
घने और चमकदार बालों का राज़ आपके बालों की बनावट से लेकर कंघी के डिज़ाइन तक हर चीज़ में छिपा है.
जब से मैं इतनी बड़ी हुई कि अपने बालों का स्टाइल खुद तय कर सकूँ, तब से मेरे बाल पीठ के निचले हिस्से तक सीधे रहते आए हैं. बचपन में मैं दिन में कई बार इन्हें संवारती थी.
मैं कंघी करते वक़्त ऑस्ट्रिया की महारानी सिसी के बारे में सोचती रहती. उनके सीधे भूरे बाल मेरे जैसे थे, लेकिन टखनों तक लंबे थे. कहा जाता है कि वह हर रात 100 बार कंघी करती थीं. बड़े होकर मुझे पता चला कि रानी सिसी की कहानी शायद मनगढ़ंत है. यह जानकर मैं काफ़ी निराश हुई.
अब जब मैं बड़ी हो गई हूँ, तो सिर्फ़ नहाते समय ही अच्छे से बाल सँवारती हूँ.
बालों को कितनी बार सँवारना चाहिए, इसके पीछे का विज्ञान काफ़ी उलझा हुआ है.
वैज्ञानिकों से लेकर हेयरड्रेसर तक, सब इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इसका जवाब आपके बालों की बनावट, कंघी और दिनचर्या जैसी कई चीज़ों पर निर्भर करता है.
इसलिए आगे पढ़िए और जानिए कि बालों को सही तरह से सँवारना कैसे है.
कंघी की कहानी
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कंघी और हेयरब्रश से बाल सँवारने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है.
‘द हेयर हिस्टोरियन’ की संस्थापक रेचल गिब्सन कहती हैं, “मनुष्य हमेशा अपने पास मौजूद चीज़ों से सफ़ाई और सजावट के औज़ार बनाता रहा है, इसलिए बाल सँवारना दुनिया भर में अहम रहा है.”
लेकिन बार-बार कंघी करना कभी-कभी नुकसान और बाल झड़ने का कारण भी बन सकता है. सौ बार कंघी करने का विचार शायद मध्यकालीन ब्रिटेन से आया.
उस दौरान महिलाओं के बाल बहुत लंबे होते थे. गिब्सन कहती हैं कि उस दौर में बालों को स्त्रियों के औरत होने का अहम हिस्सा माना जाता था.
सँवारने की दिनचर्या में आमतौर पर पहले कंघी से बालों को सुलझाना, गंदगी और जूंएं निकालना शामिल होता था. इसके बाद सूअर के बालों से बने हेयरब्रश से बालों को चिकना और मुलायम किया जाता था.
गिब्सन बताती हैं कि उस दौर की अमीर महिलाएं अपने कपड़ों को बिखरे बालों से बचाने के लिए ख़ास चोग़े पहनती थीं.
साल 1898 में अमेरिका के ओहायो राज्य की अफ़्रीकी-अमेरिकी हेयरड्रेसर लाइडा न्यूमैन ने पहली बार सिंथेटिक ब्रिसल वाला हेयरब्रश बनाया.
इसके बाद हेयरब्रश सस्ते और आसानी से बनने लगे. नतीजतन, बाल सँवारना आम हो गया, लेकिन इसके साथ ही कई तरह की ग़लत जानकारियाँ भी फैलने लगीं.
बालों का उलझन…
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माना जाता है कि बार-बार बालों में कंघी करने से उनकी बढ़ने की रफ़्तार तेज़ हो जाती है. साल 2025 में हुए एक सर्वे में पाया गया कि अब भी 46% से ज़्यादा लोग इस बात पर यक़ीन करते हैं. लेकिन कैलिफ़ोर्निया की हेयर सैलून मालिक निक्की कॉर्ज़ाइन कहती हैं कि यह एक मिथक है.
कॉर्ज़ाइन कहती हैं, “आप बालों को ज़्यादा कंघी करके उन्हें तेज़ी से बढ़ा नहीं सकते.”
जिन वैज्ञानिकों ने बाल सँवारने से होने वाले नुकसान को परखने के लिए सटीक फ़ॉर्मूले बनाए हैं, उनका कहना है कि ज़्यादा कंघी करना नुकसान और बाल झड़ने का कारण भी बन सकता है.
एक रिसर्च टीम ने दो बालों को आपस में उलझाया और फिर उन्हें कंघी के सहारे सुलझाने के लिए खींचा. ज़्यादा कंघी करने से बाल भीतर से टूटने लगे. स्वस्थ बाल बेहतर टिके, लेकिन बार-बार दबाव पड़ने से उनमें भी दरारें बाहर से भीतर की ओर बनने लगीं.
इस शोध के लेखक डेविड टेलर, आयरलैंड के ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में इंजीनियरिंग प्रोफ़ेसर हैं.
वह कहते हैं, “सच तो यह है कि जितना ज़्यादा हम कंघी करते हैं, नुकसान की आशंका उतनी ही बढ़ती है. लेकिन असल में यह कंघी के स्ट्रोक्स की संख्या से कम और कंघी करते समय लगाए गए बल से ज़्यादा जुड़ा है.”
