कर्नाटक:मोरारी बापू ने हंपी में उठाई गोहत्या विरोधी कानून की मांग, बोले- अब अधूरा काम पूरा किया जा सकता है – Karnataka: Morari Bapu Demands Anti-cow Slaughter Law During Ram Katha In Hampi

कर्नाटक:मोरारी बापू ने हंपी में उठाई गोहत्या विरोधी कानून की मांग, बोले- अब अधूरा काम पूरा किया जा सकता है – Karnataka: Morari Bapu Demands Anti-cow Slaughter Law During Ram Katha In Hampi

कथा वाचक संत मोरारी बापू ने गोहत्या विरोधी कानून बनाने की मांग की। मोरारी बापू ने कहा कि गुलजारी लाल नंदा के गृह मंत्री रहते हुए संसद के सामने गोहत्या विरोधी कानून की मांग करने वाले संतों पर गोलियां चलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि गुलजारी लाल नंदा अपनी खिड़की से वह दृश्य देखते रह गए थे। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि आज चाहें तो गोहत्या विरोधी कानून बनाने का वह अधूरा कार्य अब पूरा किया जा सकता है।

भारत स्वस्तिक यात्रा के दौरान कर्नाटक के हंपी में मंगलवार को मानस कथा वाचन करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि यहां की आवाज वहां (केंद्र) तक पहुंचनी चाहिए। मोरारी बापू ने कहा कि गाय के चार आंचल केवल दूध देने के लिए नहीं हैं। ये चार आंचल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह अंश (जीव) के होने से अंशी (परमात्मा) के होने का प्रमाण मिलता है, उसी तरह गोमाता के चारों आंचल को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के होने का प्रमाण मिलता है और उन्हें इनके प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।

संत मोरारी बापू ने कहा कि इस भूमि के कई ऐतिहासिक पौराणिक महत्त्व हैं। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान चारों युगों में रहे हैं और इस तरह इस हंपी प्रदेश का चारों युगों से संबंध माना जा सकता है। यह प्रदेश भगवान विरूपक्ष और पंपा (मां पार्वती) की भी भूमि है।

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किस राम का जाप

मोरारी बापू ने कहा कि यह द्वंद्व हमेशा चलता रहा है कि किस राम के नाम का जप करना चाहिए, दशरथ पुत्र राम या निर्गुण राम। उन्होंने कहा कि तुलसीदास के समय यह प्रश्न अधिक गंभीर रहा होगा। उन्होंने कहा कि कबीर को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए कि उन्होंने राम को निर्गुण विचारधारा से जोड़ दिया।

नारी महिमा का प्रदेश

हंपी की यह भूमि माता अंजनी की तपोस्थली, माता शबरी के अद्भुत आध्यात्मिक प्रेम, मां तुंगभद्रा नदी, मां स्वयंप्रभा और मां भुवनेश्वरी से जुड़ा हुआ है। इन सबसे अलग, यह भूमि माता सीता से भी जुड़ी हुई है क्योंकि भगवान राम ने सीता की खोज इसी प्रदेश से शुरू की थी।

हंपी का महत्त्व

पौराणिक कथाओं में किष्किन्धा के रूप में जानी जाने वाली नगरी हंपी को भगवान हनुमान की जन्मस्थली के रूप में देखा जाता है। भगवान राम और बाली के बीच युद्ध यहीं पर हुआ था। कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी में यह पेरिस और रोम के बाद दुनिया का सबसे समृद्ध शहर था। राजा कृष्णदेव राय के काल में यह धर्म, अध्यात्म और कला का बड़ा केंद्र था। मुस्लिम आक्रमणकारियों के समय यहां बहुत लूटपाट हुई थी। 1986 में यूनेस्को ने हंपी को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी थी।

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