपपर #उतसव #क #समपन

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *