इंदौर में 20 देशों के डेलिगेट्स ने समझा होलकरकालीन इतिहास:  खेती-किसानी और कपास उत्पादन पर पूछे सवाल, ऑर्गेनिक कम्पोस्ट मॉडल की सराहना की – Indore News

इंदौर में 20 देशों के डेलिगेट्स ने समझा होलकरकालीन इतिहास: खेती-किसानी और कपास उत्पादन पर पूछे सवाल, ऑर्गेनिक कम्पोस्ट मॉडल की सराहना की – Indore News

इंदौर में चल रहे BRICS कृषि सम्मेलन के तहत बुधवार को चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका समेत करीब 20 देशों के प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा का दौरा किया। कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने यहां होलकरकालीन इतिहास, संस्कृति और खेती-किसा

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इतिहासकार जफर अंसारी ने दैनिक भास्कर से बताया कि प्रतिनिधियों को होलकर रियासत के दौर में कृषि क्षेत्र में हुए विकास की जानकारी दी गई। इसके लिए उनके निजी संग्रह में मौजूद कई दुर्लभ दस्तावेज, रिकॉर्ड और ऐतिहासिक सामग्री भी दिखाई गई।

इनमें होलकर स्टेट के कृषि विभाग से जुड़े दस्तावेज, गांवों की सूची और किसानों के लिए की गई व्यवस्थाओं का रिकॉर्ड शामिल था।

खेती-किसानी से जुड़े दस्तावेजों में दिखाई दिलचस्पी

विदेशी प्रतिनिधियों ने खास तौर पर यह जानने में रुचि दिखाई कि होलकर शासनकाल में खेती कैसे की जाती थी और किसानों के लिए क्या व्यवस्थाएं थीं। उन्होंने कृषि से जुड़े पुराने दस्तावेजों को ध्यान से देखा और कई सवाल भी पूछे।

इंदौर में 20 देशों के डेलिगेट्स ने समझा होलकरकालीन इतिहास:  खेती-किसानी और कपास उत्पादन पर पूछे सवाल, ऑर्गेनिक कम्पोस्ट मॉडल की सराहना की – Indore News

राजवाड़ा की खूबसूरती और इतिहास ने किया प्रभावित

प्रतिनिधियों ने राजवाड़ा की नक्काशी, वास्तुकला और देवी अहिल्याबाई होलकर से जुड़े इतिहास में खास दिलचस्पी दिखाई। उन्हें राजवाड़ा के निर्माण, उसकी ऐतिहासिक भूमिका और होलकर रियासत में उसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

इंदौर की कपास और व्यापार व्यवस्था को समझा

दौरे के दौरान विदेशी मेहमानों ने इंदौर के पुराने व्यापार और कपास उत्पादन के बारे में भी जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि काली मिट्टी और अनुकूल मौसम की वजह से यहां उच्च गुणवत्ता वाली कपास पैदा होती थी। एक समय इंदौर में छह बड़ी कपास मिलें थीं, जिनका शहर के विकास में बड़ा योगदान रहा।

ऑर्गेनिक कम्पोस्ट मॉडल की सराहना

प्रतिनिधियों को इंदौर में विकसित ऑर्गेनिक कम्पोस्ट मॉडल के बारे में भी बताया गया। उन्हें जानकारी दी गई कि इसके उपयोग से बेहतर गुणवत्ता वाली कपास की फसल होती थी। इस मॉडल को लेकर विदेशी मेहमानों ने काफी रुचि दिखाई और विस्तार से जानकारी ली।

राजबाड़ा का दौरा करते प्रतिनिधि।

राजबाड़ा का दौरा करते प्रतिनिधि।

दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुएं भी देखीं

राजवाड़ा में प्रतिनिधियों को स्वर्ण और रजत से बनी कई ऐतिहासिक वस्तुएं भी दिखाई गईं। इन दुर्लभ धरोहरों को देखकर वे काफी प्रभावित हुए और उनके बारे में कई सवाल पूछे।

इसलिए राजवाड़ा लाए गए विदेशी मेहमान

जफर अंसारी के मुताबिक 1747 में बना राजवाड़ा होलकर रियासत का प्रमुख महल और प्रशासनिक केंद्र रहा है। इंदौर की संस्कृति, इतिहास और विरासत को करीब से दिखाने के लिए BRICS सम्मेलन में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों को यहां लाया गया। राजवाड़ा आज भी इंदौर की पहचान का सबसे प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

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