ईरान-अमेरिका डील:शांति समझौता या चुनावी चाल? आपूर्ति शृंखला पर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई Pm ने भारत को किया आगाह – 60 Days Of Ceasefire Israeli Expert Weighs In On Us Iran Peace Talks Scott Morrison

ईरान-अमेरिका डील:शांति समझौता या चुनावी चाल? आपूर्ति शृंखला पर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई Pm ने भारत को किया आगाह – 60 Days Of Ceasefire Israeli Expert Weighs In On Us Iran Peace Talks Scott Morrison

वैश्विक राजनीति में एक बहुत बड़ी हलचल हुई है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच एक अचानक एक समझौता हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच जारी तनाव कुछ कम होने की उम्मीद है। समझौते के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री रास्ता भी व्यापार के लिए फिर से खुलने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा लाने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया है। हालांकि, दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञ इस तथाकथित शांति समझौते पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

‘यह कोई शांति समझौता नहीं’:इस्राइली विशेषज्ञ का दावा

यरुशलम सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड फॉरेन अफेयर्स (जेसीएफए) के सीईओ सागिव स्टैनबर्ग ने इस समझौते की असलियत पर सीधे उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि यह कोई स्थायी शांति समझौता नहीं है। यह अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों को देखकर किया गया महज 60 दिनों का एक अस्थायी युद्धविराम है। स्टैनबर्ग के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन इस युद्ध में अपना कोई भी मुख्य लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है। इस ढील से ईरान को भारी मात्रा में पैसा मिलेगा। ईरान इस पैसे का इस्तेमाल हिजबुल्ला और हूतियों जैसे अपने खतरनाक प्रॉक्सी संगठनों को दोबारा मजबूत करने में करेगा। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस सौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।

ईरान-अमेरिका डील:शांति समझौता या चुनावी चाल? आपूर्ति शृंखला पर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई Pm ने भारत को किया आगाह – 60 Days Of Ceasefire Israeli Expert Weighs In On Us Iran Peace Talks Scott Morrison


पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम की चेतावनी

दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी इस समझौते को लेकर दुनिया को आगाह किया है। उन्होंने ईरान को एक ‘सर्वनाशकारी शासन’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस बात का पूरा जोखिम है कि यह समझौता बहुत जल्द टूट जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि युद्ध रुकने से वैश्विक स्थिरता को कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलेगी। लेकिन ईरान जैसी ताकतों पर लंबे समय के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता।

यह भी पढ़ें: Explainer: अमेरिका-ईरान के समझौते के बाद इस्राइल क्या करेगा, कैसा है देश का माहौल; नेतन्याहू किस मुसीबत में?

आपूर्ति शृंखला को ‘हथियार’ बनाने की साजिश

स्कॉट मॉरिसन ने वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखला में हो रही गंदी राजनीति पर सबसे गंभीर चिंता जताई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया अब उस खतरनाक दौर में है जहां जरूरी आर्थिक आपूर्ति शृंखलाओं को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया से अपील की कि वे केवल तेल, गैस या ईंधन ही नहीं, बल्कि डाटा, सबमरीन केबल और अंतरिक्ष जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी अपनी आत्मनिर्भरता को तेजी से बढ़ाएं। उन्होंने संकट के इस दौर में संतुलन बनाए रखने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की जमकर तारीफ की।


हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका सबसे अहम

बदलते दौर में मॉरिसन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को दुनिया का सबसे मुख्य केंद्र बताया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे क्षेत्र को किसी भी तानाशाही ताकत के प्रभाव से बचाने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकतांत्रिक नीतियों को उन्होंने विकासशील देशों के लिए एक पारदर्शी और बेहतरीन विकल्प बताया है।

स्विट्जरलैंड में इस शुक्रवार को दोनों देश  आधिकारिक तौर पर इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गारीबाबादी ने पहले ही साफ कर दिया है कि ईरान आगे की मुख्य वार्ताओं में तभी बढ़ेगा जब अमेरिका उसके रोके गए पैसों को रिलीज करेगा और आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाएगा।

Source link
#ईरनअमरक #डलशत #समझत #य #चनव #चल #आपरत #शखल #पर #परव #ऑसटरलयई #न #भरत #क #कय #आगह #Days #Ceasefire #Israeli #Expert #Weighs #Iran #Peace #Talks #Scott #Morrison

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *