कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि उसे निर्धारित मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है और करीब 20 टीएमसी पानी की कमी है। वहीं, कर्नाटक ने राज्य में सूखे जैसी स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देशों का पालन कर रहा है।
तमिलनाडु ने कहा- फसल को हुआ नुकसान
तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पानी की कमी के कारण राज्य की शुरुआती खरीफ फसल को नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूएमए को पानी की कमी को लेकर स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए, ताकि पिछली कमी की भरपाई हो सके।
जब पीठ ने पूछा कि पानी की कमी कितनी है, तो तमिलनाडु की ओर से इसे करीब 20 टीएमसी बताया गया। हालांकि, हालिया रिपोर्टों के मुताबिक कर्नाटक की ओर से कमी का आकलन करीब 16 टीएमसी बताया गया है।

कर्नाटक ने सूखे का दिया हवाला
कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि राज्य सीडब्ल्यूएमए के निर्देशों के अनुसार पानी छोड़ रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि मौजूदा साल में कर्नाटक खुद सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। कर्नाटक का कहना है कि पानी की उपलब्धता, जलाशयों में आवक और बारिश जैसी परिस्थितियों को सीडब्ल्यूएमए के सामने रखा गया है और प्राधिकरण इन सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है।
CWMA को शिकायत पर फैसला लेने की बात
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी पक्ष को अपनी शिकायत सीडब्ल्यूएमए के सामने रखने और उस पर फैसला पाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु ने पानी की कमी की शिकायत की है, इसलिए सीडब्ल्यूएमए को इस पर फैसला लेना होगा। कोर्ट ने कर्नाटक को तमिलनाडु की याचिका पर एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी।
6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का था निर्देश
इससे पहले 8 सितंबर को सीडब्ल्यूएमए ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूएमए) की सिफारिश को बरकरार रखते हुए कर्नाटक को 9 से 23 सितंबर तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। तमिलनाडु ने इसी अवधि और उससे पहले की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। तमिलनाडु ने अपनी याचिका में पिछली अवधि की कमी की भरपाई की भी मांग की है। राज्य का कहना है कि कावेरी पर निर्भर खेती को पानी की कमी से नुकसान हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में जारी है कावेरी विवाद
कावेरी जल बंटवारे का विवाद दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चला आ रहा है। हाल में 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग याचिका पर सुनवाई से इनकार किया था, जिसमें तमिलनाडु के हिस्से से 70 टीएमसी पानी कर्नाटक को देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा था कि दोनों राज्यों के बीच विवाद पहले से संबंधित मंचों पर चल रहा है।
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