इंंदौर के सैफी नगर रेलवे स्टेशन पर न सफाई पर ध्यान और न पीने के पानी की व्यवस्था, लोगों ने बनाया आम रास्ता

इंंदौर के सैफी नगर रेलवे स्टेशन पर न सफाई पर ध्यान और न पीने के पानी की व्यवस्था, लोगों ने बनाया आम रास्ता

पश्चिम क्षेत्र के प्रमुख रेलवे स्टेशन में शामिल सैफी नगर रेलवे स्टेशन को पश्चिम रेलवे ने लावारिस हालत में छोड़ दिया है। स्टेशन पर अव्यवस्था, गंदगी पसर …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 09:35:50 AM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 09:35:50 AM (IST)

इंंदौर के सैफी नगर रेलवे स्टेशन पर न सफाई पर ध्यान और न पीने के पानी की व्यवस्था, लोगों ने बनाया आम रास्ता
आसपास के रहवासियों ने स्टेशन को बनाया आम रास्ता। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. असामाजिक तत्व सक्रिय, रोजाना लोकल ट्रेनों की होती है आवाजाही
  2. सैफी नगर रेलवे स्टेशन को पश्चिम रेलवे ने लावारिस हालत में छोड़ दिया है
  3. स्टेशन पर अव्यवस्था, गंदगी पसरी है, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है

प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल इंदौर के मुख्य रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास 412 करोड़ रुपए की लागत से कर रहा है। साथ ही लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन का विस्तारीकरण का कार्य चल रहा है।

पश्चिम क्षेत्र के प्रमुख रेलवे स्टेशन में शामिल सैफी नगर रेलवे स्टेशन को पश्चिम रेलवे ने लावारिस हालत में छोड़ दिया है। स्टेशन पर अव्यवस्था, गंदगी पसरी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियां हो रही है, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सैफीनगर रेलवे स्टेशन से रतलाम से महू तक ट्रेन ठहरती है। सुबह छह से रात 10 बजे तक खातीवाला टैंक, सैफीनगर, सिंधी कालोनी, पलसीकर, जूनी इंदौर सहित आसपास की रहवासी कॉलोनियों के करीब 200 से 250 यात्री रोजाना आवाजाही करते हैं। यहां पर आवाजाही करने वाले महिला और पुरुष यात्रियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। न ही पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।

नलों की टोटियां ही गायब हो चुकी हैं

पीने के पानी के लिए नलों की टोटियां ही गायब हो चुकी है। यात्रियों की सुरक्षा के कोई व्यवस्था नहीं है। आसपास के रहवासी सुबह से रात तक बेवजह घुमते रहते है। रहवासियों ने रेलवे स्टेशन को आम रास्ता बना रखा है। लोगों ने इसे शौचालय बना रखा है। रेलवे ने सुरक्षा के लिहाज से कोई व्यवस्था नहीं की है। स्टेशन की जालियां भी टूटी हुई है। सैफी नगर स्टेशन का बोर्ड भी टूटा पड़ा हुआ नजर आया। मुख्य द्वार पर असामाजिक तत्वों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। यात्रियों के लिए शेड् भी नहीं लगे हुए नजर आए। वर्षाकाल में यात्रियों को ट्रेन के इंतजार में भिगना पड़ता है।

असामाजिक तत्वों का अड्डा बना स्टेशन

सैफी नगर पर शाम से ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। स्टेशन परिसर में ही खुलेआम नशाखोरी करते हुए नजर आते हैं। आसपास के रहवासियों ने बताया कि 10 से 12 असामाजिक तत्व रोजाना शराब और नशा करते हैं। आए दिन यात्रियों से नशा करने के लिए पैसे छीन लेते हैं। यात्री डर के मारे शिकायत भी नहीं कर पाते हैं। सुरक्षा के लिहाज से कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। यात्रियों के साथ कर्मचारियों को भी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सफाई कर्मचारी को उचित पैसा नहीं मिलता है, इसलिए वो भी सफाई पर ध्यान नहीं देता है।

रात के सफर से डरते हैं यात्री

रात के समय ट्रेन पकड़ने आने वाले यात्रियों को डर रहता है कि कहीं उनके साथ कोई अपराध न हो जाए। स्टेशन की स्थिति देखकर यह यकीन कर पाना मुश्किल हो जाता है कि यह इंदौर जैसे शहर का रेलवे स्टेशन है। कर्मचारी स्टेशन से जल्दी घर लौटने का प्रयास करते हैं। दिनभर की सिल्लक लूटने का डर बना रहता है। सैफी नगर स्टेशन पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, अतिक्रमण होने के कारण कई बार शिकायत की, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।

चारों ओर फैली है गंदगी

स्टेशन पर चारों ओर गंदगी पसरी पड़ी हुई नजर आई। कचरा बीनने वालों ने कई स्थानों पर कचरा जलाकर पटक रखा हैं। किसी भी दिन ट्रेन के निकलने पर ट्रेन में आग लग सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है। फुट ओवरब्रिज के नीचे गंदगी के साथ शराब की बोतलें भी पड़ी हुई नजर आई। कचरा बीनने वालों स्टेशन को अस्थायी घर बनाकर रखा है। उनके बच्चें पटरियों पर ही खेलते हुए नजर आए। स्टेशन स्टाफ का कहना है कि शाम से रात तक पुलिस या जीआरपी की गश्त होना चाहिए। स्टेशन के आने वाले मुख्य मार्ग पर कब्जे हो चुके है। कई बार शिकायत करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। साथ ही आसपास के रहवासी स्टेशन में आकर पटरियों के पास खुले में शौच करते हुए नजर आए। साथ ही आवारा श्वान भी झुंड में घुमते रहते है।

आसपास के रहवासी न करें गंदगी

यह एक हाल्ट स्टेशन है जहां कोई रेलवे कर्मचारी तैनात नहीं है। पटरियों के किनारे रहने वाले रहवासी स्टेशन पर रोजाना ढेर सारा कचरा फेंकते हैं। रहवासियों को अपने व्यवहार को बदलने और ज्यादा जिम्मेदार बनने की जरूरत है। -अश्विनी कुमार, डीआरएम, पश्चिम रेलवे

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