विधायक संजय पाठक के केस से अलग हुए जस्टिस मिश्रा:  आदेश में लिखा- मामला ऐसी न्यायपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वे सदस्य न हों – Jabalpur News

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विधायक संजय पाठक के केस से अलग हुए जस्टिस मिश्रा:  आदेश में लिखा- मामला ऐसी न्यायपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वे सदस्य न हों – Jabalpur News


भाजपा विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक से जुड़े एक मामले में शुक्रवार को एक बार फिर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। समर वेकेशन बेंच में जैसे ही जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट में यह केस आया तो बिना बहस के ही जस्टिस ने अपने आपको अलग कर लिया। यह मामला विधायक संजय पाठक के खिलाफ मानहानि प्रकरण से जुड़ा हुआ है। कटनी निवासी पूर्व आर्म्स डीलर नाजिम खान पर विधायक संजय पाठक ने आरोप लगाए थे कि उसकी दुकान से ना सिर्फ गोलियां गायब है, बल्कि अवैध हथियार की बिक्री करते हैं। भाजपा विधायक के इस बयान पर नाजिम खान ने एक करोड़ रुपए की मानहानि संबंधी याचिका दायर की है। उन्होंने आरोपों को झूठा बताते हुए संजय पाठक पर FIR दर्ज करने की मांग की है। शुक्रवार को यह मामला मामला जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन उन्होंने स्वयं को प्रकरण की सुनवाई से अलग कर लिया। गजस्टिस विशाल मिश्रा ने आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रकरण को अगले सप्ताह ऐसी न्यायपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वे सदस्य न हों। पहले भी खुद को अलग कर चुके हैं जस्टिस मिश्रा इससे पहले पाठक के खिलाफ अवैध उत्खनन से जुड़े एक अन्य मामले में भी जस्टिस मिश्रा ने खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने 1 सितंबर 2025 को आदेश पत्र में लिखा था कि विधायक पाठक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी। इसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने न्यायपालिका की शुचिता के मद्देनजर इस मामले पर विधायक पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज किया था। यह फिलहाल लंबित है। अक्टूबर 2025 में पाठक ने लगाए थे आरोप याचिकाकर्ता नाजिम खान का आरोप है कि विधायक संजय पाठक ने अक्टूबर 2025 में सोशल मीडिया पर दिए गए इंटरव्यू में उनके खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और मानहानिकारक बयान दिए थे। इसके पूर्व नाजिम खान ने विधायक को एक करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भी भेजा था। नोटिस में आरोप लगाया गया कि विधायक ने उनकी दुकान से 14 हजार गोलियां गायब होने, अवैध हथियार बिक्री और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हथियार लाइसेंस बनवाने जैसे आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए। याचिका में कहा है कि कई शिकायतों के बावजूद पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही मामले की जांच की। इसी के चलते हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस को विधायक के खिलाफ अपराध दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
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