इंदौर में जनता को नहीं मिल रहा है मौलिक अधिकार वाला ‘फुटपाथ‘

इंदौर में जनता को नहीं मिल रहा है मौलिक अधिकार वाला ‘फुटपाथ‘

ट्रैफिक पुलिस व नगरीय निकाय के अफसरों की जिम्मेदारी है कि वो इन फुटपाथ होने वाले कब्जों व अवैध पार्किंग को रोके। हकीकत यह है कि इन दोनों विभागों के अफ …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 02:20:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 02:20:38 PM (IST)

इंदौर में जनता को नहीं मिल रहा है मौलिक अधिकार वाला ‘फुटपाथ‘
फुटपाथ पर है कब्जा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने सड़क किनारे फुटपाथ को जनता को माौलिक अधिकार के रुप में मान्यता दी है
  2. इससे स्पष्ट है जिस तरह सड़क पर पैदल चलने वाले का पहला अधिकार है
  3. ऐसे में सड़कों पर फुटपाथ अनिवार्य रुप से बनाए जाना चाहिए

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क किनारे फुटपाथ को जनता को माौलिक अधिकार के रुप में मान्यता दी है। इससे स्पष्ट है जिस तरह सड़क पर पैदल चलने वाले का पहला अधिकार है। ऐसे में सड़कों पर फुटपाथ अनिवार्य रुप से बनाए जाना चाहिए।

हकीकत यह है कि इंदौर सहित मालवा- निमाड़ अंचल के अधिकांश शहरों में की कई सड़कों से फुटपाथ नदारद है और जहां पर फुटपाथ बने हुए है उन पर अनाधिकृत रुप से वाहनों की पार्किंग हो रही है और दुकाने सज रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस फुटपाथ को जनता को मौलिक अधिकार के रुप के मान्य किया, वो तो जनता को चलने के लिए ही नहीं मिल रहा है।

ट्रैफिक पुलिस व नगरीय निकाय के अफसरों की जिम्मेदारी है कि वो इन फुटपाथ होने वाले कब्जों व अवैध पार्किंग को रोके। हकीकत यह है कि इन दोनों विभागों के अफसर पिछले 20 वर्षो में फुटपाथों को लोगों व वाहनों के कब्जे से आजाद करने में नाकाम रहे है। नईदुनिया द्वारा इंदौर, उज्जैन सहित मालवा निमाड़ के सभी प्रमुख शहरों में ‘यह फुटपाथ हमारा है‘ समाचारीय अभियान की श्रृंखला शुरु की जाएगी। नईदुनिया जनता के फुटपाथ के अधिकार के लिए आवाज उठाएगा और जिम्मेदारों से पूछेगा कि जनता की राह का राेड़ा हटाने के लिए उन्होंने अब तक क्या किया और आगे वे क्या करेंगे।

इस तरह अतिक्रमण हो सकती है सड़कें

इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों में फुटपाथ पर कब्जा व अतिक्रमण करने वालों पर कोई नियंत्रण नहीं है। इस वजह से हमेश पैदल चलने के लिए लोगों को फुटपाथ नहीं मिलते। ऐसे में लोग सड़कों पर चलते है। कई बार सड़क पर चलने वाले लोग दुर्घटना का शिकार भी होते है। पहले तो रोड निर्माण के नियमों के तहत निर्माण एजेंसी व संबंधित अथारिटी को फुटपाथ नियमानुसार बनवाया चाहिए। फुटपाथ पर यदि कोई कब्जा या वाहन पार्किंग करे तो उसके लिए कड़े आर्थिक दंड का प्रविधान होना चाहिए। यदि फुटपाथ पर खड़े होने वाले वाहन व दुकानों के सामन को जप्त ही कर लिया जाए तो लोगों में डर रहेगा और फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त हो सकेंगे। -डा. संदीप नारुलकर, प्रोफेसर सिविल इंजीनियर, एसजीएसआईटीएस

नियमित हो फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई

फुटपाथ चलने के लिए बनाए जाते है। लोग इस पर चलते भी है। दुकानदार अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए अपना सामान रखते और गाड़ी खड़ी करते है। जहां व्यस्त बाजार नहीं है। वहां पर फुटपाथ पर ही खड़े होते है। जब तक व्यक्ति अपना कर्तव्य नहीं समझेगा तब तक फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त करना अासान नहीं होगा। ट्रैफिक पुलिस फुटपाथ पर खड़े वाहनों पर तो कार्रवाई करती है लेकिन सड़क पर दुकान व सामान रख अतिक्रमण करने वालों पर नगर निगम को सतत कार्रवाई करना होगी। सिर्फ साल के कुछ दिन कार्रवाई करने के बजाए फुटपाथ अतिक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया को नियमित किया जाए। – अरविंद तिवारी, रिटायर एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक

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