एमपी में 3 साल में 1,968 नाबालिग बच्चियां लापता:  हर रोज गायब हो रहीं दो मासूम; कटनी के अधिवक्ता की शिकायत पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त – Katni News

एमपी में 3 साल में 1,968 नाबालिग बच्चियां लापता: हर रोज गायब हो रहीं दो मासूम; कटनी के अधिवक्ता की शिकायत पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त – Katni News

एमपी में 3 साल में 1,968 नाबालिग बच्चियां लापता:  हर रोज गायब हो रहीं दो मासूम; कटनी के अधिवक्ता की शिकायत पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त – Katni News


मध्य प्रदेश में नाबालिग बच्चियों के लगातार लापता होने के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कार्रवाई के लिए कहा है। कटनी के अधिवक्ता अवनीश तिवारी की शिकायत के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के महिला सुरक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश के गृह सचिव को पत्र जारी किया है। मंत्रालय ने मामले को संवेदनशील बताते हुए जल्द कार्रवाई और निवारण के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता की शिकायत के बाद केंद्र ने लिया संज्ञान अधिवक्ता अवनीश तिवारी के मुताबिक, उन्होंने नाबालिग बच्चियों के लापता होने से जुड़े आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय में शिकायत की थी। शिकायत में प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चियों के लापता होने और उनकी तलाश में तेजी लाने की मांग की गई थी। इसके बाद मंत्रालय की ओर से राज्य के गृह सचिव को पत्र भेजा गया है। 3 साल में 1,968 बच्चियों के लापता होने का दावा अधिवक्ता ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में 1,968 नाबालिग बच्चियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए हैं। उनके मुताबिक करीब 2 हजार नाबालिग बच्चियां ऐसी हैं, जिनका अब तक पता नहीं चल पाया है। आंकड़ों का औसत निकाला जाए तो रोजाना करीब दो नाबालिग बच्चियों के लापता होने की बात सामने आती है। हालांकि, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अलग-अलग वर्षों और श्रेणियों के आंकड़ों को अलग-अलग देखना जरूरी है। मध्य प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड में भी नाबालिग बालिकाओं के गुम होने और उनकी बरामदगी से जुड़े मामले दर्ज हैं। 12 से 17 साल की किशोरियां ज्यादा प्रभावित बताया गया है कि लापता होने वाली बच्चियों में 12 से 17 वर्ष की किशोरियों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा 6 से 10 वर्ष की बच्चियों के लापता होने के मामले भी सामने आते रहे हैं। कम उम्र की बच्चियों के गायब होने से उनकी तलाश और सुरक्षित वापसी को लेकर पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ जाती है। सोशल मीडिया और पहचान के लोगों से संपर्क भी वजह शिकायत में बच्चियों के घर से चले जाने के पीछे कई कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रेम प्रसंग, सोशल मीडिया के जरिए हुई ऑनलाइन दोस्ती, नौकरी का लालच और बेहतर जीवनशैली का झांसा शामिल है। कुछ मामलों में बच्चियों के मानव तस्करी, बाल श्रम या शोषण का शिकार होने की आशंका भी जताई गई है। इन कारणों की पुष्टि प्रत्येक मामले की जांच के आधार पर ही हो सकती है। लापता बच्चों की तलाश के लिए पहले से चल रहे अभियान मध्य प्रदेश पुलिस लापता बच्चों की तलाश के लिए ऑपरेशन मुस्कान सहित विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाती रही है। विधानसभा में सरकार ने बताया था कि लापता बच्चों की तलाश के लिए विशेष टीमें, साइबर जांच, सोशल मीडिया और ट्रैक द मिसिंग चाइल्ड पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है। अब राज्य सरकार से कार्रवाई की उम्मीद केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र के बाद अब राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग से लापता बच्चियों की तलाश और सुरक्षित वापसी को लेकर कार्रवाई की उम्मीद है। साथ ही ऐसे मामलों में बच्चियों को बहला-फुसलाकर ले जाने वाले लोगों और संभावित तस्करी नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। शिकायतकर्ता अधिवक्ता ने केंद्र के हस्तक्षेप के बाद मामले में प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

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