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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना के तहत उज्जैन के तीन गांवों की भूमि अधिग्रहण मामले में किसानों को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने ग्राम मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के किसानों की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे, जिन पर प्रशासन द्वारा विधि-सम्मत विचार नहीं किया गया। किसानों की और कोर्ट में बताया कि तीन बडे रोड इन गांवों से कनेक्ट है मुआवजा राशि के चलते किसान अपनी भूमि नहीं देना चाहते हैं। अधिवक्ता विशाल चौहान बताया कि न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। इन तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथा स्थिति बनाए रखने का महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया। उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है।
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