छोटा बांगड़दा स्थित सांवरिया नगर में शासकीय माध्यमिक स्कूल की पुरानी इमारत को नए भवन के निर्माण के नाम पर तोड़ दिया गया, लेकिन नया स्कूल बनने से पहले …और पढ़ें

HighLights
- नए स्कूल के लिए 90 लाख रुपये का टेंडर वर्ष 2025 में हुआ जारी, लेकिन निर्माण शुरू नहीं
- यहां शासकीय माध्यमिक स्कूल की पुरानी इमारत को नए भवन के निर्माण के नाम पर तोड़ दिया गया
- नया स्कूल बनने से पहले ही उसी जमीन पर पहले ओटला बना और बाद में मंदिर का निर्माण हो गया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के छोटा बांगड़दा स्थित सांवरिया नगर में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हकीकत किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था पर सवाल खड़े करने के लिए काफी है। यहां शासकीय माध्यमिक स्कूल की पुरानी इमारत को नए भवन के निर्माण के नाम पर तोड़ दिया गया, लेकिन नया स्कूल बनने से पहले ही उसी जमीन पर पहले ओटला बना और बाद में मंदिर का निर्माण हो गया।
हालात यह हो गए है कि करीब 150 बच्चों का भविष्य अब एक कमरे में चल रही पढ़ाई के भरौसे हैं। नईदुनिया की टीम मौके पर पहुंची, एक शिक्षक मिले उन्होंने बताया कि यहां पहली से आठवीं तक के बच्चों की कक्षाएं लगती थीं। नया स्कूल बनाने के लिए भवन को तोड़ा गया, लेकिन जैसे ही यहां से मलबा उठा तो मंदिर का निर्माण कर दिया गया।
इस संबंध में कई बार शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में स्कूल प्रभारी द्वारा निगमायुक्त को शिकायत भी की जा चुकी है, जिसमें बताया कि नए स्कूल निर्माण का आदेश के बाद निगम द्वारा स्कूल भवन तोड़ दिया। इसके बाद अज्ञात लोगों द्वारा यहां मंदिर का निर्माण कर दिया। मामले में उचित कार्रवाई की जाए।
आंगनबाड़ी के एक कक्ष में लग रही कक्षाएं
अभी इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की कक्षाएं पास में स्थित एक आंगनबाड़ी में लगाई जा रही है। यहां इन्हें एक ही कक्ष मिला है। पहली से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई एक ही कक्षा में हो रही है। छह शिक्षक एक कमरें में रहते हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों ने बताया कि वर्तमान में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। इसके बाद दूसरे सत्र में उसी कमरे में छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाई जाती हैं। अलग-अलग उम्र और अलग-अलग पाठ्यक्रम वाले बच्चों को एक साथ पढ़ाने से न तो शिक्षक पूरी तरह पढ़ा पा रहे हैं और न ही बच्चे ठीक से पढ़ाई पर ध्यान दे पा रहे हैं।
जर्जर को तोड़कर नया स्कूल बनाने की है योजना
पुराना स्कूल भवन काफी जर्जर हो चुका था। इसलिए उसे हटाकर नया भवन बनाने की योजना बनाई गई थी। उम्मीद थी कि जल्द ही बच्चों को आधुनिक सुविधाओं वाला नया स्कूल मिलेगा, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही स्कूल की जमीन पर पहले ओटला और बाद में मंदिर का निर्माण हो गया। इसके बाद पूरा मामला उलझ गया और नए भवन का काम अभी तक तक शुरू नहीं हो पाया।
निगम को करना है स्कूल का निर्माण
जानकारी अनुसार स्कूल का निर्माण नगर निगम द्वारा किया जाना है। इसके लिए मई 2025 में टेंडर भी जारी हो चुका है। करीब 90 लाख रूपये से स्कूल के भवन का निर्माण होना है। इसके लिए वीरामणी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर दिया गया। ठेकेदारा द्वारा कई बार निर्माण की कोशिश की गई, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद वह पास लौट गए।
एसडीएम कार्यालय को पत्र लिखा है
स्कूल की जगह पर निर्माण की जानकारी के लिए एसडीएम कार्यालय को पत्र लिख दिया गया है। वहीं से इसमें आगे की कार्रवाई होगी। – निर्माता हिंडोलिया, झोनल अधिकारी (झोन 16)
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