इंदौर: बोवनी पर संकट, तालाब और चेकडैम सूखे, नलकूपों ने भी छोड़ा साथ

इंदौर जिले में इस मानसून सीजन के दौरान हुई कम बारिश का प्रतिकूल प्रभाव अब ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगा है। सितंबर का महीना समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन जिले के अधिकांश गांवों में स्थित तालाब और चेकडैम पूरी तरह सूखे पड़े हैं। सिंचाई के प्रमुख आधार माने जाने वाले नलकूपों का जलस्तर अत्यधिक नीचे चला गया है, जिससे किसानों के सामने आगामी फसलों की बुआई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

नलकूपों ने छोड़ा साथ, लहसुन और आलू की बुआई प्रभावित

जिले के कनाड़िया, देपालपुर और सांवेर क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नलकूपों में जलस्तर घटने के कारण कहीं मोटर चलने पर हवा निकल रही है, तो कहीं कुछ ही मिनटों में पानी का बहाव बंद हो जाता है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर आधे घंटे में जल प्रवाह पूरी तरह समाप्त हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप सितंबर माह में की जाने वाली लहसुन और आलू की बोवनी अत्यधिक प्रभावित हो रही है। कनाड़िया क्षेत्र की ग्राम पंचायत चौहानखेड़ी स्थित खेमाना तालाब में पानी बहुत कम है। वहीं देपालपुर के गिरोता, चरवाड़ा, मरकोदा और सांवेर के डकाच्या तथा लसूड़िया परमार जैसे गांवों के किसान अत्यधिक असमंजस की स्थिति में हैं।

रबी फसलों पर मंडराया खतरा, किसान संगठनों ने जताई चिंता

अक्टूबर माह से प्रारंभ होने वाली गेहूं और चने की बोवनी को लेकर किसानों की चिंताएं अत्यधिक बढ़ गई हैं। जिले के बहुसंख्यक कृषक पूरी तरह नलकूपों एवं स्थानीय तालाबों पर आश्रित हैं। किसान नेताओं के अनुसार देपालपुर, सांवेर और कनाड़िया के संपूर्ण बेल्ट में बोरवेल पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं। इस वर्ष गंभीर और चंबल नदियां एक बार भी पूरे उफान पर नहीं आईं, जिसके कारण इन नदियों पर बने सभी चेकडैम सूखे पड़े हैं।

समय रहते व्यवस्था करे सरकार

किसान नेता बबलू जाधव ने कहा हम प्रशासन को किसानों की हालत से अवगत करा चुके हैं। समय रहते व्यवस्थाएं नहीं की गई तो हालात बहुत बुरे हो जाएंगे। पानी की बहुत कमी और किसान परेशान है। इस साल कई फसलें तो लग भी नहीं पाएंगी। इंदौर और आसपास के जिलों में इस साल बहुत ही कम पानी गिरा है। 

कृषि विभाग का परामर्श, कम पानी वाली फसलों पर जोर

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूरे संभाग में कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे आगामी रबी सीजन प्रभावित होना स्वाभाविक है। संयुक्त संचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि एक से 15 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाकर अधिकारियों की टीमें गांव-गांव पहुंचेंगी। किसानों से सीधे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें उन्हें अत्यधिक पानी की खपत वाली फसलों के स्थान पर कम पानी में पकने वाली दलहन और तिलहन फसलों की बुआई करने की सलाह दी जा रही है।

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