हेयर रिसर्च संगठन टीआरआई प्रिंसटन के ट्रिफ़र इवांस ने बाल टूटने के बारे में किए गए विश्लेषणों में दिखाया कि बार-बार बाल सँवारने से उनमें धीरे-धीरे होने वाला नुकसान जमा होता जाता है.
उनके मुताबिक, ज़्यादातर लोगों के लिए कंघी से होने वाला असर न के बराबर है. इवांस कहते हैं कि कंघी और ब्रशिंग से होने वाला नुकसान “अधिकतर लोगों के लिए मायने ही नहीं रखता और यह तो बस नुकसान के समंदर में कुछ बूँदों के बराबर है.”
कंघी करने के अनजाने फ़ायदे
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हेयर सैलून चलाने वाली कॉर्ज़ाइन कहती हैं, “नरम और सोच-समझकर की गई कंघी दुश्मन नहीं होती. दिक्कत कंघी करने में नहीं, बल्कि इस बात में है कि आप कैसे कंघी करते हैं.”
नियमित रूप से बाल सँवारना गाँठें बनने और चिपकाव बनने से रोकता है.
जैरेड रेनॉल्ड्स, बायोकेमिस्ट हैं जिन्होंने एक हेयरकेयर ब्रांड शुरू किया है. उनका कहना है, “अगर आप रोज़ाना एक या दो बार बाल सँवारते हैं, तो नुकसान कहीं कम होता है, लेकिन अगर आप हफ़्ते भर इंतज़ार करें और फिर ज़ोर से कंघी करें, तो नुकसान कहीं ज़्यादा होगा.”
हालाँकि, वह इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि लैब में बालों की जाँच की तुलना असल ज़िंदगी से नहीं की जा सकती.
नियमित कंघी से झड़े हुए बाल और सिर पर जमा गंदगी भी निकल जाती है.
बाल सँवारने का तरीका
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लेकिन सबसे अच्छा तरीका आपके बालों की बनावट पर निर्भर करता है.
मियामी (अमेरिका) में एक हेयर सैलून की मालिक निकोला लिंच कहती हैं, “जिन लोगों के बाल सीधे या लहरदार हैं, उन्हें हफ़्ते में कम से कम तीन बार कंघी करनी चाहिए. चाहें तो दिन में दो बार भी.”
लिंच कहती हैं कि जिनके बाल सीधे हैं, उन्हें गीले बालों में कंघी करने से बचना चाहिए. गीले बाल मज़बूत और मोटे लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे कमज़ोर होते हैं.
जिन लोगों के बाल घुँघराले होते हैं, उनके लिए सलाह बिल्कुल उलट है. उन्हें कभी सूखे बालों में कंघी नहीं करनी चाहिए.
अमेरिका के जॉर्जिया में स्थित स्पेलमैन कॉलेज की प्रोफ़ेसर मिशेल गेंस कहती हैं, “घुँघराले बाल, लहरदार बालों से बिल्कुल अलग होते हैं. इन्हें लंबे समय तक शोधकर्ताओं ने नज़रअंदाज़ किया है.”
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गेंस के शुरुआती प्रयोग यह भी बताते हैं कि घुँघराले बालों की परतें छोटी होती हैं, आपस में ज़्यादा चिपकी होती हैं. इनके किनारे खुरदरे होते हैं. इसका मतलब है कि वे नमी को उतनी अच्छी तरह नहीं रोक पाते और आसानी से उलझकर टूट सकते हैं.
मिशेल गेंस कहती हैं कि सोशल स्टाइलिंग ट्रेंड्स भी अक्सर बालों से ज़्यादा छेड़छाड़ का दबाव बनाते हैं. इसलिए वह सलाह देती हैं कि बालों की सुरक्षा के लिए उन्हें सुलझाने वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि कंघी और ब्रश आसानी से बालों में फिसल सकें.
सबसे अहम है सही तरह के ब्रश का इस्तेमाल.
लिंच कहती हैं, “अगर आपके बाल घुँघराले हैं और आप उन्हें गीले में ब्रश करना चाहते हैं, तो नरम और लचीले बालों वाला ब्रश इस्तेमाल करें.”
सूखे बालों के लिए नरम ब्रिसल वाला स्कैल्प-फ्रेंडली ब्रश इस्तेमाल करें, जो तेल को नीचे तक फैलाता है.
रेनॉल्ड्स तो एक नया हाइब्रिड ब्रश भी बना रहे हैं, जिसमें लंबे प्लास्टिक पिन और छोटे ब्रिसल्स दोनों होंगे, ताकि दोनों चीज़ों का फ़ायदा मिले. लंबे पिन बालों को अलग करेंगे और छोटे ब्रिसल्स उन्हें चिकना करते हुए तेल को फैलाएँगे.
रेनॉल्ड्स कहते हैं, “यही सबसे बेहतरीन कॉम्बिनेशन है.”
इतिहास में ब्रश और कंघियाँ हर रूप और आकार में बनी हैं. प्राचीन मिस्र की कब्रों में हाथीदाँत की कंघियाँ और टेढ़ी टहनियों से बनी कंघियाँ मिली हैं.
और भविष्य में, बालों की बेहतर समझ होने के साथ, हम शायद अपने बालों की हिफ़ाज़त के बिल्कुल नए तरीक़े खोज लें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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