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ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता और वर्षों से लंबित मांगों को लेकर मध्यप्रदेश कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने शुक्रवार को भोपाल के अंबेडकर पार्क में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से कृषि विस्तार अधिकारी, आत्मा परियोजना और सीड सर्टिफिकेशन से जुड़े कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हुए। संघ ने ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता खत्म करने के साथ 25 साल से लंबित 2800 ग्रेड-पे की मांग भी उठाई। अतिरिक्त केंद्रों का प्रभार संभालने वाले अधिकारियों का मानदेय 500 रुपए से बढ़ाकर 5 हजार रुपए करने और पटवारियों की तरह एग्रीस्टेक भत्ता देने की मांग भी की गई। बोले- हमारा काम फील्ड का, ई-अटेंडेंस व्यावहारिक नहीं संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहन डामोर ने कहा कि कृषि विस्तार अधिकारियों का काम मुख्य रूप से मैदानी है। किसान के खेत, गांव और विभिन्न क्षेत्रों में जाकर काम करना पड़ता है। फसल प्रदर्शन, मिट्टी परीक्षण सहित किसानों से जुड़े कई काम ऑनलाइन किए जा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों को कार्यालय में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ई-अटेंडेंस के लिए बांधना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे विभाग हैं, जिनके कर्मचारी फील्ड में काम करते हैं, लेकिन उनके लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य नहीं है। इसलिए कृषि विस्तार अधिकारियों के संवर्ग को भी इससे मुक्त रखा जाना चाहिए। संघ पिछले पांच-छह महीने से शासन-प्रशासन के सामने अपनी मांगें रख रहा है, लेकिन समाधान नहीं होने पर प्रांत स्तर पर यह प्रदर्शन करना पड़ा। 25 साल से 2800 ग्रेड-पे का इंतजार संघ की प्रमुख मांगों में कृषि विस्तार अधिकारियों को 2800 ग्रेड-पे देना भी शामिल है। मोहन डामोर ने कहा कि अधिकारी पिछले 25 साल से इस मांग को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक इसका निराकरण नहीं हुआ। इसके अलावा जिन कृषि विस्तार अधिकारियों को अतिरिक्त केंद्रों का प्रभार दिया गया है, उन्हें केवल 500 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। संघ इसे बढ़ाकर 5 हजार रुपए करने की मांग कर रहा है। पटवारियों की तरह मिले एग्रीस्टेक भत्ता संघ ने कृषि विस्तार अधिकारियों को पटवारियों की तर्ज पर एग्रीस्टेक भत्ता देने की मांग की है। डामोर ने कहा कि कृषि विस्तार अधिकारी भी किसानों और उनकी फसलों से संबंधित काम ऑनलाइन कर रहे हैं। फसल प्रदर्शन, मिट्टी परीक्षण और अन्य विभागीय गतिविधियों का डाटा ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। इसलिए उन्हें भी एग्रीस्टेक भत्ता दिया जाना चाहिए। मंत्री ने ई-अटेंडेंस से मुक्त करने का भरोसा दिया प्रदेश अध्यक्ष मोहन डामोर ने कहा कि कृषि मंत्री से इस मुद्दे पर संघ की बातचीत हुई है। मंत्री ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए पीएस और विभागीय संचालक को कर्मचारियों की समस्या से अवगत कराया है। मंत्री ने आश्वस्त किया है कि यदि कर्मचारियों को ई-अटेंडेंस से परेशानी है तो उन्हें इससे मुक्त रखा जाए। उन्होंने संचालक को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कही है। डामोर ने कहा कि संघ चाहता है कि शासन जल्द निर्णय ले, ताकि कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान के बाद नियमित रूप से काम पर लौट सकें और किसानों से जुड़े विभागीय कार्यों को पूरी क्षमता से आगे बढ़ा सकें। 30 से 40% महिला अधिकारी, ग्रामीण कार्यालयों में सुविधाओं का भी मुद्दा संघ ने ज्ञापन में कहा है कि विभाग में करीब 30 से 40 प्रतिशत महिला कृषि विस्तार अधिकारी कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कई कार्यालयों में मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। कई जगह शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक मुख्यालय पर ई-अटेंडेंस के लिए उपस्थिति अनिवार्य करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा करेगा। संघ का कहना है कि कृषि विस्तार अधिकारियों की कार्यप्रकृति कार्यालयीन कर्मचारियों से अलग है। उनका अधिकांश समय किसानों के बीच और फील्ड में बीतता है। इसलिए पूर्व की तरह दौरा डायरी के आधार पर उपस्थिति व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
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