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नरसिंहपुर जिले में 108 और जननी एंबुलेंस सेवाओं की वास्तविक स्थिति एक विशेष ऑडिट में सामने आई है। बुधवार रात में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पता चला कि कई एंबुलेंस बिना पर्याप्त रखरखाव के चल रही हैं और उनमें मरीजों के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी है। अपर संचालक के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. मनीष मिश्रा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने अब तक लगभग आठ एंबुलेंसों का निरीक्षण किया है। ऑडिट के दौरान कई वाहनों में दवाइयां, ऑक्सीजन सिलेंडर, स्टेपनी और अलार्म जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं पाई गईं। कुछ एंबुलेंसों के शॉक एब्जॉर्बर भी खराब मिले, जिससे वे अक्सर रास्ते में खराब हो जाती हैं और मरीजों तक पहुंचने में देरी होती है। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई एंबुलेंस निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध नहीं रहती हैं, जिससे मरीजों को समय पर सेवा नहीं मिल पाती और प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) बढ़ जाता है। इस स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने सभी 108 और जननी वाहनों में लगे जीपीएस सिस्टम की आईडी और पासवर्ड मांगे हैं, ताकि अधिकारी वास्तविक समय में वाहनों की लोकेशन पर निगरानी रख सकें। स्वास्थ्य विभाग अब ब्लॉक स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। प्रत्येक बीएमओ को अपने क्षेत्र में संचालित एंबुलेंस सेवाओं की जवाबदेही सौंपी जाएगी। इसके साथ ही, ऑन-रोड एंबुलेंस को निर्धारित स्थान पर रखने और उनके प्रतिक्रिया समय की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। ऑडिट में यह भी खुलासा हुआ कि जिले में संचालित अधिकांश 108 एंबुलेंस 4 से 5 लाख किलोमीटर तक चल चुकी हैं, जिससे उनमें तकनीकी समस्याएं बढ़ रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए, विभाग ने राज्य स्तर पर नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएमएचओ डॉ. मनीष मिश्रा ने बताया कि संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में सुधार नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा।
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