नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में लगातार बढ़ते भूजल दोहन के बीच अब इसके उपयोग को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। शुक्रवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडबल्यूए) की जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। इसमें भूजल नियमन, संरक्षण, एनओसी प्रक्रिया, दंडात्मक प्रावधान और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों को दी गई।
केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तर मध्य क्षेत्र भोपाल के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला रीजनल डायरेक्टर अशोक कुमार बिसवाल के मार्गदर्शन में हुई। सीजीडबल्यूए की वैज्ञानिक पैसनी पटेल ने भूजल विकास एवं प्रबंधन के नियमन से जुड़े प्रावधानों को विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि भूजल का उपयोग करने वाले संस्थानों और परियोजनाओं के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी है। कार्यशाला में केंद्रीय भूजल बोर्ड की वैज्ञानिक अंजलि कुशवाहा और पार्थ सारथी तथा जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय तिवारी उपस्थित रहे।
भू-नीर पोर्टल पर ऐसे होगी प्रक्रिया
कार्यशाला में भू-नीर पोर्टल के माध्यम से भूजल से संबंधित आवेदन, एनओसी प्राप्त करने, अनुमति और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों की जानकारी दी गई। नियमों के उल्लंघन पर लागू दंडात्मक प्रावधानों से भी अवगत कराया गया।
होटल-मॉल से उद्योग तक पर नजर
कार्यशाला में उन संस्थानों पर विशेष फोकस रहा, जहां बड़े स्तर पर भूजल का उपयोग होता है। अस्पताल, होटल, मॉल, उद्योग, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर यूनिट, टैंकर संचालन, बोरिंग तथा बड़े आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट से जुड़े नियमों पर चर्चा हुई।
नगर निगम, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, पर्यावरणविद्, क्रेडाई सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। अधिकारियों ने कहा कि भूजल सीमित प्राकृतिक संसाधन है। बढ़ते दबाव को देखते हुए इसके अनियंत्रित दोहन को रोकना जरूरी है।
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