केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में वार्ड-39 के बोरिंग सैंपल के साथ नर्मदा जल सप्लाय लाइन के सैंपल में भी खतरनाक फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला है। रिप…और पढ़ें

HighLights
- खजराना क्षेत्र में अमृत योजना के पहले चरण के तहत नई पेयजल लाइन डाली गई है, इसी से जल सप्लाय हो रहा है
- पुरानी लाइनें बंद की जानी थीं, जांच में पता चला कि पुरानी लाइनों से भी पानी जा रहा है
- अब जांच होगी कि प्रदूषित जल के सैंपल आखिर किस लाइन से लिए गए थे और प्रदूषण का स्रोत क्या है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में वार्ड-39 के बोरिंग सैंपल के साथ नर्मदा जल सप्लाय लाइन के सैंपल में भी खतरनाक फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला है। रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम के अफसर मंगलवार को खजराना क्षेत्र में जांच के लिए पहुंचे। क्षेत्र से पांच सैंपल लिए गए थे, इनमें तीन बोरिंग और दो नर्मदा लाइन के थे।
खजराना क्षेत्र में अमृत योजना के पहले चरण के तहत नई पेयजल लाइन डाली गई है। इसी से जल सप्लाय हो रहा है, वहीं पुरानी लाइनें बंद की जानी थीं। मौके पर जांच में पता चला कि पुरानी लाइनों से भी पानी जा रहा है। अब जांच होगी कि प्रदूषित जल के सैंपल आखिर किस लाइन से लिए गए थे और प्रदूषण का स्रोत क्या है। दरअसल, अप्रैल में साईं कृपा कॉलोनी और रेसकोर्स रोड क्षेत्र में निजी बोरिंग से गंदा पानी आने की शिकायत मिली थी। जांच में करीब 400 फीट गहरे बोरिंग के पानी में फीकल बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। इसके बाद निगम ने दोनों जगह के बोरिंग बंद करवा दिए थे।
कई जगह मिला था प्रदूषण
निगम को पांच स्थानों से बोरिंग के पानी में कंटामिनेशन की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद केंद्रीय भूजल बोर्ड की टीम ने भागीरथपुरा, साईं कृपा कॉलोनी, रेसकोर्स रोड, सांघी कॉलोनी और वार्ड-39 से 33 सैंपल लिए। जांच में सभी स्थानों पर पानी में किसी न किसी स्तर पर प्रदूषण मिला।
वार्ड-39 में नर्मदा लाइन के सैंपल में भी बैक्टीरिया
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार खुदाबख्श कॉलोनी, हबीब और शालीमार कॉलोनी में कई जगह पेयजल लाइनें सीवेज के पानी में डूबी मिलीं। कई स्थानों पर पुरानी और क्षतिग्रस्त सीवर लाइन से रिसाव के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया ऐसी स्थिति में पाइप लाइन के जोड़ या दरारों से सीवेज का पानी अंदर खींचने की आशंका रहती है। जांच टीम ने बिलाल मस्जिद, मदरसा नूरी क्षेत्रों में वैकल्पिक पेयजल उपलब्ध कराने, सीवर लाइनों की तत्काल मरम्मत करने और सीवेज के संपर्क में आने वाली पेयजल पाइप लाइन को एचडीपीई पाइप से बदलने की सिफारिश की है।
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