काले हिरण के मांस की तस्करी : वन्यजीवों की खाल-ट्रॉफी के नेटवर्क की तलाश, जेल में बंद तस्कर को हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत

काले हिरण के मांस की तस्करी : वन्यजीवों की खाल-ट्रॉफी के नेटवर्क की तलाश, जेल में बंद तस्कर को हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत

काले हिरण के मांस की तस्करी और वन्यजीवों के शिकार के मामले में जेल में बंद आरोपितों को उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ से फिलहाल राहत नहीं मिली है। मुख्…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 05:00:00 AM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 05:00:00 AM (IST)

काले हिरण के मांस की तस्करी : वन्यजीवों की खाल-ट्रॉफी के नेटवर्क की तलाश, जेल में बंद तस्कर को हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत
काले हिरण का शिकार करते शिकारी। (एआई इमेज)

HighLights

  1. अब रोजाना होगी सुनवाई, नोडल अधिकारी करना होगा नियुक्त
  2. मुख्य तस्कर 22 महीने से जेल में बंद है
  3. परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने जमानत देने से इन्कार कर दिया

कपिल नीले, नईदुनिया, इंदौर : काले हिरण के मांस की तस्करी और वन्यजीवों के शिकार के मामले में जेल में बंद आरोपितों को उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ से फिलहाल राहत नहीं मिली है। मुख्य तस्कर 22 महीने से जेल में बंद है। परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने जमानत देने से इन्कार कर दिया। साथ ही ट्रायल में देरी पर न्यायालय ने गंभीरता दिखाई और सुनवाई रोजाना करने के आदेश दिए हैं।

इधर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए वन्यजीवों की खाल और ट्राफी की तस्करी से जुड़े अहम सबूत जुटा रही है कि जानवरों के शिकार के बाद बाकी अंगों का तस्कर क्या करते हैं और इन्हें कैसे और कहां भिजवाया जाता है।

काले हिरण का 65 किलो मांस जब्त किया था

एक दिसंबर 2024 को आगरा-मुंबई राजमार्ग पर पीथमपुर के पास महू वन विभाग और पुलिस ने मुंबई निवासी इम्तियाज खान, सलमान पिपारजी और जौहर हुसैन को गिरफ्तार किया था। इनके पास से काले हिरण का 65 किलो मांस, चार मोबाइल, तीन कारतूस, एक देसी पिस्टल और वाहन जब्त किया गया था।

कुछ समय बाद जांच एसटीएसएफ को सौंपी गई। इम्तियाज के मोबाइल की जांच में हिरण, चीतल और बारहसिंगा के शिकार की तस्वीरें और खाल निकालने के वीडियो मिले। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और शाजापुर के राघौखेड़ी गांव निवासी आजाद सिंह सोलंकी और मुंबई निवासी सबाह पुत्र सलाहुद्दीन को भी आरोपित बनाया गया।

खाल और ट्रॉफी की तस्करी बनी सबसे बड़ी पहेली

जांच में अब सबसे अहम सवाल यह है कि शिकार के बाद वन्यजीवों की खाल और सिर यानी ट्राफी आखिर कहां पहुंचाए जाते थे। रिमांड के दौरान पूछताछ के बावजूद आरोपितों से इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि एसटीएसएफ अब इस मामले को सिर्फ काले हिरण के मांस की तस्करी तक सीमित नहीं मानकर इसके पीछे संभावित नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है। टीम मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

गवाहों की मौजूदगी पर भी जोर

तस्कर सलमान की जमानत को लेकर न्यायालय में सुनवाई हुई, जिसमें एक बार फिर याचिका खारिज की गई। 16 सितंबर को न्यायालय ने रोजाना सुनवाई करने को कहा है। इस दौरान गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करना भी अहम होगा। इसके लिए वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है। अब न्यायालय की कार्रवाई और जांच दोनों स्तरों पर मामले को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश होगी।

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