इंदौर से 40 किलोमीटर दूर जानापाव तीर्थ को प्रदेश सरकार महाकाल लोक की तर्ज पर संवारेगी। इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि
जानापाव वह गौरवशाली धरती है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि परशुराम जी से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। यह पवित्र और गौरवशाली स्थान है। महर्षि परशुराम जी की जन्मस्थली और साढ़े सात नदियों के उद्गम वाला यह स्थल पौराणिक महत्व रखता है। यहां परशुराम लोक बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम से गहरा संबंध रहा है। सरकार इस लगभग पांच हजार वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने फिर से लाने के लिए कार्य कर रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने मध्यप्रदेश में जहां-जहां अपने चरण रखे, उन सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार भगवान श्रीराम के चरण जहां-जहां पड़े, उन स्थलों को भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चित्रकूट धाम, जानापाव, श्रीराम के वनगमन से जुड़े आश्रम और अन्य पौराणिक स्थलों के साथ भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को भी विकसित करने की योजना है। भगवान श्रीकृष्ण के मध्यप्रदेश से संबंध को दर्शाने वाले स्थलों में रुक्मिणी हरण से जुड़े क्षेत्र तथा धार जिले में हुए युद्ध से संबंधित स्थानों को भी विकसित कर उनके गौरवशाली इतिहास को जीवंत किया जाएगा।
जानापाव को भी देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र और आध्यात्मिक चेतना पीठ के रूप में विकसित किया जा रहा है। महाकाल महालोक की तर्ज पर लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से परशुराम लोक और श्रीकृष्ण लोक का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।
परियोजना के अंतर्गत यज्ञ कुंड का पुनर्विकास, भव्य ऑडिटोरियम, ध्यान कुटीर, हर्बल गार्डन, लैंडस्केपिंग, बहुउद्देशीय भवन तथा जनसुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए पहाड़ी पर रोपवे निर्माण भी कार्ययोजना में शामिल है।
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