इंदौर के 7 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगी राहत… 2 साल बाद फिर छपेंगे RC और ड्राइविंग लाइसेंस के स्मार्ट कार्ड

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वाहन मालिकों और लाइसेंसधारियों के लिए करीब दो साल से बंद पड़े आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस के स्मार्ट कार्ड फिर शुरू होने की राह खुल गई है। एक अक्टूबर 2024 से प्लास्टिक स्मार्ट कार्ड की प्रिंटिंग बंद है। इस अवधि में इंदौर जिले में 4.11 लाख नए वाहनों का पंजीयन हुआ, जबकि करीब तीन लाख ड्राइविंग से अधिक लाइसेंस बनाए गए।

इसके अलावा बड़ी संख्या में आरसी और डीएल का नवीनीकरण भी हुआ। इन सभी मामलों में लोगों को फिजिकल कार्ड के बजाय ऑनलाइन पीडीएफ उपलब्ध कराई गई, जबकि विभाग कार्ड के नाम पर 12.41 करोड़ से अधिक की वसूली कर चुका है।

नई एजेंसी पर रहेगा पेंडेंसी खत्म करने का दबाव

दरअसल परिवहन विभाग द्वारा आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 200 रुपये शुल्क वसूला जाता है। यह शुल्क कार्ड नहीं देने पर भी बंद नहीं किया गया और विभाग ने अक्टूबर 2024 से अब तक 12 करोड़ 41 लाख 99 हजार 200 रुपये शुल्क के रूप में वसूले हैं।

अब स्मार्ट कार्ड की प्रिंटिंग शुरू होने के बाद पुरानी पेंडेंसी के साथ नए कार्ड भी जारी करने होंगे। इससे नई एजेंसी पर एक साथ बड़ी संख्या में कार्ड तैयार करने का दबाव रहेगा। आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि मुख्यालय स्तर से प्रक्रिया होना है। जिन लोगों से कार्ड का शुल्क लिया गया है, उनको भी कार्ड जारी किए जाएंगे। हालांकि अभी तक इसको लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।

कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद अटकी प्रक्रिया: कैबिनेट के फैसले के बाद मिली हरी झंडी

परिवहन विभाग ने स्मार्ट कार्ड तैयार करने का कार्य स्मार्ट चिप प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। इस कंपनी से 30 सितंबर 2024 को अनुबंध समाप्त हो गया। इसके बाद नई एजेंसी नियुक्त करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन लंबे समय तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब कैबिनेट के फैसले के बाद स्मार्ट कार्ड व्यवस्था फिर शुरू करने की प्रक्रिया की जा रही है।

विभाग पर बढ़ेगा पेंडेंसी का दबाव: महीनों लग सकता है समय

करीब दो साल से कार्ड का इंतजार कर रहे वाहन मालिकों और लाइसेंसधारियों की पेंडेंसी खत्म करना नई एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती होगी। पुराने कार्ड प्रिंट करने के साथ ही रोजाना बनने वाले नए आरसी और डीएल के कार्ड भी तैयार करने होंगे। ऐसे में पूरी पेंडेंसी खत्म होने में कई महीने लगने की संभावना है।

पीडीएफ से आम जनता को परेशानी: सर्वर की समस्या ने भी बढ़ाई मुसीबत

मोबाइल पर उपलब्ध पीडीएफ को हर जगह आसानी से स्वीकार नहीं किए जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस जांच, वाहन फाइनेंस, बैंकिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में कई बार फिजिकल कार्ड मांगा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, बुजुर्गों और कम तकनीकी जानकारी रखने वालों के लिए मोबाइल में दस्तावेज सुरक्षित रखना और जरूरत पर उसे दिखाना भी मुश्किल हो रहा है।

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इधर परिवहन विभाग के सर्वर में पिछले कुछ दिनों से तकनीकी दिक्कतों के कारण नए लाइसेंस और वाहन पंजीयन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में कार्ड की लंबी पेंडेंसी के साथ सर्वर संबंधी समस्या ने वाहन मालिकों और आवेदकों की परेशानी और बढ़ा दी है। अब नई एजेंसी की नियुक्ति और कार्ड प्रिंटिंग शुरू होने के बाद ही इस व्यवस्था के पटरी पर आने में महीनों लग सकते हैं।

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