इंदौर की सराफा चाट-चौपाटी को लेकर बड़ा फैसला : हाई कोर्ट ने कहा निगम और एसोसिएशन दोनों को दुकानों की संख्या तय करने का अधिकार नहीं

इंदौर की सराफा चाट-चौपाटी को लेकर बड़ा फैसला : हाई कोर्ट ने कहा निगम और एसोसिएशन दोनों को दुकानों की संख्या तय करने का अधिकार नहीं

सराफा में रात के समय लगने वाली चाट-चौपाटी को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने यह कहते हुए कि नगर निगम और एस…और पढ़ें

Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 07:26:29 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 07:26:29 PM (IST)

इंदौर की सराफा चाट-चौपाटी को लेकर बड़ा फैसला : हाई कोर्ट ने कहा निगम और एसोसिएशन दोनों को दुकानों की संख्या तय करने का अधिकार नहीं
सराफा चौपाटी के 8 दुकानदारों को हाई कोर्ट से मिली राहत। -नईदुनिया

HighLights

  1. कहा- जिसका ओटला उसकी मर्जी कौनसी लगेगी दुकान
  2. इंदौर की सराफा चाट चौपाटी लगभग सौ साल पुरानी है
  3. हटाए गए आठ दुकानदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : सराफा में रात के समय लगने वाली चाट-चौपाटी को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने यह कहते हुए कि नगर निगम और एसोसिएशनों को सराफा चाट चौपाटी में दुकानों की संख्या तय करने का कोई अधिकार नहीं है, निगम के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें सराफा चाट-चौपाटी में दुकानों की संख्या 80 तय की गई थी।

कोर्ट ने निगम से कहा है कि वह चाट-चौपाटी से हटाए गए दुकानदारों को दोबारा दुकान लगाने की अनुमति दे। व्यापारी एसोसिएशन की सूची के आधार पर किसी विक्रेता को हटाना, जिसके पास संबंधित दुकान मालिक की अनुमति है सही नहीं है। जिसका ओटला है वह तय करेगा कि कौनसी दुकान लगेगी और कौनसी नहीं।

इंदौर की सराफा चाट चौपाटी लगभग सौ साल पुरानी है

इंदौर की सराफा चाट चौपाटी लगभग सौ साल पुरानी है। नगर निगम ने पिछले दिनों एक आदेश जारी कर सराफा चाट-चौपाटी में लगने वाली दुकानों की संख्या 80 तय कर दी थी। यह संख्या दो मानदंडों पर तय की गई थी। इनमें पारंपरिक खाद्य पदार्थ बेचना और पांच वर्ष से अधिक समय से दुकान लगाना शामिल था।

हटाए गए आठ दुकानदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी

चाट-चौपाटी से हटाए गए आठ दुकानदारों ने नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देते हुए एडवोकेट उमंग नलवाया और विवेक सोनी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए निगम के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निगम को चाट-चौपाटी में दुकानों की संख्या तय करने का अधिकार नहीं है।

यह कहा है आदेश में

  • खाने-पीने की दुकानें रात के समय, स्थायी दुकानें बंद होने के बाद, निजी दुकानों के सामने स्थित गलियारों एवं स्थानों पर लगाए जाते हैं। यह स्थान नगर निगम द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित कोई “चौपाटी” या नगर निगम का वेंडिंग जोन नहीं है। ऐसी स्थिति में नगर निगम खुद को मकान-मालिक अथवा आवंटन प्राधिकारी के रूप में स्थापित नहीं कर सकता। जब तक दुकान लगाने से सार्वजनिक आवागमन के मार्ग पर स्थाई अतिक्रमण न हो तब तक निगम यह तय नहीं कर सकता कि किसे स्टाल लगाने की अनुमति दी जाए और किसे बाहर रखा जाए।
  • चाट-चौपाटी में दुकान लगाने वाले आभूषण दुकानों के स्वामियों से सहमति के बाद ही दुकान लगाते हैं। चूंकि संबंधित स्थान दुकानदारों के परिसर से संबंधित हैं, इसलिए वे ही तय करेंगे कि जब उनकी दुकान बंद रहती है तब दुकान के सामने के स्थान के उपयोग की अनुमति किसे दें। यह नगर निगम तय नहीं कर सकता।
  • निजी संघ के पास कोई वैधानिक अथवा कानूनी अधिकार नहीं है कि वे किसी दुकान मालिक द्वारा किसी विक्रेता को दी गई व्यक्तिगत सहमति को निष्प्रभावी कर सकें।
  • निगम के पास सराफा चाट-चौपाटी की दुकानों के “आवंटन” का अधिकार नहीं है, लेकिन वह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। उसे सराफा में स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा तथा आपातकालीन वाहनों के निर्बाध आवागमन को नियंत्रित एवं सुनिश्चित करने का पूर्ण अधिकार है। निगम अपनी शक्तियों को उपयोग संविधान के अनुच्छेद के अंतर्गत व्यापार करने के अधिकार को समाप्त करने के लिए नहीं कर सकता।

कोर्ट ये जिम्मेदारियां दी निगम को

  • हाई कोर्ट ने निगम से कहा है कि वह सराफा चाट-चौपाटी को केवल चयनित सूची में शामिल 80 विक्रेताओं तक सीमित करने के आदेश को निरस्त करे और हटाए गए दुकानदारों को दोबारा दुकान लगाने की अनुमति दे। बशर्ते कि उनके पास उन संबंधित स्थाई दुकान मालिकों की आवश्यक सहमति/अनुमति हो, जिनके परिसर के बाहर वे अपनी दुकान लगा रहे हैं।
  • नगर निगम का अधिकार सराफा चाट-चौपाटी में स्वच्छता, खाद्य स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा मानकों की निगरानी एवं उनका प्रवर्तन करने तथा यह सुनिश्चित करने तक सीमित रहेगा कि सार्वजनिक आवागमन के मार्ग पर कोई स्थाई अतिक्रमण न किया जाए।
  • नगर निगम को यह स्वतंत्रता है कि वह किसी भी विक्रेता के विरुद्ध केवल स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा नगर निगम के ठोस अपशिष्ट संबंधी नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई कर सके।
  • यह भी पढ़ें- MP News: इंदौर के सराफा में लगीं अस्थाई चौपाटी दुकानें… ट्रैफिक जाम से भूख हड़ताल की आ गई नौबत

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