जलसंकट के बीच जलूद से इंदौर तक नर्मदा लाइन से रोज बह रहा दो करोड़ लीटर पानी

जलसंकट के बीच जलूद से इंदौर तक नर्मदा लाइन से रोज बह रहा दो करोड़ लीटर पानी

Indore Water Crisis: इंदौर नगर निगम शहरी सीमा में नागरिकों से जल संरक्षण की अपील करता है, लेकिन जिन क्षेत्रों से होकर नर्मदा का पानी इंदौर पहुंचता है, वहां संरक्षण के लिए काम नहीं होता।

Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 08:01:32 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 08:15:13 AM (IST)

जलसंकट के बीच जलूद से इंदौर तक नर्मदा लाइन से रोज बह रहा दो करोड़ लीटर पानी
पाटनीपुरा चौराहे पर गुरुवार शाम को नर्मदा लाइन में लीकेज ठीक करते नियम कर्मचारी। फोटो – नईदुनिया

HighLights

  1. लीकेज पर नियंत्रण बढ़ाएं तो बुझ सकती है सैकड़ों लोगों की प्यास
  2. पाइप से लाखों लीटर पानी बहकर जंगलों और खेतों में चला जाता है
  3. कहीं पाइपलाइन के जोड़ खराब हैं तो कहीं रखरखाव नहीं हो रहा

कुलदीप भावसार, नईदुनिया, इंदौर। अल्पवर्षा के बाद गंभीर जलसंकट के मुहाने पर खड़े इंदौर के लोगों को यह जानकर हैरानी हो सकती है कि जलूद से इंदौर तक पानी लाने और शहर में वितरण के दौरान रोज डेढ़ से दो करोड़ लीटर नर्मदा जल बर्बाद हो रहा है। जलूद से इंदौर के रास्ते में कई जगह पाइपलाइन में लीकेज हैं। इनके कारण लाखों लीटर पानी बहकर जंगलों और खेतों में चला जाता है।

शहर में भी हजारों नल ऐसे हैं, जिनमें टोटियां नहीं लगी हैं। नर्मदा की आपूर्ति शुरू होते ही इनसे पानी बहने लगता है। टैंकरों की खराब हालत भी पानी की बर्बादी की बड़ी वजह है। अनुमान है कि जलूद से इंदौर तक पानी लाने के दौरान 10 से 12 एमएलडी और शहर में वितरण के दौरान पांच से सात एमएलडी पानी रोज बर्बाद होता है।

इस बर्बादी पर नियंत्रण किया जाए तो जलसंकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है। जलूद से रवाना होने वाला नर्मदा जल मानपुर, महूगांव, महू, राऊ सहित कई गांवों से होकर इंदौर पहुंचता है। इस दौरान पाइपलाइन में लीकेज और बिजली लाइन में फाल्ट की समस्या लगभग रोज सामने आती है।

नगर निगम शहरी सीमा में नागरिकों से जल संरक्षण की अपील करता है, लेकिन जिन क्षेत्रों से होकर नर्मदा का पानी इंदौर पहुंचता है, वहां संरक्षण के लिए काम नहीं होता। अनुमान है कि रोज करीब एक करोड़ लीटर पानी इंदौर पहुंचने से पहले ही बह जाता है।

इससे कम से कम 100 बड़ी कॉलोनियों को आसानी से पानी दिया जा सकता है। ओल्ड बीपी टैंक से जुड़ी 1200 एमएम ग्रेविटी पाइपलाइन से भी पानी ओवरफ्लो होकर जंगल में जा रहा है।

शहर में बर्बाद हो रहा लाखों लीटर पानी

जलूद से इंदौर के बीच ही नहीं, शहर में भी रोज लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है। इसकी एक वजह हजारों नलों में टोटियां न होना है। इनमें टोटियां लगाई जाएं तो पानी की बर्बादी आसानी से रोकी जा सकती है।

ये हैं आंकड़े

  • 445 एमएलडी पानी रोजाना जलूद से इंदौर के लिए रवाना होता है।
  • 15-20 एमएलडी पानी बर्बाद हो जाता है।
  • 105 टंकियां रोज नर्मदा जल से भरी जाती हैं।
  • 3801 किमी लंबी वितरण लाइन से पानी घरों तक पहुंचता है।
  • नगर निगम के शहर में 6040 बोरिंग हैं।
  • इनमें से 361 बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं।

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ये हैं पानी की बर्बादी की बड़ी वजह

  • कहीं पाइपलाइन के जोड़ खराब हैं तो कहीं रखरखाव नहीं हो रहा। कई जगह पुरानी पाइपलाइनें हैं। इनके कारण जलूद से इंदौर के बीच जगह-जगह लीकेज होता है। जोड़ खराब होने पर पानी के दबाव से कमजोर हिस्सों और जोड़ से रिसाव बढ़ जाता है।
  • शहर में हजारों नल बिना टोटियों के हैं। जलापूर्ति शुरू होते ही इनसे पानी बर्बाद होने लगता है।
  • कई जगह टंकियों से टैंकर भरे जाते हैं। टैंकर खराब होने पर नर्मदा जल मोहल्लों तक पहुंचने के दौरान बर्बाद होता है।

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बर्बादी रोकने के लिए प्रयास जारी

हम पानी की बर्बादी रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जहां से भी सूचना मिलती है, वहां टीम पहुंचकर सुधार कार्य करती है। हमने जनता से भी पानी बर्बाद न करने की अपील की है। नागरिकों को नलों में टोटियां लगवानी चाहिए, ताकि पानी की बर्बादी न हो। अपील के बावजूद सुधार नहीं होता है तो निगम सख्ती भी करेगा। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर

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