इंदौर के भागीरथपुरा के रहवासी अब भी झेल रहे दूषित पानी का दंश, न मुआवजा मिला और न फ्री उपचार

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा की पटेल किराना वाली गली। गली के मुहाने पर पार्वतीबाई कोंडला का मकान है। पिछले आठ माह से वे बिस्तर पर हैं। सांसें चल रही हैं, लेकिन आसपास की सुध नहीं। नलियों के सहारे लिक्विड डाइट और दवाइयां दी जा रही हैं। दूषित पानी कांड से डरा परिवार आज भी नर्मदा का पानी उबालकर पी रहा है।

तमाम दावों के बावजूद परिवार को न मुआवजा मिला, न पार्वतीबाई को निश्शुल्क उपचार। स्वजन जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर सांसों की डोर थामे हैं। बेटे प्रदीप के मुताबिक उपचार पर हर माह करीब 40 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। पैसों के लिए परिवार को प्लाट तक गिरवी रखना पड़ा।

जनप्रतिनिधि आ-जा रहे हैं, लेकिन शासन से आर्थिक मदद दिलवाने के नाम पर सभी मौन हैं। प्रदीप ने बताया कि 28 दिसंबर 2025 को उल्टी-दस्त के बाद मां को अस्पताल में भर्ती कराया था। 67 दिन भर्ती रहीं। मेडिक्लेम से उपचार का खर्च निकला, लेकिन डिस्चार्ज के बाद भी चेतना पूरी तरह नहीं लौटी। अभी भी वे बेसुध हैं।

रोजी-रोटी का संकट

यह अकेले कोंडला परिवार की कहानी नहीं है। भागीरथपुरा में दर्जनों परिवारों के सामने दूषित पानी कांड के बाद रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। कोई पानी-पतासे का ठेला लगाता था तो कोई पानी की बोतलें बेचता था। कांड के आठ माह बाद भी लोग दहशत में हैं। नगर निगम नलों में शुद्ध पानी दे रहा है, लेकिन डर के मारे लोग उसे भी उबालकर पी रहे हैं।

अब भी दहशत में डूबी बस्ती

दूषित पानी कांड ने सिर्फ सेहत ही नहीं छीनी, भागीरथपुरा की रौनक भी छीन ली। आठ माह पहले जिस गली-मोहल्ले में त्योहारों जैसी चहल-पहल रहती थी, आज वहां सन्नाटा है। पानी के कारोबार से जुड़े लोगों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और बच्चों की किलकारियां भी गायब हैं।

नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यही है कि पीड़ितों को आज तक राहत के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिले हैं। सड़कों पर गड्ढे, अधूरे रेस्टोरेशन और खुले चैंबर इस बात के गवाह हैं कि प्रशासनिक संवेदनशीलता कागजों तक ही सीमित रह गई। 36 मौतों के बाद भी भागीरथपुरा न्याय और सुरक्षा दोनों का इंतजार कर रहा है।

रेस्टोरेशन अधूरा, चैंबर खुला

दूषित पानी कांड के बाद भागीरथपुरा में दशकों पुरानी पानी की लाइनें बदली जा चुकी हैं, लेकिन एजेंसी ने सड़कों का रेस्टोरेशन नहीं किया। सड़कें आज भी खोदी पड़ी हैं। जिन सड़कों पर रविवार को बच्चों की धमाचौकड़ी होती थी, वे आज सूनी हैं। भागीरथपुरा पुलिस चौकी के सामने चौराहे पर नर्मदा लाइन का चैंबर खुला पड़ा है। हादसे की आशंका बनी हुई है। नगर निगम के जल कार्य विभाग ने सिर्फ एक बेरिकेड लगाकर इतिश्री कर ली।

पाइपलाइन बदलने का काम पूरा हुआ

भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन बदलने का कार्य पूरा हो चुका है। अब संबंधित एजेंसी को सड़क और अन्य स्थानों के रेस्टोरेशन का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस संबंध में इससे अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर

इस संबंध में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क का लगातार प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

यह भी जानें

  • दूषित पानी कांड को आठ माह बीते, पीड़ित परिवार अब भी बेसहारा
  • पार्वतीबाई का उपचार जारी, हर माह 40 हजार का खर्च
  • न मुआवजा मिला, न निश्शुल्क इलाज
  • कई सड़कों का रेस्टोरेशन अधूरा
  • पुलिस चौकी के सामने खुला चैंबर, हादसे का खतरा

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