एंबुलेंस में हूटर था न ही प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था। चालक ने एमवाय अस्पताल पहुंचाने में सवा घंटा लगा दिया और अनिल ने 20 मिनट पहले ही दम तोड़ दिया…और पढ़ें

HighLights
- मांगलिया सड़क हादसे में एंबुलेंस बनी मरीज की काल
- 1 घंटे 25 मिनट में अस्पताल पहुंची खटारा एंबुलेंस
- देवास निवासी अनिल चौहान की हुई दर्दनाक मौत
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सड़क हादसे में घायल निजी कंपनी के अकाउंटेंट अनिल चौहान की सिस्टम की लापरवाही से मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल अनिल को राहगीरों ने निजी अस्पताल पहुंचाया पर यहां से पुलिस चौकी पर भेज दिया। चौकीवालों ने 108 एंबुलेंस बुलाई पर उसमें ऑक्सीजन ही नहीं थी। गाड़ी में हूटर था न ही प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था। चालक ने एमवाय अस्पताल पहुंचाने में सवा घंटा लगा दिया और अनिल ने 20 मिनट पहले ही दम तोड़ दिया।
मिनी ट्रक ने अनिल की बाइक को मारी टक्कर
जयश्री नगर (देवास) निवासी 50 वर्षीय अनिल पुत्र अनोखी लाल जंजीरवाला चौराहा स्थित बिल्डिंग मटेरियल कंपनी में नौकरी करते थे और करीब 15 सालों से अनिल अपडाउन कर रहे थे। गुरुवार सुबह करीब पौने 11 बजे मांगलिया टोलनाका के समीप ईंट से भरे मिनी ट्रक ने अनिल की बाइक को टक्कर मार दी। ट्रक में ईंट भरी हुई थी।
न तो ऑक्सीजन थी न उपचार की कोई व्यवस्था
राहगीरों ने गंभीर अवस्था में मांगलिया के निजी अस्पताल (गुर्जर अस्पताल) पहुंचाया लेकिन डॉक्टर ने स्थिति देखकर एमवाय अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। लोग उन्हें मांगलिया पुलिस चौकी ले गए और एंबुलेंस बुलाने की मांग की। पुलिस वालों ने 108 एंबुलेंस बुलाई लेकिन तब तक उनके साले देवेंद्र वर्मा और पंकज वर्मा भी पहुंच गए। देवेंद्र के अनुसार एंबुलेंस में स्ट्रेचर के अलावा कुछ भी नहीं था। न तो ऑक्सीजन थी न उपचार की कोई व्यवस्था थी।
अनिल ने करीब 20 मिनट पहले ही दम तोड़ा
अनिल के स्वजन ने स्थिति देख कर निजी अस्पताल में ले जाने की मांग की लेकिन चालक ने स्पष्ट मना कर दिया और कहा वह मरीज को एमवाय अस्पताल ही ले जाएगा। गाड़ी में हूटर और हॉर्न भी नहीं था। भारी ट्रैफिक के बीच एंबुलेंस रेंगते हुए निकली और 1 घंटा और 25 मिनट अस्पताल पहुंचाने में लगा दिए।
डॉक्टर ने मरीज को देखते ही बता दिया कि बचाने की कोई उम्मीद ही नहीं है। अनिल ने करीब 20 मिनट पहले ही दम तोड़ दिया। थोड़ी देर पहले अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद अनिल की जान बच सकती थी।
स्वजन बोले- डॉक्टर उपचार करते तो बच जाती जान
अनिल का एक बेटा ध्रुव चौहान है। परिवार की जिम्मेदारी उस पर ही थी। देवेंद्र के अनुसार समय पर उपचार मिल जाता तो अनिल की जान बच जाती। गुर्जर अस्पताल में भी भर्ती नहीं किया गया। एंबुलेंस चालक भी निजी अस्पताल नहीं ले गया। चौकी प्रभारी सत्येंद्र सिंह सिसोदिया के अनुसार स्वजन सीधे अस्पताल ले गए थे। गुर्जर अस्पताल में तो भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
Source link
#एबलस #म #न #ऑकसजन #न #हटर #सव #घट #म #असपतल #पहचय #इदर #म #अकउटट #क #मनट #पहल #ह #ह #गई #मत


