इंस्पायरिंग:ईमानदारी और मेहनत करने की आदत है, तो कुछ भी असंभव नहीं – नीता अंबानी

इंस्पायरिंग:ईमानदारी और मेहनत करने की आदत है, तो कुछ भी असंभव नहीं – नीता अंबानी




आंत्रप्रेन्योर नीता अंबानी को फॉर्च्यून की पावरफुल महिलाओं की लिस्ट में पहला स्थान मिला है। उनकी सफलता के राज, उन्हीं की जुबानी… अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि जिंदगी की सबसे बड़ी सीख मुझे कहां से मिली। क्या वह किसी बिजनेस स्कूल ने दी? क्या वह काम करने से मिली? या सफलता ने यह सब सिखाया? मेरा जवाब एक ही होता है… सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी मेरा परिवार था। मुझे यकीन है कि इंसान के असली संस्कार उसके बचपन में बनते हैं। मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हूं कि मेरे माता-पिता ने मुझे बचपन से ही कुछ ऐसी बातें सिखाईं, जो आज भी हर फैसले में मेरा साथ देती हैं। उन्होंने मुझे दूसरों की फिक्र करना सिखाया, सबके साथ मिलकर रहना सिखाया, मेहनत करना सिखाया, बड़ों का सम्मान करना सिखाया और सबसे बढ़कर… सब्र रखना सिखाया। यही बातें आज भी मेरे जीवन का रास्ता तय करती हैं।
मैं एक बड़े, खुशहाल और सादगी भरे संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी हूं। घर में करीब 30 लोग एक ही छत के नीचे रहते थे। दादी, चार चाचा, चार चाची और हम सभी भाई-बहन। हमारे पास बहुत साधन नहीं थे, लेकिन एक चीज की कभी कमी नहीं थी…प्यार की। हमें हमेशा बड़े सपने देखने के लिए कहा जाता था। घर का माहौल ऐसा था कि हर दिन खुशी से भरा होता था।
हमारे परिवार में 11 लड़कियां और एक लड़का था। लेकिन कभी किसी ने महसूस नहीं होने दिया कि लड़का और लड़की अलग हैं। आज से करीब 60 साल पहले मेरे माता-पिता ने हमें सिखा दिया था कि जो काम लड़के कर सकते हैं, वही काम लड़कियां भी कर सकती हैं। यह बात मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गई। इसी सोच ने मुझे हर नई चुनौती को अपनाने का हौसला दिया। मेरे लिए परिवार सिर्फ एक रिश्ता नहीं है। परिवार मेरी सबसे बड़ी ताकत है। वही मेरी पनाह है, वही मेरा घर है और वही मेरी दुनिया है। हमारे परिवार में हम सब एक-दूसरे का हौसला बढ़ाने वाले हैं। कोई छोटा सपना हो या बड़ा… पूरा साथ मिलता है। हर खुशी मिलकर मनाई जाती है। हर मुश्किल का सामना मिलकर किया जाता है।
मेरे जीवनसाथी मुकेश ने मुझे मेरे कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया। नई जिम्मेदारियां लेने का हौसला दिया। मेरे जीवन की पहली प्रेरणा परिवार की महिलाएं थीं। मेरी मां हिम्मत देने वाली और हर हाल में अच्छा सोचने वाली इंसान थीं। मेरी नानी गांधीजी के विचारों पर चलती थीं। मेरी बुआओं ने सिखाया कि मुश्किलें चाहे कितनी बड़ी क्यों न हों, हिम्मत और मेहनत से रास्ता निकाला जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिया कि अगर इरादा साफ है, ईमानदारी है और मेहनत करने की आदत है, तो इंसान कुछ भी बन सकता है। मेरे पिता उन सबसे दयालु लोगों में से एक थे, जिन्हें मैंने अपनी जिंदगी में देखा। मेरे ससुर धीरूभाई हमेशा बड़ा सोचने की बात करते थे। वे कहते थे सपनों का आकार कभी छोटा मत रखो। सपना बड़ा होगा, तो मेहनत बड़ी होगी और मंजिल भी बड़ी मिलेगी। सपने देखें, मेहनत करें। लेकिन अपनी जड़ों, अपने परिवार और अपने संस्कार कभी मत छोड़ें। इंसान को ऊंचाई तक पहुंचाने वाले वे लोग होते हैं, जिन्होंने बचपन से उसके दिल में सही बातें बोई होती हैं। संस्कारों को पहचान बनाएं, परिवार को ताकत
लंबी ड्राइव, व्यायाम, भरतनाट्यम का अभ्यास, संगीत, खेल या अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ कुछ पल बिताना… मेरे लिए यही सबसे बड़ी खुशियां हैं। असली सफलता तब है जब आपके संस्कार पहचान बनें और परिवार ताकत।
(तमाम इंटरव्यू में)



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