अयोध्या सीट पर 1967 से 2022 तक किस पार्टी का रहा दबदबा, पढ़िए इतिहास

अयोध्या सीट पर 1967 से 2022 तक किस पार्टी का रहा दबदबा, पढ़िए इतिहास

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस समेत सभी प्रमुख दल चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में यदि किसी एक सीट पर पूरे देश की नजर रहती है, तो वह अयोध्या विधानसभा सीट है.

समाजवादी पार्टी ने इस हाई-प्रोफाइल सीट पर सबसे पहले अपना उम्मीदवार घोषित कर चुनावी संदेश भी दे दिया है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ‘पवन पांडेय’ को अयोध्या से उम्मीदवार बनाया है. इससे साफ है कि सपा इस सीट पर शुरुआती बढ़त लेने की कोशिश में है.

फिलहाल अयोध्या से भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता विधायक हैं. उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार तेज नारायण पांडेय (पवन पांडेय) को लगभग 19,990 वोटों से हराया था.

1967 में अस्तित्व में आई अयोध्या विधानसभा सीट

वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट का गठन 1967 में हुआ था. इससे पहले 1952, 1957 और 1962 के विधानसभा चुनाव मौजूदा अयोध्या सीट के नाम से नहीं हुए थे, क्योंकि उस समय विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन अलग था. उपलब्ध आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार इस सीट पर पहला चुनाव 1967 में हुआ, जिसमें बी. किशोर भारतीय जनसंघ के टिकट पर पहले विधायक निर्वाचित हुए.

अयोध्या विधानसभा चुनाव: 1952–2022

वर्ष विजेता उम्मीदवार पार्टी
1952 वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी
1957 वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी
1962 वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी
1967 बी. किशोर भारतीय जनसंघ
1969 (मध्यावधि) विश्वनाथ कपूर कांग्रेस
1974 बेद प्रकाश अग्रवाल भारतीय जनसंघ
1977 जयशंकर पांडे जनता पार्टी
1980 निर्मल कुमार कांग्रेस (आई)
1985 सुरेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेस
1989 जयशंकर पांडे जनता दल
1991 लल्लू सिंह भाजपा
1993 लल्लू सिंह भाजपा
1996 लल्लू सिंह भाजपा
2002 लल्लू सिंह भाजपा
2007 लल्लू सिंह भाजपा
2012 तेज नारायण पांडेय ‘पवन पांडेय’ समाजवादी पार्टी
2017 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा
2022 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा

इस सीट पर किसका रहा सबसे लंबा दबदबा?

अयोध्या विधानसभा सीट पर सबसे लंबे समय तक भाजपा के लल्लू सिंह का दबदबा रहा. उन्होंने लगातार पांच चुनाव—1991, 1993, 1996, 2002 और 2007 में जीत दर्ज कर रिकॉर्ड बनाया.

अयोध्या सीट पर 1967 से 2022 तक किस पार्टी का रहा दबदबा, पढ़िए इतिहास

साल 2012 में इस सिलसिले पर विराम लगा, जब समाजवादी पार्टी के पवन पांडेय ने लल्लू सिंह को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया. हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में भाजपा ने वापसी की और वेद प्रकाश गुप्ता लगातार दो बार विधायक चुने गए.

अयोध्या सीट की दिलचस्प बातें

1. राम मंदिर बनने के बाद भी भाजपा हार गई लोकसभा चुनाव

2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट, जिसके अंतर्गत अयोध्या विधानसभा क्षेत्र आता है, भाजपा के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई. राम मंदिर के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की. इस परिणाम ने संकेत दिया कि अयोध्या में धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय समस्याएं, सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार की स्वीकार्यता भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करती है.

2. हर चुनाव में राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन जाती है अयोध्या

अयोध्या विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल है. राम जन्मभूमि आंदोलन, बाबरी मस्जिद विवाद, राम मंदिर निर्माण और हिंदुत्व की राजनीति जैसे मुद्दों ने इसे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बनाए रखा है. यही वजह है कि यहां का चुनावी मुकाबला पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचता है.

3. सामान्य सीट, लेकिन राजनीतिक महत्व सबसे ज्यादा

अयोध्या विधानसभा सीट सामान्य (जनरल) श्रेणी की सीट है, यानी यह किसी भी आरक्षित वर्ग के लिए सुरक्षित नहीं है. इसके बावजूद इसका राजनीतिक महत्व असाधारण है. भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत सभी प्रमुख दल यहां पूरी ताकत झोंकते हैं, क्योंकि अयोध्या का चुनावी संदेश अक्सर उत्तर प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित करता है.

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