ईरान-अमेरिका समझौते का आर्टिकल 5 क्या है और इसे क्यों बताया जा रहा है तनाव की वजह?

ईरान-अमेरिका समझौते का आर्टिकल 5 क्या है और इसे क्यों बताया जा रहा है तनाव की वजह?

होर्मुज़ स्ट्रेट

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इमेज कैप्शन, 14 बिंदुओं वाले एमओयू में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का प्रावधान शामिल है

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मध्य पूर्व में जंग ख़त्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हो चुका है.

17 जून को 14 बिंदु वाले मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टेंडिंग (एमओयू) पर सहमति बनी थी और जंग पर लगाम लगी थी. लेकिन बीते कुछ दिनों के दौरान अमेरिका और ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में एक-दूसरे पर हमले किए हैं.

दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम को तोड़ने का आरोप लगाया है.

हालांकि अब अमेरिका और ईरान ने पिछले कुछ दिनों में हुए हमलों के बाद फ़िलहाल सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है. मीडिया रिपोर्टों में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी गई है.

अमेरिकी अधिकारी ने बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज़ से पुष्टि की कि अब जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के आवाजाही कर सकेंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से जारी रहेगी.

हालांकि, ईरान ने अब तक उन रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, जिनमें कहा गया है कि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट में हमले रोकने पर सहमति दे दी है.

14 बिंदुओं वाले एमओयू में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का प्रावधान शामिल है.

दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर इस समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जिनमें आर्टिकल-5 भी शामिल है.

क्या है आर्टिकल-5?

ईरानी झंडा और होर्मुज़ स्ट्रेट

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इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट पर कंट्रोल का मुद्दा शांति वार्ताओं में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा है

अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले जिस एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं उसके बारे में अमेरिका ने जानकारी दी थी.

इस समझौते में अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए आगे बातचीत करने को लेकर दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता शामिल है, और इसमें होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान पर अमेरिका के बैन हटाने का भी ज़िक्र शामिल है.

हालांकि जिस आर्टिकल-5 के उल्लंघन का दावा किया जा रहा है उसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

आर्टिकल-5 में कहा गया है, “इस एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करते हुए 60 दिनों तक व्यावसायिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करेगा. इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. यह व्यवस्था केवल फ़ारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक और वहां से वापस आने वाले जहाज़ों पर लागू होगी.”

“व्यावसायिक जहाज़ों की आवाजाही तुरंत शुरू कर दी जाएगी. साथ ही सामरिक और सैन्य बाधाओं को हटाने और ईरान द्वारा समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाने की ज़रूरत को देखते हुए, यह पूरी व्यवस्था 30 दिनों के भीतर बहाल कर दी जाएगी.”

“ओमान सल्तनत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान बातचीत करेगा ताकि होर्मुज़ स्ट्रेट के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं का ढांचा तय किया जा सके.”

“इस विषय पर फ़ारस की खाड़ी से लगे अन्य तटीय देशों के साथ भी चर्चा की जाएगी. यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय क़ानून और होर्मुज़ स्ट्रेट के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप होगी.”

अब्बास अराग़ची

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इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट 30 दिनों तक ईरान की निगरानी में रहेगा

होर्मुज़ स्ट्रेट पर कंट्रोल का मुद्दा शांति वार्ताओं में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा है.

ईरान ने इस जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों से शुल्क (टोल) वसूलने की भी बात कही है, लेकिन अमेरिका और खाड़ी के देशों ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज किया है, क्योंकि उनके निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुज़रता है.

बीते दिनों इराक़ की राजधानी बग़दाद की यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा, “आने वाले 30 दिनों तक होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह ईरान की निगरानी और प्रबंधन में रहेगा. सभी बाधाएं हटने के बाद इस जलमार्ग की पूरी क्षमता बहाल कर दी जाएगी. इसी दिशा में हम काम कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “यह ज़िम्मेदारी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की है. इस मामले में किसी दूसरे पक्ष या देश की कोई भूमिका नहीं है.”

उन्होंने आगे कहा, “एमओयू में यह बात पूरी तरह स्पष्ट है. अगर कोई देश हस्तक्षेप करता है या एकतरफ़ा कार्रवाई करता है, तो इससे स्थिति और बिगड़ेगी और होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा खोलने में और देरी होगी.”

होर्मुज़ स्ट्रेट

दोनों देशों के एक-दूसरे पर हमले

हालांकि दो सप्ताह से भी कम समय पहले लागू हुआ यह युद्धविराम हाल के दिनों में दोनों पक्षों के नए हमलों के कारण ख़तरे में पड़ा है.

गुरुवार को एक बार फिर तनाव बढ़ गया, जब ईरान की ओर से दागा गया एक मिसाइल होर्मुज़ स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज़ से टकरा गया था.

इसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान पर कई हवाई हमले किए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि ये हमले व्यावसायिक जहाज़ों के ख़िलाफ़ जारी “आक्रामक कार्रवाई” के जवाब में किए गए.

शनिवार को ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए.

अमेरिका का कहना है कि इनमें से कोई भी हमला अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचा और न ही किसी तरह का जान-माल का नुक़सान हुआ.

होर्मुज़ स्ट्रेट तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. फ़रवरी के अंत में अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद तेहरान ने इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था.

शुक्रवार को अमेरिका ने इसराइल और लेबनान के बीच एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराने में भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई. इसका उद्देश्य स्थायी शांति का रास्ता तैयार करना था.

हालांकि, दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच जारी लड़ाई के कारण भी यह युद्धविराम भी कई बार ख़तरे में पड़ा है.

लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के प्रमुख ने इस समझौते को ख़ारिज कर दिया है और बेरूत की सरकार पर लेबनान की संप्रभुता को कमज़ोर करने का आरोप लगाया.

समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद इसराइली सेना ने कहा था कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली लगभग 200 मीटर लंबी एक सुरंग पर हमला किया.

इसराइली सेना का दावा है कि उस सुरंग में बड़ी संख्या में हथियार रखे गए थे.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ के साझा बयान के मुताबिक, इस हमले से पहले अमेरिका को इसकी जानकारी दे दी गई थी.

ईरान का कहना है कि एक बड़ी सीज़फ़ायर डील के लिए लेबनान में जंग ख़त्म होनी चाहिए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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