ईरान-अमेरिका डील के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट का नियंत्रण किसके पास?

ईरान-अमेरिका डील के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट का नियंत्रण किसके पास?

होर्मुज़ स्ट्रेट

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट के एक बड़े हिस्से पर ईरान अपना दावा करता है (फ़ाइल फ़ोटो)

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 6 मिनट

अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में संघर्ष ख़त्म करने के लिए एक समझौते पर सहमति बनी है.

साथ ही दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों के अंदर-अंदर स्थाई समझौता लागू करने के लिए बातचीत जारी है.

ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद से ही ये जलमार्ग प्रभावित हुआ है. दुनिया का लगभग 20% तेल आमतौर पर इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है.

होर्मुज़ से सप्लाई प्रभावित होने की वजह से दुनियाभर में तेल और गैस के दामों में बढ़ोतरी हुई है. जंग के दौरान देखा गया जब ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे से जुड़े जहाज़ों पर हमले भी किए या फिर दोनों ने नाकेबंदी की.

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर जिन 14 बिंदुओं पर सहमति बनी है, उनमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य या होर्मुज़ स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल है.

दोनों देशों के बीच जिस मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टेंडिंग समझौते की बात कही जा रही है, उसका चौथा और पांचवां बिंदु होर्मुज़ स्ट्रेट से ही जुड़ा है.

चौथे बिंदु के मुताबिक़, अमेरिका “अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शुरू कर देगा… और 30 दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह ख़त्म कर देगा.”

पांचवें बिंदु के मुताबिक़, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान “60 दिनों तक बिना किसी चार्ज के कमर्शियल जहाज़ों के सुरक्षित आने-जाने को लेकर अपनी पूरी कोशिश करेगा.”

होर्मुज़ स्ट्रेट

होर्मुज़ स्ट्रेट क्या है?

होर्मुज़ स्ट्रेट एक जलडमरूमध्य है जो ओमान की खाड़ी और फ़ारस की खाड़ी को आपस में जोड़ता है.

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक़, देश अपनी तटरेखा से समुद्री सीमा में 12 नॉटिकल मील (13.8 मील) तक नियंत्रण का अधिकार रखते हैं.

अपने सबसे संकरे हिस्से में, होर्मुज़ स्ट्रेट और उसकी शिपिंग लेन पूरी तरह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जलसीमा के भीतर आते हैं. इस वजह से भी ये दोनों देश इस पर अपना दावा करते हैं.

ईरान की सेना इस इलाक़े में भारी दबदबा रखती है और सबसे संकरे समुद्री मार्ग ईरान के जलक्षेत्र में आते हैं, जिससे ईरान अक्सर अपनी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाकर जहाज़ों को नियंत्रित करता है.

इस वजह से भी ये माना जा रहा था कि इस जंग के दौरान ईरान इस इलाक़े से गुज़रने वाले जहाज़ों से टोल वसूल रहा था. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे इनकार किया था.

ईरान और ओमान के इलाक़े के पानी से होकर जाने वाले एक प्राकृतिक जलमार्ग के तौर पर जहाज़ पहले से ही बिना पेमेंट के होर्मुज़ स्ट्रेट से आज़ादी से गुज़रते रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का मानना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के गुज़रना प्रथागत अंतरराष्ट्रीय क़ानून का हिस्सा है.

पनामा और स्वेज़ जैसी कुछ इंसानों की बनाई नहरें कुछ ख़ास सर्विस के लिए टोल और फ़ीस लेती हैं.

इस जंग के दौरान ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता दिखाने की कोशिश की है, जिसमें “पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी” बनाना भी शामिल है, जिसके बारे में उसने कहा था कि वह “सुरक्षित रूप से जाने के परमिट” को मैनेज करेगी.

होर्मुज़ स्ट्रेट

ईरान ने जब होर्मुज़ पर किया अपना दावा

बीते महीने ईरान ने दावा किया था कि वो होर्मुज़ स्ट्रेट के आस-पास के इलाक़े को काफ़ी बढ़ा रहा है, जिस पर उसका मिलिट्री कंट्रोल है, ताकि वो इस ख़ास ट्रेड रूट पर अपनी संप्रभुता को साबित कर सके.

ईरान की नई बनी “पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी” के पब्लिश किए गए एक मैप में 22,000 स्क्वायर किलोमीटर से ज़्यादा इलाके में “ईरानी आर्म्ड फोर्सेज़ की निगरानी” का दावा किया गया.

यह ओमान और यूएई के जलक्षेत्र तक फैला हुआ था. यूएई ने ईरान के कंट्रोल के दावों को “सपनों के टुकड़ों के अलावा कुछ नहीं” बताया था.

ईरान की नई अथॉरिटी ने यह भी कहा था कि स्ट्रेट से होकर जाने वाले सभी ट्रांज़िट के लिए “पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी के साथ कोऑर्डिनेशन और ऑथराइज़ेशन की ज़रूरत होती है.”

अमेरिका और खाड़ी के उसके साथी देश स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोशिशों को बार-बार ख़ारिज करते रहे हैं. अमेरिका ने जहाज़ों से कहा था कि वे ईरान के नियमों का पालन न करें.

यूएई के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गारगाश ने कहा था कि ईरान “एक साफ़ मिलिट्री हार से पैदा हुई एक नई सचाई को पवित्र करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट को कंट्रोल करने या यूएई की समुद्री संप्रभुता पर क़ब्ज़ा करने की कोशिशें सपनों के टुकड़ों के अलावा कुछ नहीं हैं.”

होर्मुज़ स्ट्रेट

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी का कहना है अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को ईरान ओमान के साथ कोऑर्डिनेशन में मैनेज करेगा

समझौते के बाद अब किसका कंट्रोल

अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी देश स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोशिशों को बार-बार ख़ारिज करते रहे हैं.

रविवार को ईरान के साथ समझौते की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि स्ट्रेट “टोल फ्री” होगा.

ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया था कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को आख़िरकार ईरान ओमान के साथ कोऑर्डिनेशन में मैनेज करेगा, जिसमें पानी के रास्ते से गुज़रने वाले जहाज़ों के लिए संभावित “सर्विस फ़ीस” भी शामिल है.

हालांकि यह साफ़ नहीं है कि ऐसी फ़ीस किस तरह की सर्विस के लिए देनी होगी.

ट्रेड एनालिटिक्स फ़र्म केप्लर में सीनियर ऑयल एनालिस्ट नवीन दास बीबीसी से कहते हैं कि स्ट्रेट का इस्तेमाल करने के लिए कोई भी नया पेमेंट सिस्टम “काम में एक और अड़चन डालेगा” क्योंकि इस स्ट्रेट से हर दिन न जाने कितने जहाज़ गुज़र सकते हैं, जिस वजह से इस पर “लॉजिस्टिकल लिमिट या रोक” लग सकती है.

नवीन दास ने आगे कहा कि कई सवाल अब भी बरक़रार हैं जैसे, “इसे कौन लागू कर रहा है? इसे कैसे लागू किया जाएगा? फ़ीस कैसे इकट्ठा की जाएगी? दूसरे खाड़ी देश इस बारे में क्या सोचते हैं?”

ईरान और अमेरिका के बीच एक स्थाई समझौते पर सहमति के लिए बातचीत के दौरान इनमें से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मुश्किल है कि तेहरान जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से उतनी आसानी से गुज़रने देगा जितनी वह लड़ाई शुरू होने से पहले देता था.

केप्लर के दिमित्रिस एम्पाटज़िडिस कहते हैं, “ख़ास बात यह है कि राजनीतिक या सुरक्षा के नज़रिए से स्ट्रेट जल्दी खुल सकता है, लेकिन कमर्शियल शिपिंग सिस्टम धीरे-धीरे नॉर्मल होने की संभावना है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

Source link
#ईरनअमरक #डल #क #बद #हरमज #सटरट #क #नयतरण #कसक #पस

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *