रेलवे सुरंग के दोनों प्रवेश द्वारों को आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है, ताकि टनल से गुजरने वाले यात्रियों को क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक …और पढ़ें

HighLights
- इंदौर की पहली रेल सुरंग का काम अंतिम चरण में
- टीही-पीथमपुर टनल में बिछ रहा बैलास्टलेस ट्रैक
- 20 मीटर नीचे बनी टीही टनल में विकास की रफ्तार
प्रणय चौहान, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-दाहोद नई रेलवे लाइन परियोजना में बन रही टीही सुरंग अब सिर्फ ट्रेनों के आवागमन का रास्ता नहीं होगी। रेलवे सुरंग के दोनों प्रवेश द्वारों को आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है, ताकि टनल से गुजरने वाले यात्रियों को क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की झलक मिल सकें।
टीही सुरंग पीथमपुर क्षेत्र में है और यह धार जिले में आती है, इसलिए इसके प्रवेश द्वार पर धार की प्रसिद्ध भोजशाला की स्थापत्य शौली को उकेरने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रही है। हालांकि डिजाइन अभी अंतिम नहीं हुआ है और कुछ प्रस्तावों पर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा चल रही है।
यात्रियों को होगा ऐतिहासिक एहसास
रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सुरंग के प्रवेश द्वार पर क्षेत्रीय संस्कृति, वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाने वाली आकृतियां तैयार की जा सकती हैं। स्थानीय कला, पारंपरिक चित्रकारी और क्षेत्रीय प्रतीकों की नक्काशी के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि सुरंग का स्ट्रक्चर तकनीकी जरूरत पूरी करने के साथ क्षेत्र की पहचान का हिस्सा भी बने।
यात्रियों को स्थानीय विरासत का होगा अनुभव
परियोजना के तहत 2.95 किमी (2957 मीटर) लंबी सुरंग के दोनों छोर पर खूबसूरत स्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे। टीही की ओर बनने वाले प्रवेश द्वार के लिए भोजशाला की स्थापत्य शैली से प्रेरित डिजाइन का प्रस्ताव है। इससे धार की ओर प्रवेश करते समय यात्रियों को स्थानीय विरासत का अनुभव कराने की कोशिश होगी। पीथमपुर की ओर बनने वाले दूसरे प्रवेश द्वार का डिजाइन अभी तय नहीं हुआ है।
टनल में दोनों एंड पर छोड़ा था काम, अब शुरू
टनल के दोनों एंड पी-1 पीथमपुर और पी-2 टीही की तरफ दोनों छोर पर सामग्री व सामान के आवागमन के लिए रेलवे ने दोनों हिस्से में टनल का काम छोड़ा था। एक हिस्से में 170 मीटर जबकि दूसरे हिस्से में 50 मीटर से ज्यादा हिस्सा था। इस हिस्से को भी रेलवे ने काम शुरू कर दिया है। पी-1 और पी-2 दोनों एंड छोर के बाहर सुरक्षा के लिहाज से लोहे के सरिये लगाकर दीवारें बनाई जा रही है।
प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने कहा अगले दो महीने में हिस्से को भी पूरा करने का टारगेट रखा गया है। वहीं, टनल के अंदर जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था को भी समानांतर रूप से विकसित कर रहे है। टनल के अंदर ड्रीलमेन गार्ड रेलवे ट्रक के बीच में बनाकर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिफिकेशन का काम जारी है। टनल में कुल 12 एग्जास्ट फैन लगाए जा रहे हैं। चार लगाए जा चुके हैं।
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इंदौर से जुड़े किसी रेल प्रोजेक्ट की पहली टनल
- इंदौर-दाहोद रेलवे प्रोजेक्ट में पहली सुरंग है। सुरंग के लिए 2017-18 में सुरंग का काम शुरू हुआ था।
- वर्तमान लागत करीब 1700 करोड़ रुपये, 200.97 किमी नई रेल लाइन की कुल लंबाई।
- 2020 में रेलवे ने प्रोजेक्ट को फ्रीज कर टेंडर शार्ट टर्मिनेट कर दिए। काम बंद होने के बाद आधी-अधूरी टनल में वर्षा के बाद पानी भरा गया।
- तीन साल बाद जून 2023 में टनल का काम दोबारा शुरू हुआ। जब काम शुरू हुआ था तब टनल से पानी निकालना सबसे बड़ी चुनौती था।
- दोबारा टनल का काम शुरू हुआ तब 1121 मीटर का काम बचा हुआ था। 3 जून 2023 को ब्लास्टिंग के साथ दोबारा काम शुरू किया।
- जून-2024 में टनल के दोनों हिस्से आरपार (थ्रू) दिखाई दिए। इस काम के पूरा होने पर फ्लैग दिखाकर खुशियां मनाई गई।
- सुरंग ग्राउंड लेवल से करीब 20 मीटर नीचे बन रही है। टनल 8 मीटर ऊंची, 8 मीटर चौड़ी, दो डिग्री के दो कर्व है।
- चौड़ाई 8 मीटर व ऊंचाई भी 8 मीटर है।
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