इंदौर के सरकारी अस्पतालों की मशीनें ठप, डॉक्टर नदारद; मरीज हो रहे बेहाल

नीरज व्यास, इंदौर। इंदौर के सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का टोटा है। इसके चलते इन अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचने वाले हजारों मरीज परेशान हो रहे हैं। हाल ही में शुरू हुए नंदानगर के सरकारी अस्पताल में जहां सोनोग्राफी मशीन बंद है, वहीं पीसी सेठी अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से प्रसूताओं की जांच सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही हो रही है।

नईदुनिया ने शहर के सरकारी अस्पतालों की पड़ताल की तो कई खामियां सामने आईं, जो मरीजों के उपचार में बाधक बन रही हैं। कहीं इलाज के लिए डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं जांच मशीनों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। व्यवस्थाओं में सुधार के नाम पर अधिकारी पत्राचार कर जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। शहर के सरकारी अस्पतालों की हकीकत बयां करती नईदुनिया की खास रिपोर्ट।

पीसी सेठी अस्पताल : मेडिकल अफसरों की कमी

जीपीओ के नजदीक स्थित पीसी सेठी अस्पताल में रोजाना लगभग 500 ओपीडी आती हैं। यहां गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच से लेकर डिलीवरी तक की व्यवस्था है। रोजाना लगभग 12 से 15 डिलीवरी होती हैं। 35 से 40 महिलाओं को सोनोग्राफी की जरूरत पड़ती है, लेकिन यहां सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही सोनोग्राफी की व्यवस्था है।

अस्पताल में नियमित रेडियोलाजिस्ट की पोस्टिंग नहीं है। ड्यूटी डॉक्टरों और मेडिकल ऑफिसरों की कमी भी बनी हुई है। एक गायनेकोलाजिस्ट को सोनोग्राफी की ट्रेनिंग देकर आपात स्थिति में सेवाएं ली जा रही हैं। अस्पताल को सिक्युरिटी गार्ड और लिफ्ट मैन की भी जरूरत है। इसे लेकर सीएमएचओ को पत्र लिखा गया है।

जिला अस्पताल : सोनोग्राफी मशीन का पंजीयन नहीं

जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में पहले आई ओटी संचालित होती थी। नई बिल्डिंग बनने के बाद यह सुविधा जिला अस्पताल में नहीं रही। हुकुमचंद पाली क्लीनिक को आई ओटी दे दी गई है। अब सिविल सर्जन ने शासन स्तर से नई बिल्डिंग में दोबारा आई ओटी संचालित करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने नेशनल हेल्थ मिशन (एएचएम) की एमडी को पत्र भेजा है। फिलहाल मामला शासन स्तर पर लंबित है।

जिला अस्पताल में आपरेशन शुरू हो गए हैं। यहां पीसी सेठी अस्पताल से सोनोग्राफी मशीन भेजी गई है, लेकिन यह संचालित नहीं हो पा रही है, क्योंकि जिला अस्पताल के नाम पर अब तक इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। रेडियोलाजिस्ट की कमी को देखते हुए यहां पीजीएमओ से रेडियोलाजिस्ट की सेवाएं ली जा रही हैं। जिला अस्पताल में पेयजल का भी संकट है। फिलहाल सिविल सर्जन ने नर्मदा कनेक्शन लेने के लिए भी आवेदन किया है।

नंदानगर अस्पताल : सोनोग्राफी मशीन खराब, पीडियाट्रिशियन भी नहीं

नंदानगर अस्पताल की ओपीडी में रोज लगभग 100 महिलाएं आती हैं। इनमें 15 से अधिक गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी लिखी जाती है, लेकिन यहां मशीन कई दिनों से खराब पड़ी है। इसके कारण सभी महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए सेंटर जाना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन ने सोनोग्राफी मशीन की मांग भी भेजी है, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। यहां लंबे समय से परमानेंट पीडियाट्रिशियन की कमी है। अभी दूसरे अस्पताल से डाक्टरों को बुलाना पड़ रहा है।

बाणगंगा अस्पताल : सिर्फ दो दिन सोनोग्राफी

बाणगंगा अस्पताल की ओपीडी में गर्भवती महिलाओं का लोड रहता है। यहां रोजाना लगभग 100 गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं, जिनमें 30 से 35 को सोनोग्राफी की जरूरत होती है। यहां मंगलवार और शुक्रवार को ही सोनोग्राफी की जाती है। इससे कई बार महिलाओं को मजबूरी में सोनोग्राफी के लिए अन्य सरकारी अस्पतालों या निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है।

एमटीएच : लिफ्ट बंद होने से परेशानी

एमटीएच अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों का सामना बंद लिफ्ट से हो रहा है। फिलहाल यहां चार लिफ्ट हैं, जिनमें से दो पूरी तरह बंद हैं। अन्य दो लिफ्ट में मेंटेनेंस का काम चल रहा है। ऐसे में लिफ्ट के चलने के दौरान बंद होने के खतरे को देखते हुए इन्हें भी बंद कर दिया गया है।

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सीएमएचओ को पत्र लिखा

हमारे यहां सप्ताह में दो दिन सोनोग्राफी की जाती है। हमें एक परमानेंट रेडियोलाजिस्ट और ड्यूटी डॉक्टरों की जरूरत है। सिक्युरिटी गार्ड और लिफ्ट मैन की मांग करते हुए हमने सीएमएचओ को पत्र भी लिखा है। – डॉ. वीरेंद्र राजगर, प्रभारी, पीसी सेठी अस्पताल

जल्द मशीन मिलने की उम्मीद

हमारे यहां की सोनोग्राफी मशीन खराब हो गई है। हमने नई मशीन की मांग की है। जल्द ही हमें मशीन मिलने की उम्मीद है। हमने पीडियाट्रिशियन की जरूरत भी बताई है। – डॉ. रूपाली जोशी, प्रभारी, नंदानगर अस्पताल

शासन स्तर पर मामला लंबित

हमने जिला अस्पताल में आई ओटी दोबारा दिए जाने को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन की एमडी को पत्र लिखा है। अभी शासन स्तर पर मामला लंबित है। – डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत, सिविल सर्जन

विभाग के पास डॉक्टरों की कमी

स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल दो ही रेडियोलाजिस्ट हैं, जिनकी सेवाएं रोटेशन बनाकर अस्पतालों में ली जा रही हैं। विभाग के पास डॉक्टरों की कमी है। हम जल्द व्यवस्थाओं में सुधार लाएंगे। – डॉ. माधव हासानी, सीएमएचओ

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