नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के यहां लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई में सरकारी नौकरी की आड़ में खड़ा किए गए करोड़ों रुपये के कारोबारी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सेमिल ने अपने बेटे, पुत्रवधु और रिश्तेदारों के नाम पर ट्रांसफार्मर निर्माण की कई इकाइयां स्थापित कर रखी थीं। आरोप है कि प्रभाव का इस्तेमाल कर इन्हीं फर्मों को बिजली कंपनी में ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग और संबंधित कार्यों के ठेके भी दिलवाए जाते थे।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेश सहाय के अनुसार जांच में शुभम इलेक्ट्रिकल, कर्निश पावरजोन, एसएस इलेक्ट्रिकल्स, कृष्णा पावर और ए-वन इलेक्ट्रिकल के नाम से संचालित इकाइयों के दस्तावेज मिले हैं। इन फर्मों के माध्यम से ट्रांसफार्मर निर्माण और मरम्मत का कारोबार किया जा रहा था।
पीथमपुर की फैक्ट्रियों में मिलीं अनियमितताएं, पुत्र संभालता था पूरा संचालन
डीएसपी सुनील तालान के नेतृत्व में पीथमपुर स्थित फैक्ट्रियों की तलाशी के दौरान कर्मचारियों ने पूछताछ में बताया कि दस्तावेज भले ही परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर हैं, लेकिन पूरे कारोबार का संचालन शिवराम सेमिल के पुत्र सौरभ सेमिल द्वारा किया जाता है। लोकायुक्त अब इन फर्मों की हिस्सेदारी, पूंजी निवेश और सरकारी ठेकों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सेमिल के दामाद सुनील इंडोलिया, जो स्वयं बिजली कंपनी में सब इंजीनियर हैं, से जुड़े संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी मिले हैं। लोकायुक्त अब उनकी चल-अचल संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इनमें निवेश का स्रोत क्या है और उसका मुख्य आरोपी से कोई संबंध है या नहीं।
हर पांचवें दिन एक ट्रैप, रिश्वतखोरों में सबसे आगे राजस्व विभाग
छह महीने में 33 कार्रवाई, तीन लाख की रिश्वत तक के मामले उजागर; पुलिस, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा और पंचायत विभाग भी रडार पर।
मध्य प्रदेश में सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई से लगाया जा सकता है। वर्ष 2026 के पहले छह माह में लोकायुक्त ने 33 ट्रैप और भ्रष्टाचार के प्रकरण दर्ज किए। यानी औसतन हर पांचवें दिन एक अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगते या लेते हुए कानून के शिकंजे में फंसा।
राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा ट्रैप, 5 हजार से 3 लाख तक मांगी गई रिश्वत
सबसे अधिक कार्रवाई राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर हुई, जहां पटवारियों के खिलाफ लगातार ट्रैप हुए। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), पुलिस, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, सहकारिता और नगर प्रशासन विभाग के अधिकारी भी लोकायुक्त के रडार पर रहे।
रिश्वत की रकम पांच हजार रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक रही। कई मामलों में भुगतान, नामांतरण, सीमांकन, निर्माण कार्यों के बिल, पंचायत भुगतान, आवास योजना, शिक्षक नियुक्ति और पुलिस प्रकरणों में राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई।
इंदौर पीडब्ल्यूडी में वर्ष की सबसे बड़ी ट्रैप कार्रवाई
वर्ष की सबसे बड़ी ट्रैप कार्रवाई इंदौर में लोक निर्माण विभाग में हुई, जहां ठेकेदार के लंबित बिल जारी करने के एवज में तीन अधिकारियों जयदेव गौतम, टीके जैन और अंशु दुबे द्वारा कुल तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया। लोकायुक्त ने कार्रवाई कर आरोपितों को रंगे हाथ पकड़ लिया।
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