नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : स्कूल में जब कोई बच्चा पहली बार पेंसिल बाएं हाथ में पकड़ता है तो कई बार उसे टोक दिया जाता है। उससे कहा जाता है कि दाएं हाथ से लिखो। कुछ बच्चों को तो लगातार दाएं हाथ से लिखने की आदत डालने की कोशिश भी की जाती है।
हालांकि विज्ञान के अनुसार बाएं हाथ का अधिक इस्तेमाल करना कोई बीमारी या कमी नहीं है। यह व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क के काम करने के तरीके से जुड़ी सामान्य विशेषता है। इंदौर में भी ऐसे कई लोग हैं, जिनके लिए बाएं हाथ से लिखना, खाना, मोबाइल चलाना या दूसरे काम करना बिल्कुल सामान्य है।
कैंची चलाने में आती थी दिक्कतें
इंदौर के फैशन डिजाइनर चंदन कुशल बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान उन्हें कैंची चलाने में काफी परेशानी होती थी। सामान्य कैंची दाएं हाथ से इस्तेमाल करने के लिए बनाई गई होती है। बाएं हाथ से पकड़ने पर ब्लेड और कटने वाली चीज का सही हिस्सा दिखाई नहीं देता था।
बाद में समझ आया कि बाएं हाथ के लिए अलग कैंची भी आती है। इसके साथ कंप्यूटर माउस ने भी कुछ समय तक परेशान किया। हालांकि माउस को बाएं हाथ से भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसके आकार और बटन की स्थिति के कारण शुरुआत में दाएं हाथ से चलाने की आदत डालनी पड़ी।
खाना खाते समय भी सुननी पड़ी बातें
चारूल जैन बताती हैं कि बचपन में उन्हें बाएं हाथ से खाना खाने पर कई बार परिवार के बड़े लोग टोकते थे। उन्हें कहा जाता था कि दाएं हाथ से खाना सीखो। शुरू में मैं कोशिश करती थी, लेकिन दाएं हाथ से उतनी आसानी नहीं होती थी। बाद में परिवार ने भी समझा कि यह मेरी स्वाभाविक आदत है।
पूजा के अनुसार अब उन्हें अपने बाएं हाथ से काम करने में कोई परेशानी नहीं होती। मोबाइल चलाना हो, लिखना हो या कोई सामान उठाना हो, बाएं हाथ से ही काम करती हैं।
परीक्षा के दौरान आती थी दिक्कतें
शिक्षिका वीनिता तलवानी बताती हैं कि स्कूल के दिनों में उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी परीक्षा के समय होती थी। वे बाएं हाथ से लिखती थीं और उनके बगल में बैठने वाला विद्यार्थी दाएं हाथ से लिखता था। दोनों की कोहनियां बार-बार टकराती थीं।
कई बार लिखते-लिखते हाथ आगे बढ़ता था तो सामने वाले की कोहनी आ जाती थी। परीक्षा में समय कम होता है, इसलिए यह छोटी परेशानी भी बड़ी लगती थी।एक और परेशानी स्याही की थी। बाएं हाथ से लिखते समय हाथ लिखे हुए शब्दों के ऊपर से गुजरता है। इससे कई पेन की स्याही हाथ पर लग जाती थी और लिखावट भी फैल जाती थी।
मस्तिष्क की कमजोरी का संकेत नहीं
न्यूरोलाजिस्ट डा. अवध द्विवेदी के अनुसार, बाएं हाथ से लिखना या काम करना किसी बीमारी या मस्तिष्क की कमजोरी का संकेत नहीं है। लेफ्ट हैंडर्स के मस्तिष्क में भी सामान्य लोगों की तरह ही सभी जरूरी क्षमताएं होती हैं। अंतर मुख्य रूप से इस बात में होता है कि मस्तिष्क के दोनों हिस्से शरीर के कामों को किस तरह नियंत्रित करते हैं।
उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोगों में शरीर के दाहिने हिस्से के काम को मस्तिष्क का बायां हिस्सा अधिक नियंत्रित करता है। लेफ्ट हैंडर्स में यह व्यवस्था कुछ अलग हो सकती है। कई लेफ्ट हैंडर्स में मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिलता है। इसका संबंध हाथों के इस्तेमाल और कुछ मानसिक गतिविधियों से हो सकता है।
यदि कोई बच्चा बाएं हाथ से लिखता है तो उसेे जबरदस्ती दाएं हाथ से लिखने के लिए मजबूर करने के बजाय उसकी प्राकृतिक क्षमता को समझना चाहिए।
प्रमुख लेफ्ट हैंडर्स
- युवराज सिंह
- गौतम गंभीर
- शिखर धवन
- अमिताभ बच्चन
- रजनीकांत
- आशा भोसले
- रतन टाटा
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