नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में बुधवार को 63 मिमी हुई वर्षा नगर निगम की मानसून की तैयारियाें के दावों पर पानी फेर दिया। सिर्फ इतनी वर्षा में शहर चौराहे जलमग्न हुए और सड़क पर खड़े वाहन ही नहीं दो युवक भी बह गए। हल्ला मचा तो कलेक्टर व सभी अफसरों को प्रबंधन की याद आई और संयुक्त टीमें गठित करने योजना बनाई गई।
इससे स्पष्ट है नगर निगम व प्रशासनिक अफसरों की जल जमाव व ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए पूर्व कोई तैयारी ही नहीं थी। बुधववार को हुई वर्षा ने पिछले दो माह से नाला और स्टार्म वाटर लाइन सफाई अभियान के नाम पर मच रहे हल्ले की पोल खोल दी। नगर निगम पिछले आठ साल से शहर में स्टार्म वाटर लाइनें बिछा रहा है।
इसके बाद बाद भी अभी तक शहर की 90 प्रतिशत से ज्यादा सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन ही नहीं है। स्टार्म वाटर लाइन बिछाने और इनके रखरखाव पर हर साल 40 करोड़ से ज्यादा खर्च नगर निगम करता है। इसके बाद भी हर वर्षाकाल में शहर डूबता है। शहर के 150 से ज्यादा चौराहों पर घंटों घुटने-घुटने पानी जमा रहा। वर्षा के दौरान देर रात तक चौराहों पर लगी वाहनों की कतार व ट्रैफिक जाम में शहरवासी घंटों तक बंधक रहे।
जल जमाव वाले 150 से स्थान है चिह्नित, फिर भी निकासी का अधूरा इंतजाम
निगम ने शहर में 150 से ज्यादा स्थान चिन्हित कर रखे है जहां हर साल जलजमाव होता है। गिटार चौराहा, विजय नगर चौराहा, स्टार चौराहा जैसे कुछ पाइंट को सुधारा भी गया। इसके बाद भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में जल जमाव के नए स्थान बन रहे है। पिछले साल तक रोबोट चौराहे पर जलजमाव नहीं होता था, लेकिन यहां मेट्रो के निर्माण कार्य के कारण जल जमाव की स्थिति बनी। वही सुदामा नगर में अन्नपूर्णा-फूटी कोठी लिंक रोड भी इस बार जलमग्न हुआ।
50 प्रतिशत सड़को चाहिए स्टॉर्म वाटर लाइन
इंदौर में तीन हजार किमी की कुल सड़कों में से सिर्फ 276 किमी हिस्से में ही स्टार्म वाटर लाइन बिछी है। विशेषज्ञों के मुताबिक इंदौर की 50 प्रतिशत सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन होना चाहिए।
जल जमाव व ट्रैफिक जाम में लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई : कलेक्टर
बुधवार को जलजमाव और ट्रैफिक जाम में जनता परेशान हुई तो इंदौर से भोपाल तक इसका हल्ला मचा। इसके बाद कलेक्टर ने गुरुवार को सभी विभागों की संयुक्त बैठक ली। उन्होंने सभी अफसरों को यह निर्देश दिए कि बुधवार की तरह पुन: स्थितियां न बने इसके लिए सभी अधिकारी मुस्तैदी से काम करे। लापरवाही पाये जाने पर संबंधित अधिकारियों व एजेंसी के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों के संयुक्त दल बनाए जाए। कलेक्टर ने कहा कि सभी नालों, चैनलों, तालाबों के आसपास तथा जलभराव वाले स्थलों की साफ-सफाई तत्काल की जाए ताकि जलभराव व ट्रैफिक जाम की स्थिति न बने ।
जहां भी जल जमाव हो वहां पंप लगाकर पानी निकासी करें
कलेक्टर ने कहा सड़क निर्माण एजेंसियों सड़कों पर मौजूद गड्ढों में पैचवर्क, डामरीकरण एवं सड़क मरम्मत पूरा करने को कहा ताकि गडढ़ों एवं जल भराव की समस्यां न हो। इन कार्यों की नियमित मानिटरिंग एवं फालोअप भी किया जाए। जहां भी पानी भरने की समस्या हो, वहां तत्काल पंप लगाकर पानी की निकासी करे।
जलजमाव व ट्रैफिक जाम नियंत्रण के लिए बनाई ये योजना
- दुर्घटना संभावित एवं जलभराव वाले स्थानों पर कल सुबह त सुधार हो।
- जरुरत पड़ने पर राहत शिविर भी लगाए जाए। इसकी व्यवस्था करे।
- पिकनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखे, पुल-पुलियों पर संकेतक लगाए।
- जिला आपदा नियंत्रण कक्ष का 24 घंटे संचालन हो।
- पुलिस, होमगार्ड, एसडीआरएफ, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग पूर्ण सतर्कता की स्थिति में रहे।
- संवेदनशील एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों में बचाव उपकरण, नाव, राहत सामग्री, चिकित्सा दल सुनिश्चित करे।
- नदी, बांध, जलाशय एवं नालों के जलस्तर की सतत निगरानी हो।
अहीरखेड़ी की पुलिया से बहा युवक का नहीं मिला, जारी रहेगा सर्च ऑपरेशन
बुधवार को वर्षा के दौरान अहीरखेड़ी में पुलिया पार करते समय बहा मिस्त्री महेश पुत्र श्रवण को खोजने के लिए गुरुवार को पुलिस, एसडीईआरएफ की टीम, गोताखोरों और स्थानीय लोगों ने दिनभर दो किमी दूरी तक सर्च आपरेशन चलाया,लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। पुलिस ने सिरपुर तालाब में बहने का शक जताया है, वहां सर्च अभियान चलेगा। पुलिया से 300 मीटर दूर उसकी बाइक और 800 मीटर की दूरी पर टिफिन मिला। टीआइ के अनुसार कीचड़ ज्यादा होने के कारण भी सर्चिंग में दिक्कत आ रही थी। शुक्रवार को पुन: सर्चिंग की जाएगी।
लसूड़िया मोरी नाले में बहे युवक का शव सुबह मिला
बुधवार रात को लसूड़िया मोरी में नाले में भी एक युवक बह गया था। गुरुवार सुबह एसडीईआरएफ की टीम ने युवक के शव को कीचड़ से निकाला। लसूड़िया मोरी निवासी 34 वर्षीय गोलू पुत्र आत्माराम अपने पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था। आत्माराम आइसर कंपनी में सिक्युरिटी गार्ड है। गोलू ईंट भट्टा पर काम करता था। नाले किनारे से से जाते समय फिसल गया और तेज बहाव के कारण बह गया। रात में अंधेरा होने के कारण सर्च आपरेशन रोकना पड़ा। सुबह प्लांटून कमांडर अश्विन चौधरी टीम ने दो घंटे की मशक्कत के बाद गोलू का शव डेढ़ मीटर दूर स्थित पुलिया के नीचे कचरे में फंसा हुआ मिला स्थानीय रहवासियों का कहना है कि गांव को जोड़ने वाले मार्गों पर कीचड़ है। नगर निगम ने सड़क नहीं बनाई ।
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