इंदौर के गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में मारपीट का मामला:  पुलिस कमिश्नर से की शिकायत, कहा- सोसाइटी सचिव और आरक्षक के नाम FIR से हटाए – Indore News

इंदौर के गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में मारपीट का मामला: पुलिस कमिश्नर से की शिकायत, कहा- सोसाइटी सचिव और आरक्षक के नाम FIR से हटाए – Indore News

इंदौर के गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में मारपीट का मामला:  पुलिस कमिश्नर से की शिकायत, कहा- सोसाइटी सचिव और आरक्षक के नाम FIR से हटाए – Indore News


इंदौर के कनाड़िया इलाके की बिचौली हप्सी स्थित गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में मेंटेनेंस विवाद के दौरान हुए जानलेवा हमले के मामले में पीड़ित पक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि सोसाइटी सचिव और पुलिस आरक्षक नारायण जाट सहित मुख्य आरोपियों के नाम प्रभाव के चलते एफआईआर से हटा दिए गए, जबकि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। इसके विरोध में महिला ने शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। महिला ने निगम आयुक्त को आरोपियों द्वारा सोसाइटी के समीप खाली सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मंदिर निर्माण और निजी उपयोग के आरोप लगाएं हैं। वहीं, पीड़ितों ने रविवार को निगम आयुक्त को भी आवेदन दिया है। जिसमें सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाया है। पहले जान लीजिए क्या है पूरा मामला
8 जून 2026 की रात 9:30 बजे पीड़ित कार्तिक शर्मा सोसाइटी परिसर में टहल रहे थे। तब समिति के लोकेश जाट ने उन्हें सुनाते हुए ब्लॉक बी-12 के रहवासियों को गालियां दीं। विरोध करने पर लोकेश जाट और चंदू जाट अपनी कार से डंडे निकाल लाए और कार्तिक के सिर व शरीर पर जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया। सचिन और उसके दो साथियों ने भी मारपीट की और कार्तिक की सोने की चेन लूट ली। जाते-जाते आरोपियों ने पूरे परिवार को जान से खत्म करने की धमकी दी। वारदात के बाद 9 जून 2026 (रात 02:26 बजे) घायल कार्तिक अपनी मां सुलोचना शर्मा और बहन तनिषा शर्मा के साथ कनाडिया थाने पहुंचा। पुलिस ने (BNS) की धारा 115(2), 296(a), 3(5), और 351(2) में मामला दर्ज किया। लेकिन आरोप है कि प्रभाववश मुख्य आरोपी कनाड़िया थाने में पदस्थ आरक्षक नारायण जाट का नाम FIR से गायब कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने 9 जून 2026 को ही थाना प्रभारी कनाड़िया को लिखित आवेदन देकर FIR में आरक्षक नारायण जाट और उसके भाई चंद्रेश जाट का नाम सह आरोपी के रूप में जोड़ने की गुहार लगाई। 12 जून को पुलिस कमिश्नर और निगम आयुक्त को शिकायत कनाडिया पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर कार्तिक की मां सुलोचना शर्मा ने 12 जून 2026 को इंदौर पुलिस कमिश्नर और नगर पालिक निगम आयुक्त शिकायत पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस कमिश्नर और निगम कमिश्नर को की गई शिकायत में पीड़ित परिवार ने सोसाइटी के वर्तमान पदाधिकारियों दिलीप पंवार (अध्यक्ष), सुंदन सिंह (कोषाध्यक्ष) और नारायण जाट (सचिव) पर कई आरोप लगाए हैं। महिला और उसके परिवार का आरोप है कि सोसाइटी का सचिव नारायण जाट असल में कनाडिया थाने में ही आरक्षक (कांस्टेबल) के पद पर पदस्थ है। वह पिछले एक साल से अपनी शासकीय वर्दी और पद की धौंस दिखाकर सोसाइटी के 216 फ्लैट्स के रहवासियों को डरा-धमका रहा है। शिकायत पत्र के मुताबिक, आरक्षक नारायण जाट खुद अवैध रूप से शराब की पेटियां लेकर आता है और वह और उसका भाई चन्द्रेश जाट दोनों मिलकर सोसाइटी परिसर के भीतर से ही अवैध शराब बेचने का काला कारोबार संचालित करते हैं। निगम की जमीन पर अवैध कब्जा
पीड़िता का आरोप है कि इन पदाधिकारियों ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग करते हुए गुलमर्ग परिसर सोसाइटी से लगी नगर निगम की शासकीय (सरकारी) भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कार्य करवा रहे हैं। विरोध करने पर पानी और कचरा गाड़ी बंद की
जो भी रहवासी इनके वित्तीय गबन, अवैध शराब बिक्री या शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का विरोध करता है, ये लोग तानाशाही दिखाते हुए उनका पानी 3-4 दिनों के लिए बंद कर देते हैं, कचरा गाड़ी रोक देते हैं। आरक्षक ने दुर्भावनापूर्वक पीड़िता की छत पर रखे गमलों को भी नीचे फेंककर तोड़फोड़ की। आरक्षक कहता है कानून मेरी जेब में
शिकायत पत्र में महिला ने बताया कि वारदात के वक्त आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से पूरी सोसाइटी के सामने ललकारते हुए कहा था कि “कानून मेरी जेब में रहता है, हमारा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता।” पुलिस द्वारा अपने ही विभाग के आरक्षक को बचाने के प्रयास से पीड़ित परिवार अत्यंत भय के साये में जीने को मजबूर है और उन्हें अपनी जान का प्रत्यक्ष खतरा है। शिकायती पत्र में ये मांगे
पहले से दर्ज एफआईआर में मुख्य साजिशकर्ता आरक्षक नारायण जाट और उसके भाई चन्द्रेश जाट का नाम तुरंत सह-आरोपी के रूप में जोड़ा जाए। साथ ही पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने वाले आरक्षक नारायण जाट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निष्पक्ष विभागीय जांच की जाए। पीड़िता ने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है।

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