ईसीआईनेट पोर्टल विवाद:कांग्रेस ने चुनाव आयोग को बताया ‘झूठा’, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम पर क्या बोले जयराम रमेश? – Congress Accuses Eci Ecinet Portal Violation Representation People Act Jairam Ramesh

ईसीआईनेट पोर्टल विवाद:कांग्रेस ने चुनाव आयोग को बताया ‘झूठा’, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम पर क्या बोले जयराम रमेश? – Congress Accuses Eci Ecinet Portal Violation Representation People Act Jairam Ramesh

कांग्रेस ने ईसीआईनेट पोर्टल को लेकर शुक्रवार को चुनाव आयोग पर ‘झूठ बोलने’ और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कानून और संविधान के उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 26 सितंबर, 2026 को चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए ‘डैमेज कंट्रोल, लेकिन वास्तव में नुकसान बढ़ाने वाले’ प्रेस नोट में आयोग ने एक समिति बनाने का वादा किया था, जो यह प्रमाणित करेगी कि कानूनी रूप से ईसीआईनेट पोर्टल ‘अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है’। उन्होंने बताया कि ईसीआईनेट पोर्टल 22 जनवरी, 2026 को ‘पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जनता के विश्वास को बढ़ाने’ के उद्देश्य से बड़े जोर-शोर से लॉन्च किया गया था। अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव आयोग के प्रेस नोट में आश्वस्त किया गया था कि इसे ‘कानून के सख्त अनुपालन में’ और भारत के संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 तथा निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के पूर्ण अनुपालन में विकसित किया गया है, लेकिन यह सब झूठ था।


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जयराम रमेश ने क्या कहा?

रमेश ने कहा कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की ईसीआईनेट मतदाता सूची प्रणाली तक पहुंच प्रतिबंधित करके और गोवा, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों में अधिकारियों के फैसलों को दरकिनार करके सीईसी के नियंत्रण वाले ईसीआई ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि दोनों कानून यह निर्धारित करते हैं कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के पास मतदाता सूची को लेकर वैधानिक अधिकार है। रमेश ने बताया कि पिछले सप्ताह हुए खुलासों के बाद महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 24 सितंबर, 2026 को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इसमें सुधार की मांग की थी।

रमेश ने कहा कि आज से इंडिया गठबंधन, नागरिक और कई समाजिक संगठन कानून और संविधान के इन उल्लंघनों के लिए जवाबदेही की मांग करते हुए देशभर में सड़कों पर उतरेंगे। इसके पहले कांग्रेस ने गुरुवार को कहा था कि चुनावी व्यवस्था पर कब्जे के खिलाफ आवाजें तेज होती जा रही हैं और जोर देकर कहा था कि नागरिक अब किसी भी रूप में ‘वोट चोरी’ बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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कब होगा ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च?

विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने बुधवार को सभी जिलों में ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च और पांच बड़ी रैलियों की घोषणा की थी। उन्होंने मांग की थी कि भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं और सुप्रीम कोर्ट से एसआईआर और चुनावी ‘अनियमितताओं’ से जुड़े मामलों में तेजी लाने की अपील की थी। 19 राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक में यह तय किया गया कि सभी विपक्षी सांसद छह अक्तूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे और राष्ट्रपति से मुलाकात कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाएंगे। विपक्षी गठबंधन ने बैठक में सीईसी के इस्तीफे की मांग पर भी चर्चा की और कहा कि जब तक उन्हें पद से हटाया नहीं जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

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