
इस संबंध में जलयंत्रालय एवं ड्रैनेज विभाग के प्रभारी अभिषेक शर्मा ने कहा कि, प्राइवेट कॉलोनियों, मल्टियों, टॉउनशिप और रो-हाउस में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कॉलोनाइजर और बिल्डर को बनाना होता है। साथ ही, 10 साल तक मेंटेनेंस करना होता है। कॉलोनाइजर और बिल्डर एसटीपी बनाकर चले जाते हैं, लेकिन बाद में मेंटेनेंस कोई नहीं करता है, इसलिए निगम ने अपने एसटीपी तक सीवर का पानी पहुंचाने के लिए ड्रैनेज लाइन का जो नेटवर्क बिछाया है, उसमें अब प्राइवेट कॉलोनियों, मल्टियों, टॉउनशिप और रो-हाउस की लाइनों को जोड़ा जाएगा, जिसका चार्ज निगम लेगा।
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