कैंसर के इलाज के क्षेत्र में इंदौर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एमजीएम मेडिकल कालेज में मध्य भारत की पहली नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) लैब …और पढ़ें

HighLights
- कैंसर के इलाज के क्षेत्र में इंदौर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, अब तक महानगरों में पर निर्भर थे मरीज
- जांच के बाद डॉक्टर ऐसी दवा का चयन करेंगे, जो सीधे उसी जीन पर असर करती है
- एमजीएम मेडिकल कालेज में मध्य भारत की पहली नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) लैब शुरू हो गई है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कैंसर के इलाज के क्षेत्र में इंदौर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एमजीएम मेडिकल कालेज में मध्य भारत की पहली नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) लैब शुरू हो गई है। अत्याधुनिक तकनीक के शुरू होने से अब कैंसर मरीजों को जांच और टारगेट थेरेपी के लिए मुंबई, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुविधा मरीजों को समय पर सटीक इलाज उपलब्ध कराने के साथ-साथ कैंसर के दोबारा होने की संभावना को भी काफी हद तक कम करने में मदद करेगी। एमजीएम मेडिकल कालेज में फिलहाल दो तरह के कैंसर की उन्नत जांच शुरू की गई है।
इनमें ब्रेस्ट कैंसर के लिए बीआरसीए1 और बीआरसीए2 जीन की पूरी जांच की जाएगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कैंसर आनुवंशिक है या नहीं और मरीज के लिए कौन-सी टारगेटेड दवा सबसे उपयुक्त रहेगी। वहीं ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के लिए 161 जीन की जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसमें आईडीएच1 और आईडीएच2 जैसे महत्वपूर्ण मार्कर की पहचान कर बीमारी का सटीक निदान और इलाज तय किया जाएगा।
जीन जांच के बाद पता चलेगा, कौनसी दवाई करेगी असर
विशेषज्ञों के मुताबिक एनजीएस आधुनिक जीन जांच तकनीक है। इस जांच से यह पता चलता है कि कैंसर किस जीन में हुए बदलाव के कारण बढ़ रहा है। रिपोर्ट के आधार पर डाक्टर ऐसी दवा का चयन करते हैं, जो सीधे उसी जीन पर असर करती है। इसे टारगेट थेरेपी कहा जाता है। इस पद्धति में सामान्य इलाज की तुलना में दवा अधिक प्रभावी होती है, साइड इफेक्ट कम होते हैं और मरीज को बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
टारगेट थेरेपी अब स्थानीय स्तर पर संभव
प्रोफेसर डॉ. शिखा घनघोरिया ने बताया कि आज महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर दुनिया का सबसे आम कैंसर बन चुका है। पहले बीआरसीए जांच के लिए मरीजों के नमूने बड़ी महानगरों की प्रयोगशालाओं में भेजने पड़ते थे, लेकिन अब यह सुविधा इंदौर में ही उपलब्ध है। ब्रेन ट्यूमर की टारगेट थेरेपी भी अब स्थानीय स्तर पर संभव हो गई है। यह लैब केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एमजीएम मेडिकल कालेज और इंदौर को कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाने का काम करेगी।
कैंसर मरीजों को बेहतर और किफायती इलाज का लाभ मिलेगा
यह परियोजना भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ हेल्थ रिसर्च के सहयोग से संचालित की जा रही है। इससे प्रदेश सहित पूरे मध्य भारत के कैंसर मरीजों को बेहतर और किफायती इलाज का लाभ मिलेगा। – डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कालेज
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