मातृ नवमी 2026: पितृ पक्ष में मातृ नवमी का दिन महिला पूर्वजों के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन परिवार की दिवंगत माताओं, दादी, नानी और अन्य महिला पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इस दिन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ कुछ नियमों का पालन करने की भी परंपरा है। इस साल मातृ नवमी 4 अक्तूबर को मनाई जाएगी। अगर आपके परिवार में इस दिन किसी महिला पूर्वज का श्राद्ध किया जाता है, तो पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि श्राद्ध के दिन सात्विक आचरण और शुद्धता बनाए रखना जरूरी होता है। आइए जानते हैं मातृ नवमी के दिन किन कामों से बचने की सलाह दी जाती है।

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तामसिक भोजन से बनाएं दूरी
– फोटो : AI
तामसिक भोजन से बनाएं दूरी
पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। मातृ नवमी के दिन विशेष रूप से तामसिक भोजन से दूर रहने की मान्यता है। श्राद्ध कर्म के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन में भी सात्विकता और शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक चीजों से दूरी रखनी चाहिए। कई परिवारों में प्याज और लहसुन का प्रयोग भी नहीं किया जाता है।

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किसी महिला का अपमान न करें
किसी महिला का अपमान न करें
मातृ नवमी महिला पूर्वजों को समर्पित मानी जाती है। इसलिए इस दिन महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने पर विशेष जोर दिया जाता है। किसी महिला से अपशब्द कहना, उसका अपमान करना या जानबूझकर उसे परेशान करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि पितरों के श्राद्ध के दौरान घर में शांतिपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहिए। इसलिए इस दिन क्रोध, विवाद और कटु वाणी से बचना बेहतर माना जाता है।

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बाल और नाखून काटने से बचें
– फोटो : AI
बाल और नाखून काटने से बचें
पितृ पक्ष के दौरान कई परिवारों में बाल और नाखून काटने से परहेज किया जाता है। मातृ नवमी पर भी इस परंपरा का पालन करने की मान्यता है, खासकर उन लोगों द्वारा जो श्राद्ध कर्म में शामिल होते हैं। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में इसके नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने कुलाचार और परिवार की परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।

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भोजन की बर्बादी न करें
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भोजन की बर्बादी न करें
श्राद्ध कर्म में भोजन का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए मातृ नवमी के दिन भोजन को फेंकना या उसका अनादर करना उचित नहीं माना जाता। श्राद्ध के लिए तैयार भोजन को श्रद्धापूर्वक अर्पित करने और जरूरत के अनुसार ही भोजन तैयार करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने और यथासंभव दान-पुण्य करने की परंपरा भी रही है।
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