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जब दो साल की उम्र में डॉक्टरों ने बताया कि जिंदगी बचाने के लिए नियमित रूप से खून चढ़ाना पड़ेगा, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही बच्चा एक दिन हजारों लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा। आज भी इंदौर के 29 वर्षीय वैभव सोनी न केवल थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, बल्कि उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण भी बन चुके हैं जिन्हें जीवन के लिए खून की आवश्यकता होती है। विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) के अवसर पर वैभव की कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि सेवा, संकल्प और समाज को जागरूक करने की भी कहानी है। वैभव बताते हैं कि उन्हें दो वर्ष की आयु में थैलेसीमिया होने का पता चला था। तब से लेकर आज तक उनकी जिंदगी नियमित खून चढ़ने पर निर्भर है। वर्तमान में उन्हें हर आठ से दस दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। बचपन में यह अंतराल एक महीने का था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ खून की जरूरत भी बढ़ती गई। दरअसल थैलेसीमिया मरीजों की जिंदगी केवल खून चढ़ाने तक सीमित नहीं होती। इस दौरान लगातार खून चढ़ने के कारण शरीर में आयरन की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती है, जिससे हार्ट, लिवर और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए वैभव को नियमित इंजेक्शन और दवाइयां लेनी पड़ती हैं। उनका मासिक उपचार खर्च करीब 20 से 25 हजार रुपए तक पहुंच जाता है। खास बात यह कि वे खुद ही यह सब कर लेते हैं। यानी पावडर रूपी दवाई को लिक्विड साल्युशन में मिलाकर उसे बोतल में इंजेक्ट करते हैं। वैभव को अब तक 400 से ज्यादा यूनिट ब्लड लग चुका है। लोगों का गम देखा तो अपना गम भूल गए इन सारी कठिनाइयों के बावजूद वैभव ने कभी अपनी बीमारी को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की और आज थैलेसीमिया मरीजों की मदद को अपना मिशन बना लिया है। वे बताते हैं कि बचपन में उन्होंने अपने माता-पिता को रक्त की व्यवस्था के लिए संघर्ष करते देखा। वहीं से उनके मन में यह भावना आई कि जिन मरीजों को रक्त की जरूरत है, उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। यही सोच उन्हें रक्तदान जागरूकता अभियान से जोड़कर ले गई। उनके इस नेक अभियान को माता-पिता राजश्री-दिनेश सोनी, बहन पूर्वा और दादा रघुनंदन सोनी काफी प्रेरित करते हैं। पिछले पांच से सात वर्षों से वैभव लगातार ब्लड डोनेशन कैंप के आयोजन और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। वे ‘मानवता की पहचान’ संस्था के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हाल ही में खजराना गणेश मंदिर परिसर में आयोजित दो दिनी महारक्तदान शिविर में उनकी टीम ने 821 यूनिट रक्त संग्रहित किया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड’ और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ का हिस्सा बने थे संस्था अब तक सवा कैंप संचालित कर चुकी है 40 हजार यूनिट ब्लड एकत्रित कर चुकी है। संस्था द्वारा 2022 में एक ही स्थान गांधी हॉल में 12 घंटे में 951 यूनिट ब्लड एकत्र किया था। यह ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड’ बना था। पिछले साल संस्था ने एक ही दिन में सबसे ज्यादा ब्लड डोनेशन कैंप लगाए थे। यह ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ बना था। वैभव इन दोनों में टीम का हिस्सा थे। वैभव को सोशल सर्विस के लिए थेलेसीमिया चाइल्ड एंड वेलफेयर सोसायटी “रियल लाइफ हीरो’ का अवार्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा अन्य सम्मान भी मिल चुके हैं। मैं खुद खून डोनेट नहीं कर सकता, दूसरों को करता हूं जागरूक वैभव कहते हैं, विज्ञान ने बहुत प्रगति कर ली है, लेकिन आज भी खून किसी फैक्ट्री में नहीं बनता। एक इंसान ही दूसरे इंसान को खून दे सकता है। मैं खुद खून डोनेट नहीं कर सकता, लेकिन लोगों को इसके लिए जागरूक जरूर कर सकता हूं। ऐसे मिलती है तीन लोगों को जिंदगानी उनका मानना है कि एक यूनिट खून तीन लोगों की जान बचा सकता है। ब्लड बैंक में खून को अलग-अलग रूपों आरबीसी, प्लेटलेट्स और अन्य तत्वों में विभाजित कर जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है। ‘विश्व रक्त दान दिवस’ पर युवाओं से अपील करते हुए वैभव कहते हैं कि यदि आप स्वस्थ हैं और रक्तदान के लिए पात्र हैं तो नियमित रक्तदान जरूर करें। इससे न केवल जरूरतमंदों की जिंदगी बचती है, बल्कि रक्तदाता को भी स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ मिलते हैं। शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच कराना बेहद जरूरी वैभव थैलेसीमिया के नियंत्रण पर वे विशेष जोर देते हैं। उनका कहना है कि विवाह से पहले थैलेसीमिया की जांच कराना बेहद जरूरी है। जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। खुद हर आठ-दस दिन में खून के सहारे जिंदगी जीने वाला वैभव आज सैकड़ों थैलेसीमिया मरीजों के लिए उम्मीद, हौंसले और मानवता की मिसाल है। एक बच्ची की जरूरत से शुरू हुआ अभियान विश्व रक्त दान दिवस के अवसर पर अद्भुत कम्युनिटी (NGO) ने सभी रक्तदाताओं को नमन करते हुए रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताया। वर्ष 2009 से संस्था जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराने और रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। संस्था के युवा और महिला स्वयंसेवक नियमित रक्तदान, प्लेटलेट्स डोनेशन तथा आवश्यकता पड़ने पर WBC दान जैसी सेवाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। अद्भुत कम्युनिटी की शुरुआत उस समय हुई थी जब एक बस्ती में एक बच्ची को तत्काल रक्त की जरूरत थी और रक्तदाता उपलब्ध नहीं था। उसी घटना से प्रेरित होकर यह अभियान शुरू हुआ। आज संस्था की सेवाएं मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक पहुंच चुकी हैं। संस्था के संस्थापक सिद्धार्थ शर्मा 120 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। विश्व रक्तदाता दिवस पर संस्था ने नागरिकों से नियमित स्वैच्छिक रक्तदान कर जीवन बचाने की इस मुहिम से जुड़ने की अपील की। 278 कैंप के साथ एमजीएम ब्लड सेंटर ने बनाया नया रिकॉर्ड उधर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग स्थित स्टेट ऑफ आर्ट मॉडल ब्लड सेंटर ने वर्ष 2025 में रक्तदान और रक्त सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सेंटर द्वारा इस वर्ष 57,200 ब्लड यूनिट जारी की गईं, जबकि 40,381 यूनिट खून एकत्रित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में 37,276 स्वैच्छिक रक्तदान प्राप्त हुए और 278 रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया, जो पिछले आठ वर्षों में सर्वाधिक है। विभिन्न कैंपों के माध्यम से 21,188 यूनिट रक्त संग्रह हुआ। ब्लड सेंटर ने एडवांस जांच और उपचार सेवाओं में भी वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2025 में 429 कूम्ब्स टेस्ट, 182 आरएच एंटीबॉडी टाइटर जांच, 251 सिंगल डोनर प्लेटलेट (एसडीपी) और 195 थैरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज किए गए। पिछले आठ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि एमजीएम ब्लड सेंटर लगातार अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है और प्रदेश में सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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