भारत में डिजाइन हुई रेडिएशन रोधी ‘बीमफार्मर चिप’ की मदद से गगनयान-2 मिशन के यात्री अंतरिक्ष में बाधा रहित कर पाएंगे संवाद

भारत में डिजाइन हुई रेडिएशन रोधी ‘बीमफार्मर चिप’ की मदद से गगनयान-2 मिशन के यात्री अंतरिक्ष में बाधा रहित कर पाएंगे संवाद

रेडिएशन सेमिकंडक्टर माइक्रो चिप का एक तरह से दुश्मन है। अंतरिक्ष में रेडिएशन के कारण चिप काम नहीं करती, फेल हो जाती, ऐसे में सिस्टम को शटडाउन करना पड़ता है। इसरो ने अब इस मुश्किल का भी तोड़ निकाल लिया है।

Publish Date: Sun, 25 Oct 2026 08:17:30 AM (IST)Updated Date: Sun, 25 Oct 2026 08:17:30 AM (IST)

भारत में डिजाइन हुई रेडिएशन रोधी ‘बीमफार्मर चिप’ की मदद से गगनयान-2 मिशन के यात्री अंतरिक्ष में बाधा रहित कर पाएंगे संवाद
सेमीकंडक्टर समिट में भारत में बनी चिप का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा। -नईदुनिया

HighLights

  1. विश्व में अभी तक किसी ने भी इस तरह की चिप तैयार नहीं की है
  2. दिल्ली की आईयूएसी में रेडिएशन रोधी परीक्षण में पास होने पर चिप का मिशन में होता है इस्तेमाल
  3. सेमीकंडक्टर समिट में आए इसरो अहमदाबाद के विज्ञानी डॉ. हरिशंकर गुप्ता ने दी जानकारी

उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर : रेडिएशन सेमीकंडक्टर माइक्रो चिप का एक तरह से दुश्मन है। अंतरिक्ष में रेडिएशन के कारण चिप काम नहीं करती, फेल हो जाती, ऐसे में सिस्टम को शटडाउन करना पड़ता है। इसरो ने अब इस मुश्किल का भी तोड़ निकाल लिया है।

इसरो ने एस बैंड पर आधारित बीमफार्मर चिप तैयार की है, जो रेडिएशन रोधी है। अगस्त 2027 में प्रस्तावित गगनयान मिशन-2 प्रोजेक्ट में इस चिप का इस्तेमाल किया जाएगा। इस मिशन में भेजे जाने वाले वाले अंतरिक्ष यात्री इस चिप की मदद से अंतरिक्ष में निर्बाध रूप से एक दूसरे से संवाद कर सकेंगे।

विश्व में अभी तक किसी ने भी इस तरह की चिप तैयार नहीं की है

इसके अलावा इसरो ने भविष्य में लीक न होने वाले सुरक्षित कम्युनिकेशन के लिए भेजे जाने वाले ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सेटेलाइट में रेडिएशन रोधी ‘लेजर ड्राइवर चिप‘ के इस्तेमाल की योजना बनाई है। विश्व में अभी तक किसी ने भी इस तरह की चिप तैयार नहीं की। यह चिप अंतरिक्ष के रेडिएशन में भी काम करेगी। यह जानकारी इंदौर में आयोजित एमपी सेमीकंडक्टर समिट में शामिल होने आए इसरो अहमदाबाद के विज्ञानी डॉ. हरिशंकर गुप्ता ने नईदुनिया से विशेष चर्चा में बताई।

दिल्ली की आईयूएसी में रेडिएशन रोधी परीक्षण में पास होने पर चिप का मिशन में होता है इस्तेमाल

डॉ. गुप्ता ने बताया कि चिप को पहले डिजाइन की जाता है और उसके बाद फैब्रिकेशन के माध्यम से यह तैयार होती है, चंडीगढ़ के मोहाली में चिप फैब्रिकेशन की सीमित सुविधा है। इसके अलावा धुलेरा में टाटा और नोएडा में चिप फैब्रिकेशन यूनिट का निर्माण हो रहा है।

अभी भारत की ज्यादातर चिप इजराइल, यूएस, ताइवान में बनती हैं। वहां चिप तैयार होने के बाद भारत में चिप का इलेक्ट्रिकल, तापमान व 20 साल तक चलने की क्षमता के लिए विश्वसनीयता जांच की जाती है। दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी परिसर में बने इंटर यूनिवर्सिटी एक्सीलरेट सेंटर (आईयूएसी ) की लैब में चिप का रेडिएशन टेस्ट होता है। जब चिप उस रेडिएशन में सफल होती है, उसके बाद ही उसका अंतरिक्ष मिशन में उपयोग किया जाता है। अंतरिक्ष मिशन में उपयोग की जाने वाले वाली चिप की जांच में ही तीन साल का समय लगता है।

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