नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। जिले के लिए हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद जागी है। ब्रिटिश कालीन नागचून हवाई पट्टी का उन्नयन और विस्तार कर इसे मिनी एयरपोर्ट बनाया जाएगा। वैसे इससे पूर्व भी इसे एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की घोषणाएं हो चुकी हैं। एयरपोर्ट बनने से खंडवा के विकास को गति मिल सकेगी। इससे व्यापार-व्यवसाय के साथ ही पर्यटन को नया आसमान मिल सकेंगा।
केंद्र सरकार की उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना अंतर्गत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने प्रथम चरण में सिंगरौली सहित पांच जिलों की हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्णय लिया है। इनमें खंडवा की नागचून स्थित पुरानी हवाई पट्टी भी शामिल है। इसके बाद अब हवाई पट्टी के विस्तारीकरण, उन्नयन और आवश्यक सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल गया है। भोपाल में हुई विमानन विभाग की बैठक में मध्य प्रदेश के सिंगरोली, सागर, नीमच, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, उमरिया और शहडोल हवाई पट्टी को एयरपोर्ट में परिवर्तित करने का प्रस्ताव हुआ है।
सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात कर नागचून हवाई पट्टी के नवीनीकरण और सुंदरीकरण को लेकर ज्ञापन सौंपा था। सांसद ने बताया कि यह हवाई पट्टी करीब 75 वर्ष पुरानी है। वर्ष 2014 में लोक निर्माण विभाग द्वारा इसका उन्नयन कराया गया था। वर्तमान में रनवे की लंबाई 975.20 मीटर और चौड़ाई 45.60 मीटर है। हवाई पट्टी का कुल क्षेत्रफल करीब 40.64 हेक्टेयर है। यहां पक्की बाउंड्रीवाल, तार फेंसिंग, दो एच-टाइप क्वार्टर और रिटायरिंग रूम भी मौजूद हैं। वीआइपी छोटे चार्टर प्लेन और हेलीकाप्टर का आवागमन होता रहता है।
नियमित उड़ानों से बढ़ेंगे विकास के अवसर
सांसद ने खंडवा की भौगोलिक और व्यावसायिक स्थिति का उल्लेख करते हुए हवाई सेवा को जरूरी बताया। खंडवा के आसपास बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, बैतूल और हरदा जैसे जिले हैं। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, हनुवंतिया, पुनासा जंगल सफारी, सिंगाजी थर्मल पावर, ओंकारेश्वर और इंदिरासागर परियोजनाओं के कारण क्षेत्र में धार्मिक, पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
ज्ञापन में मुंबई, नई दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए नियमित यात्री विमान सेवाएं शुरू करने तथा भविष्य में मालवाहक विमानों के माध्यम से वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की मांग की गई है। इससे व्यापारियों, उद्योगों, पर्यटकों और मरीजों को तेज आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
स्वास्थ्य और पर्यटन को भी मिलेगा लाभ
हवाई पट्टी के एयरपोर्ट के रूप में विकसित होने से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है। गंभीर मरीजों को बड़े शहरों तक पहुंचाने, पर्यटन को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने में हवाई कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं खरगोन और बड़वानी जैसे आसपास के जिलों के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने सांसद पाटिल को हवाई पट्टी का सर्वे कराकर विस्तार और विकास कराने का आश्वासन दिया है। अब क्षेत्रवासियों की नजर सर्वे और आगे की स्वीकृति पर है। यदि प्रस्तावित विस्तार और एयरपोर्ट सुविधाएं धरातल पर उतरती हैं तो यह खंडवा के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
ब्रिटिशकालीन है हवाई पट्टी
शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर बनी हवाई पट्टी ब्रिटिशकालीन है। इसे वर्ष 1949 के आसपास द्वितीय विश्व युद्ध के समय बनाया गया था। रेलवे स्टेशन के पास गोरा बैरक में भंडारण के लिए युद्ध सामग्री हवाई जहाज से खंडवा पहुंचती थी और जरूरत पड़ने पर गोरा बैरक से गोला-बारूद और अन्य सामग्री अन्य जगह भेजी जाती थी। विदित हो कि वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने भी यहां छोटा एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी।
लैंडिंग व टेक ऑफ में यह दिक्कत
जानकारों का कहना है कि हवाई पट्टी के पास नागचून तालाब और बड़गांव भीला रोड के दोनों ओर हाईटेंशन लाइन से चार्टर प्लेन के पायलट को परेशानी होती है। खंडवा में हवाई पट्टी की लंबाई करीब 2800 फीट है। लंबाई कम होने से प्लेन लैंडिंग व टेकआफ में दिक्कत होती है। हवाई पट्टी पर रि-कारपेटिंग की गई है लेकिन सरफेस स्मूथ नहीं है। यहां मार्किंग भी ठीक नहीं हैं।
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