बाज़ार में इस आम ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जहां तीन किलोग्राम वजन का एक अकेला ‘नूरजहाँ’ आम 3500 रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर बिका है। …और पढ़ें

HighLights
- इस सीजन में 3 किलोग्राम का एक ‘नूरजहाँ’ आम ₹3500 में बिका
- इस अफगानी नस्ल के आमों की सुरक्षा में 10 लट्ठधारी गार्ड तैनात
- आलीराजपुर का आम अपने स्वाद के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। अपने असाधारण आकार और बेमिसाल स्वाद के लिए देश-विदेश में मशहूर ‘नूरजहाँ’ आम की मांग इस सीज़न में आसमान छू रही है। बाज़ार में इस आम ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जहां तीन किलोग्राम वजन का एक अकेला ‘नूरजहाँ’ आम 3500 रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर बिका है। आम की इस अनोखी खेप को खरीदने के लिए शौकीनों के बीच होड़ मची हुई है।
सीमित उत्पादन और एडवांस बुकिंग
स्थानीय किसान शिवराज जादव और भारतसिंह जादव ने बताया कि मौसम और अन्य कारणों से इस बार बगीचों में नूरजहाँ का उत्पादन काफी सीमित हुआ है। पैदावार कम होने के बावजूद इसके दीवानों में कोई कमी नहीं आई है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों के आम प्रेमियों ने फसल तैयार होने से पहले ही इसकी एडवांस बुकिंग करा ली थी।

10 लट्ठधारी गार्ड कर रहे हैं रखवाली
‘नूरजहाँ’ आम जितना कीमती है, इसकी सुरक्षा भी उतनी ही कड़ाई से की जा रही है। बगीचे में पेड़ों पर लटके इन बेशकीमती फलों को चोरी और नुकसान से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। किसानों ने फसल की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए 10 लट्ठधारी सुरक्षा गार्ड तैनात किए हैं, जो बगीचे की कड़ी रखवाली कर रहे हैं।

अफगानिस्तान से कट्ठीवाड़ा तक का सफर
इस आम का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है। किसानों के अनुसार, मूल रूप से यह अफगानी नस्ल का आम है। वर्ष 1965 में इसकी कलम को गुजरात से लाया गया था। अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र की विशेष आबोहवा और वहां की मिट्टी में किसानों के कड़े परिश्रम और तालमेल ने इस नस्ल को पूरी तरह से ढाल दिया, जिसके बाद यह यहाँ की विशेषता बन गया।

वजन के हिसाब से तय होती है कीमत
इस साल नूरजहाँ के पेड़ों पर डेढ़ किलो से लेकर तीन किलोग्राम तक के फल आए हैं। आकार और वजन के हिसाब से ही इनकी कीमत तय की गई है। जहां भारी-भरकम तीन किलो का फल ₹3500 तक बिका है, वहीं अपेक्षाकृत छोटे फलों की कीमत 1000 से 1500 रुपये के बीच रही है।
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
किसान भारतसिंह जादव के मुताबिक, नूरजहाँ आम का यह पौधा अब सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि पूरे आलीराजपुर जिले की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है। अपनी इसी खासियत, अनोखे आकार और लाजवाब स्वाद के कारण इस आम को वर्ष 1999 और वर्ष 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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