स्कीम-136 में लगी आग की जांच फायर ब्रिगेड,नगर निगम और पुलिस ने ठंडी कर दी। अफसरों ने न तो सीसीटीवी फुटेज निकाले न ही मौके पर एफएसएल एक्सपर्ट बुलाए। पु …और पढ़ें

HighLights
- अग्निकांड: रहवासी बोले-चार्जिंग से ही सुलगे तार, धुएं में घिरे थे 20 लोग
- पुलिस, नगर निगम, फायर ब्रिगेड और बिजली कंपनी चुप
- पुलिस और निगम अफसरों ने तो सुरक्षा में चूक की जांच ही नहीं की
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्कीम-136 में लगी आग की जांच फायर ब्रिगेड,नगर निगम और पुलिस ने ठंडी कर दी। 20 लोगों की जान आफत में पड़ गई पर अफसरों ने न तो सीसीटीवी फुटेज निकाले न ही मौके पर एफएसएल एक्सपर्ट बुलाए। पुलिस और निगम अफसरों ने तो सुरक्षा में चूक की जांच नहीं की।
खालसा चौक के समीप चार मंजिला इमारत (परमेश्वरी विला) में शुक्रवार तड़के आग लग गई थी। इस इमारत में 9 फ्लैट और पेंट हाउस बना हुआ है। इमारत के मालिक हर्ष अग्रवाल (गीता भवन) का तल मंजिल पर इलेक्ट्रानिक व्हीकल का शोरूम है। शेष फ्लैट हर्ष ने अजय नागवाल को लीज पर दे रखे है।
अजय उन्हें बीएनबी एयर एप के माध्यम से किराये पर देता है। हर्ष के शोरूम में स्कटूर और आटो रिक्शा रखे हुए थे। पार्किंग में लाइन से ई-रिक्शा खड़े कर चार्जिंग पर लगाए गए थे। इसी से तार सुलगे और जलते हुए शोरूम तक चले गए। रेगजिन और बैटरी होने के कारण आग ने विकराल रुप ले लिया और पूरी इमारत धुएं से भर गई। फ्लैट में रहने वाला भानूसिंह (शिवपुरी) का परिवार अंदर ही फंसा रह गया।
भानू निजी कॉलेज में काम करता है। पुलिस ने घटना को गंभीरता से नहीं लिया है। सुरक्षा में चूक और आग के कारणों की जांच तक नहीं की। इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरा भी नहीं खंगाला गया। रहवासियों के अनुसार जरा सी देर ओर होने पर तिलकनगर की तरह बड़ी घटना घट सकती थी।
ईवी की आग सामान्य आग से क्यों अलग होती है?
अधिकांश ई-स्कूटर और ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी होती है। शार्ट सर्किट, ओवरहीटिंग, खराब सेल, बीएमएस (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) की खराबी या गलत चार्जिंग के कारण बैटरी में थर्मल रनअवे की स्थिति बन सकती है। इसमें तापमान तेजी से बढ़ता है और आग एक सेल से दूसरे सेल तक फैलने लगती है।
ईवी की आग क्यों होती है ज्यादा खतरनाक?
- आग का तापमान सामान्य आग से अधिक हो सकता है।
- घना और दम घोंटने वाला धुआं निकलता है।
- विषैली गैसें वातावरण में फैल सकती हैं।
- आग बुझने के बाद भी बैटरी दोबारा सुलग सकती है।
- बंद जगहों में धुआं तेजी से भरता है, जिससे रेस्क्यू मुश्किल हो जाता है।
आग लगने के प्रमुख कारण
- शार्ट सर्किट
- ओवरचार्जिंग
- खराब या क्षतिग्रस्त बैटरी
- लोकल या असंगत चार्जर का उपयोग
- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) की खराबी
- अत्यधिक गर्म वातावरण में चार्जिंग
इन सावधानियों से टाला जा सकता है खतरा
- केवल कंपनी द्वारा अनुमोदित चार्जर का उपयोग करें।
- चार्जिंग के दौरान पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
- क्षतिग्रस्त बैटरी या चार्जर का उपयोग न करें।
- बैटरी में असामान्य गर्मी, सूजन या गंध महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद करें।
- शोरूम, गोदाम और पार्किंग में फायर सेफ्टी उपकरण अनिवार्य रखें।
- एक साथ बड़ी संख्या में वाहनों की चार्जिंग के दौरान विशेष निगरानी रखें।
इंदौर में पार्किंग में चार्जिंग पर लगे थे ई-रिक्शा, इससे हुआ शॉर्ट सर्किट और जल गया शोरूम
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