किरदार सांवला, चेहरा फेयर… क्या बॉलीवुड अब भी ऑथेंटिक कास्टिंग से दूर है?

किरदार सांवला, चेहरा फेयर… क्या बॉलीवुड अब भी ऑथेंटिक कास्टिंग से दूर है?


फिल्म ‘आर्यभट्ट का जीरो’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और इसमें लीड एक्टर हिमांश कोहली के लुक को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. असल जिंदगी में फेयर स्किन टोन वाले हिमांश को फिल्म में एक डस्की लुक में दिखाया गया है. उनके इस ट्रांसफॉर्मेशन के बाद एक बार फिर बॉलीवुड में रंगभेद और कास्टिंग को लेकर बहस तेज हो गई है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किसी फेयर स्किन टोन वाले अभिनेता को सांवले किरदार में दिखाने पर सवाल उठे हैं.

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हिमांश कोहली, फोटो- इंस्टाग्राम

इससे पहले ‘सुपर 30’ (2019) में ऋतिक रोशन के लुक और ‘बाला’ (2019) में भूमि पेडनेकर की कास्टिंग को लेकर भी विवाद हुआ था. ऐसे मामलों में बार-बार यही सवाल सामने आता रहा है कि अगर किसी किरदार की पहचान उसकी त्वचा के रंग और उससे जुड़े अनुभवों से होती है, तो क्या ऐसे रोल के लिए नैचुरली डस्की कलाकारों को मौका मिलना चाहिए या फिर स्टार पावर की वजह से बड़े नामों को प्राथमिकता दी जाती है.

आइए जानते हैं बॉलीवुड में कब-कब सांवले किरदारों की कास्टिंग और लुक को लेकर विवाद हुआ और इस पर कलाकारों व फिल्ममेकर्स ने क्या सफाई दी.

Super 30: ऋतिक रोशन के डस्की लुक पर हुई थी बहस

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सुपर 30 में रितिक रोशन, फोटो- इंस्टाग्राम

साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म ‘सुपर 30’ में ऋतिक रोशन ने मैथ्स टीचर आनंद कुमार का किरदार निभाया था. फिल्म में ऋतिक को उनके असली स्किन टोन से ज्यादा डार्क लुक दिया गया था, जिसके बाद उनके लुक को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी.

कई लोगों ने सवाल उठाया था कि आनंद कुमार जैसे किरदार के लिए किसी ऐसे कलाकार को मौका दिया जा सकता था, जिसकी स्किन टोन पहले से वैसी हो. हालांकि, आनंद कुमार ने एक इंटरव्यू में ऋतिक के लुक का बचाव करते हुए कहा था कि यह बदलाव कहानी की जरूरत के हिसाब से किया गया था. उन्होंने ऋतिक की मेहनत और किरदार को समझने के लिए की गई तैयारी की भी तारीफ की थी.

वहीं, ऋतिक रोशन ने भी इस विवाद पर अपनी बात रखी थी. उनका कहना था कि एक अभिनेता को सिर्फ रंग के आधार पर किसी किरदार तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. एक एक्टर का काम अलग-अलग तरह के किरदार निभाना होता है और किसी रोल के लिए लुक बदलना या नया ट्रांसफॉर्मेशन अपनाना एक्टिंग का हिस्सा है.

Bala: भूमि पेडनेकर की कास्टिंग पर भी उठे थे सवाल

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बाला में भूमि पेडनेकर, फोटो- इंस्टाग्राम

साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म ‘बाला’ में भूमि पेडनेकर ने एक सांवली लड़की का किरदार निभाया था. फिल्म में उनके लुक को डार्क मेकअप के जरिए बदला गया था, जिसके बाद उनकी कास्टिंग को लेकर सवाल उठने लगे थे. ट्रेलर रिलीज होने के बाद लोगों ने पूछा था कि जब इंडस्ट्री में कई डस्की एक्ट्रेसेस मौजूद हैं, तो इस किरदार के लिए उन्हें मौका क्यों नहीं दिया गया.

इस विवाद पर भूमि पेडनेकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह एक कलाकार हैं और अलग-अलग तरह के किरदार निभाना उनके काम का हिस्सा है. वहीं, फिल्म के निर्देशक अमर कौशिक ने भी सफाई देते हुए बताया था कि उन्होंने शुरुआत में इस रोल के लिए डस्की स्किन टोन वाली एक्ट्रेस को कास्ट करने पर विचार किया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई.

अमर कौशिक का कहना था कि किसी कलाकार के लुक के साथ प्रयोग करना गलत नहीं है, क्योंकि सिनेमा में कई बार किरदार की जरूरत के हिसाब से अभिनेता के लुक में बदलाव किए जाते हैं.

रंगभेद पर खुलकर बोल चुके हैं कई कलाकार

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चित्रांगदा सिंह और नंदिता दास, फोटो- इंस्टाग्राम

बॉलीवुड में रंगभेद को लेकर कई कलाकार अपनी राय रख चुके हैं. हालांकि, किसी अभिनेता या अभिनेत्री ने यह दावा नहीं किया कि कोई खास फिल्म या किरदार सिर्फ उनकी स्किन टोन की वजह से उनसे छीन लिया गया.

एक्ट्रेस नंदिता दास ने अपनी ‘Dark Is Beautiful’ कैंपेन और कई इंटरव्यू के जरिए समाज और फिल्म इंडस्ट्री में रंग को लेकर बनी सोच पर बात की है. उनका कहना रहा है कि खूबसूरती को सिर्फ फेयर स्किन से जोड़ने वाली सोच बदलने की जरूरत है.

वहीं, चित्रांगदा सिंह ने भी कई इंटरव्यू में माना है कि फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक फेयर स्किन को ज्यादा महत्व दिया जाता रहा है.

हालांकि, इन कलाकारों में से किसी ने भी यह नहीं कहा कि उनकी स्किन टोन की वजह से उनसे कोई खास फिल्म या रोल छीन लिया गया.

Star Power Vs Right Casting: क्या बड़े सितारों की वजह से बदला जाता है किरदार का लुक?

फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या मेकर्स किरदार के हिसाब से कास्टिंग करते हैं या फिर बड़े स्टार की फेस वैल्यू को ध्यान में रखते हैं. कई बार स्टार पावर की वजह से कलाकारों को ऐसे किरदारों में लिया जाता है, जहां कहानी की जरूरत के हिसाब से उनके लुक और स्किन टोन में बदलाव करना पड़ता है.

डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी ने भी एक इंटरव्यू में स्टार पावर की अहमियत पर बात की थी. उनका कहना था कि स्टार्स फिल्म को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करते हैं और उनकी मौजूदगी फिल्म की पहुंच बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है.

इसी वजह से कई बार मेकर्स बड़े नामों को प्राथमिकता देते हैं और उनके लुक में बदलाव कर किरदार के मुताबिक ढालने की कोशिश करते हैं.

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